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Amethi News: कहां हुई चूक, कड़ियां तलाश रही सीबीआई
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 22 Jun 2026 12:27 AM IST
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अमेठी सिटी। बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा कार्यालय में छह करोड़ रुपये से अधिक के गबन की जांच कर रही सीबीआई अब उन परिस्थितियों और व्यवस्थागत चूक की जांच में जुट गई है, जिनकी वजह से लंबे समय तक अनियमितताएं सामने नहीं आ सकीं। बैंक खातों, संपत्तियों और दस्तावेजों की जांच के बाद एजेंसी का फोकस अब विभागीय निगरानी तंत्र पर है।
सूत्रों के अनुसार सीबीआई गबन से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य अभिलेखों का गहन परीक्षण कर रही है। कई वर्षों के रिकॉर्ड का मिलान कर यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित अनियमितताओं का सिलसिला कब शुरू हुआ और कितने समय तक चलता रहा। इसके साथ ही उन प्रक्रियाओं की भी जांच की जा रही है, जिनके माध्यम से वित्तीय लेनदेन और भुगतान की निगरानी की जाती है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि नियमित निरीक्षण, आंतरिक ऑडिट और विभागीय परीक्षण के बावजूद कथित गड़बड़ियां समय रहते क्यों नहीं पकड़ी गईं। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या जानबूझकर अनदेखी के संकेत मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
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मामले में नामजद कनिष्ठ लेखा सहायक मनोज कुमार मालवीय, शिक्षक शैलेश चंद्र शुक्ल, शिक्षक श्रवण कुमार द्विवेदी, आउटसोर्स कर्मी शिवम कुमार पांडेय और अभिषेक सिंह पहले से जांच के घेरे में हैं। सूत्रों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कुछ और लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। सीबीआई की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। विभागीय हलकों में माना जा रहा है कि जांच अब केवल गबन की रकम और उसके इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की दिशा में बढ़ रही है।
सूत्रों के अनुसार सीबीआई गबन से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य अभिलेखों का गहन परीक्षण कर रही है। कई वर्षों के रिकॉर्ड का मिलान कर यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित अनियमितताओं का सिलसिला कब शुरू हुआ और कितने समय तक चलता रहा। इसके साथ ही उन प्रक्रियाओं की भी जांच की जा रही है, जिनके माध्यम से वित्तीय लेनदेन और भुगतान की निगरानी की जाती है।
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जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि नियमित निरीक्षण, आंतरिक ऑडिट और विभागीय परीक्षण के बावजूद कथित गड़बड़ियां समय रहते क्यों नहीं पकड़ी गईं। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या जानबूझकर अनदेखी के संकेत मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
मामले में नामजद कनिष्ठ लेखा सहायक मनोज कुमार मालवीय, शिक्षक शैलेश चंद्र शुक्ल, शिक्षक श्रवण कुमार द्विवेदी, आउटसोर्स कर्मी शिवम कुमार पांडेय और अभिषेक सिंह पहले से जांच के घेरे में हैं। सूत्रों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कुछ और लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। सीबीआई की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। विभागीय हलकों में माना जा रहा है कि जांच अब केवल गबन की रकम और उसके इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की दिशा में बढ़ रही है।