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Amethi News: खड़े मसालों की पैकिंग कर आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 28 Feb 2026 12:40 AM IST
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अमेठी सिटी। ग्राम पंचायत लोहरता के आजाद महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मसाला का कारोबार कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाएं खड़े मसालों की पैकिंग कर स्थानीय बाजार में बिक्री कर रही हैं। समूह के मसाले की खुशबू बाजार के साथ आसपास के गांवों में भी फैल रही है।
ग्रामीण अंचल की महिलाओं ने सब्जी मसालों के जरिये आर्थिक तरक्की की राह खोज ली है। इसकी शुरुआत एक साल पहले समूह से 30 हजार रुपये लेकर हुई। कानपुर से थोक में खड़े मसाले खरीदे गए। इसके बाद जीरा, लौंग, इलाइची, काली मिर्च, दालचीनी, तेजपत्ता, बड़ी इलाइची आदि खड़े मसाले की पैकिंग शुरू की। महिलाएं संबंधित एजेंसी के साथ किराने की दुकानों में तैयार सामान की बिक्री कर रही हैं। प्रति महिला प्रतिदिन करीब 300 से 400 रुपये की आमदनी कर रही है।
समूह की अध्यक्ष मानी ने बताया कि इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने का प्रयास हो रहा है। पिसे सब्जी मसाले के साथ अन्य मसाले तैयार करने की योजना है। बताया कि आजाद महिला स्वयं सहायता समूह का वर्ष 2008 में गठन हुआ। समूह में उनके साथ अमरावती, आशा, पुष्पा, चंद्रावती, माधुरी, मीना, शकुंतला, धर्मावती, कमला व राजकुमारी काम कर रही हैं।
बीसी सखी भी हैं मानी
वर्ष 2021 में मानी बीसी सखी बनीं। मानी ने बताया कि गांववालों को बैंकिंग संबंधी कार्यों के लिए चार किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। इस वजह से बहुत से ग्रामीण महिलाएं बैंकिंग सुविधाओं से कोसों दूर थीं। इसके लिए उन्होंने प्रशिक्षण लेकर अपना कार्य शुरू किया। इन प्रयासों से ग्रामीणों को अपने ही गांव में बैंकिंग सेवाएं मिलने लगीं।
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ग्रामीण अंचल की महिलाओं ने सब्जी मसालों के जरिये आर्थिक तरक्की की राह खोज ली है। इसकी शुरुआत एक साल पहले समूह से 30 हजार रुपये लेकर हुई। कानपुर से थोक में खड़े मसाले खरीदे गए। इसके बाद जीरा, लौंग, इलाइची, काली मिर्च, दालचीनी, तेजपत्ता, बड़ी इलाइची आदि खड़े मसाले की पैकिंग शुरू की। महिलाएं संबंधित एजेंसी के साथ किराने की दुकानों में तैयार सामान की बिक्री कर रही हैं। प्रति महिला प्रतिदिन करीब 300 से 400 रुपये की आमदनी कर रही है।
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समूह की अध्यक्ष मानी ने बताया कि इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने का प्रयास हो रहा है। पिसे सब्जी मसाले के साथ अन्य मसाले तैयार करने की योजना है। बताया कि आजाद महिला स्वयं सहायता समूह का वर्ष 2008 में गठन हुआ। समूह में उनके साथ अमरावती, आशा, पुष्पा, चंद्रावती, माधुरी, मीना, शकुंतला, धर्मावती, कमला व राजकुमारी काम कर रही हैं।
बीसी सखी भी हैं मानी
वर्ष 2021 में मानी बीसी सखी बनीं। मानी ने बताया कि गांववालों को बैंकिंग संबंधी कार्यों के लिए चार किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। इस वजह से बहुत से ग्रामीण महिलाएं बैंकिंग सुविधाओं से कोसों दूर थीं। इसके लिए उन्होंने प्रशिक्षण लेकर अपना कार्य शुरू किया। इन प्रयासों से ग्रामीणों को अपने ही गांव में बैंकिंग सेवाएं मिलने लगीं।
