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Amroha News: जून में पशु काटने के 10,746 मामले, रैबीज से नहीं हुई कोई मौत
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अमरोहा। राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम (एनआरसीपी) की जून माह की रिपोर्ट के अनुसार जिले में पशु काटने के 10,746 मामले दर्ज किए गए। इनमें 3,829 मामले आवारा कुत्तों, 2,728 पालतू कुत्तों, 985 बंदरों और 2,415 अन्य जानवरों के काटने के हैं। राहत की बात यह रही कि रैबीज से किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई।
रिपोर्ट के अनुसार 789 मरीज श्रेणी-1, 3,834 श्रेणी-2 और 4,493 श्रेणी-3 के पाए गए, जिनका प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार किया गया। 6,912 मरीजों को इंट्राडर्मल (आईडी) पद्धति से एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई गई, जबकि 6,735 मरीजों ने पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीईपी) का पूरा कोर्स पूरा किया। श्रेणी-3 के दो मरीजों को एंटी रैबीज सीरम (एआरएस) भी दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार श्रेणी-3 के मामलों में त्वचा फटना, खून आना या श्लेष्मा झिल्ली का संपर्क होने पर तत्काल घाव की सफाई, एंटी रैबीज वैक्सीन और एंटी रैबीज सीरम देना आवश्यक होता है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि जून में रैबीज से किसी की मृत्यु या संदिग्ध रैबीज रोगी के भर्ती होने का कोई मामला सामने नहीं आया।
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रिपोर्ट के अनुसार 789 मरीज श्रेणी-1, 3,834 श्रेणी-2 और 4,493 श्रेणी-3 के पाए गए, जिनका प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार किया गया। 6,912 मरीजों को इंट्राडर्मल (आईडी) पद्धति से एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई गई, जबकि 6,735 मरीजों ने पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीईपी) का पूरा कोर्स पूरा किया। श्रेणी-3 के दो मरीजों को एंटी रैबीज सीरम (एआरएस) भी दिया गया।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार श्रेणी-3 के मामलों में त्वचा फटना, खून आना या श्लेष्मा झिल्ली का संपर्क होने पर तत्काल घाव की सफाई, एंटी रैबीज वैक्सीन और एंटी रैबीज सीरम देना आवश्यक होता है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि जून में रैबीज से किसी की मृत्यु या संदिग्ध रैबीज रोगी के भर्ती होने का कोई मामला सामने नहीं आया।
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