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Amethi News: 500 स्कूलों में लकड़ी की आंच पर पका खाना
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संविलियन विद्यालय धनेशा राजपूत में चूल्हा मे लकड़ी रखती रसोइया।
- फोटो : संविलियन विद्यालय धनेशा राजपूत में चूल्हा मे लकड़ी रखती रसोइया।
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अमेठी सिटी। रसोई गैस की किल्लत ने परिषदीय स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना की व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है। करीब 500 विद्यालयों में सिलिंडर न मिलने से लकड़ी जलाकर चूल्हों पर खाना पकाया जा रहा है, जिससे पढ़ाई के साथ पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
जिले में 1570 परिषदीय स्कूलों में 1,38,839 बच्चे पंजीकृत हैं। एक विद्यालय में हर माह करीब तीन सिलिंडर की जरूरत पड़ती है। आपूर्ति बाधित होने से प्रधानाध्यापक गैस एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। करीब 500 स्कूलों में गैस संकट गहराया हुआ है।
बुधवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने कई विद्यालयों का जायजा लिया। अधिकांश जगह लकड़ी जलाकर चूल्हों पर भोजन बनता मिला। विभागीय जानकारी के अनुसार मंगलवार को 11 इंटर कॉलेजों में भोजन नहीं बन सका।
न गैस न लकड़ी, राशन भी खत्म
बाजारशुकुल। प्राथमिक विद्यालय धनेशा राजपूत में बुधवार को मध्याह्न भोजन नहीं बन सका। यहां 186 बच्चे नामांकित हैं। तीन रसोइयों में केवल प्रेमा देवी ही मौजूद मिलीं। प्रधानाध्यापक रामसुख विक्रम प्रशिक्षण पर गए हैं। सहायक अध्यापक सूरज कुमार और वंदना दुबे ने बताया कि स्कूल में राशन नहीं बचा है। न सिलिंडर है और न ही लकड़ी की व्यवस्था हो पाई। कंपोजिट विद्यालय दक्खिन गांव में भी चूल्हे पर भोजन बनाया गया।
पांच दिन पहले खत्म हो गई गैस
राजाफत्तेपुर। पूर्व माध्यमिक विद्यालय फूला में भी चूल्हे पर भोजन तैयार किया गया।प्रधानाध्यापक पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि पांच दिन से सिलिंडर खत्म है और नया सिलिंडर नहीं मिल पा रहा।
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जिले में 1570 परिषदीय स्कूलों में 1,38,839 बच्चे पंजीकृत हैं। एक विद्यालय में हर माह करीब तीन सिलिंडर की जरूरत पड़ती है। आपूर्ति बाधित होने से प्रधानाध्यापक गैस एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। करीब 500 स्कूलों में गैस संकट गहराया हुआ है।
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बुधवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने कई विद्यालयों का जायजा लिया। अधिकांश जगह लकड़ी जलाकर चूल्हों पर भोजन बनता मिला। विभागीय जानकारी के अनुसार मंगलवार को 11 इंटर कॉलेजों में भोजन नहीं बन सका।
न गैस न लकड़ी, राशन भी खत्म
बाजारशुकुल। प्राथमिक विद्यालय धनेशा राजपूत में बुधवार को मध्याह्न भोजन नहीं बन सका। यहां 186 बच्चे नामांकित हैं। तीन रसोइयों में केवल प्रेमा देवी ही मौजूद मिलीं। प्रधानाध्यापक रामसुख विक्रम प्रशिक्षण पर गए हैं। सहायक अध्यापक सूरज कुमार और वंदना दुबे ने बताया कि स्कूल में राशन नहीं बचा है। न सिलिंडर है और न ही लकड़ी की व्यवस्था हो पाई। कंपोजिट विद्यालय दक्खिन गांव में भी चूल्हे पर भोजन बनाया गया।
पांच दिन पहले खत्म हो गई गैस
राजाफत्तेपुर। पूर्व माध्यमिक विद्यालय फूला में भी चूल्हे पर भोजन तैयार किया गया।प्रधानाध्यापक पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि पांच दिन से सिलिंडर खत्म है और नया सिलिंडर नहीं मिल पा रहा।