{"_id":"696000c9885764e7f200584a","slug":"youth-should-learn-from-the-friendship-of-shri-krishna-and-sudama-amethi-news-c-96-1-ame1022-156133-2026-01-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amethi News: श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता से सीख लें युवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amethi News: श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता से सीख लें युवा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 09 Jan 2026 12:38 AM IST
विज्ञापन
जामों के हरगांव में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत-आयोजक
विज्ञापन
जामों। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की कथा एक पराकाष्ठा है। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा से निस्वार्थ भाव से मित्रता की, जो मिसाल बन गई। ये बातें हरगांव बाजार में श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को अयोध्या धाम से आए प्रवाचक आचार्य दिनकर महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता से युवकों को सीख लेनी चाहिए। सच्चे मित्र बहुत कम मिलते हैं, जो सुख-दुख में सदैव खड़े होकर मदद करते हैं। मनुष्य जीवन में एक बार आराध्य देव का भजन-कीर्तन हो जाए तो परिवार सुखमय जीवन व्यतीत कर विकास की ओर अग्रसर होता रहेगा।
प्रवाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के सुदामा बाल सखा थे। दोनों ने एक साथ संदीपन के आश्रम में पढ़ाई की। भगवान श्रीकृष्ण द्वारिकाधीश बन गए और सुदामा के गरीब होने से परिवार का भरण पोषण मुश्किल होता चला गया। सुदामा ने भगवान श्रीकृष्ण से मित्रता होने की बात अपनी पत्नी से बता दी। पत्नी की जिद पर सुदामा द्वारिकाधीश के महल पहुंच गए, जहां उनका भव्य स्वागत कर मालामाल करके घर वापस कर दिया।
मनुष्य को इससे शिक्षा लेनी की जरूरत है कि कभी भी अपने भगवान को नहीं भूलना चाहिए। सुदामा गरीब होते हुए भगवान श्रीकृष्ण का भजन-कीर्तन करते रहे, इसी का फल उन्हें मिला। इस अवसर पर मुख्य यजमान अमित कुमार श्रीवास्तव, उनकी पत्नी कुसुमलता श्रीवास्तव, मंदिर के पुजारी रेखादास, कालिका प्रसाद शुक्ल, आनंद सिंह, बबलू पांडेय, सौरभ पांडेय आदि मौजूद रहे।
Trending Videos
प्रवाचक ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता से युवकों को सीख लेनी चाहिए। सच्चे मित्र बहुत कम मिलते हैं, जो सुख-दुख में सदैव खड़े होकर मदद करते हैं। मनुष्य जीवन में एक बार आराध्य देव का भजन-कीर्तन हो जाए तो परिवार सुखमय जीवन व्यतीत कर विकास की ओर अग्रसर होता रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रवाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के सुदामा बाल सखा थे। दोनों ने एक साथ संदीपन के आश्रम में पढ़ाई की। भगवान श्रीकृष्ण द्वारिकाधीश बन गए और सुदामा के गरीब होने से परिवार का भरण पोषण मुश्किल होता चला गया। सुदामा ने भगवान श्रीकृष्ण से मित्रता होने की बात अपनी पत्नी से बता दी। पत्नी की जिद पर सुदामा द्वारिकाधीश के महल पहुंच गए, जहां उनका भव्य स्वागत कर मालामाल करके घर वापस कर दिया।
मनुष्य को इससे शिक्षा लेनी की जरूरत है कि कभी भी अपने भगवान को नहीं भूलना चाहिए। सुदामा गरीब होते हुए भगवान श्रीकृष्ण का भजन-कीर्तन करते रहे, इसी का फल उन्हें मिला। इस अवसर पर मुख्य यजमान अमित कुमार श्रीवास्तव, उनकी पत्नी कुसुमलता श्रीवास्तव, मंदिर के पुजारी रेखादास, कालिका प्रसाद शुक्ल, आनंद सिंह, बबलू पांडेय, सौरभ पांडेय आदि मौजूद रहे।