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Amroha News: 300 बीघा भूमि पर बननी है जिला जेल, शासन की मंजूरी का इंतजार
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमरोहा। जिला जेल के निर्माण की योजना फिलहाल शासन की मंजूरी का इंतजार कर रही है। करीब 300 बीघा भूमि पर प्रस्तावित जेल के लिए प्रशासन लगभग 169 किसानों की जमीन का अधिग्रहण करेगा।
भूमि अधिग्रहण के आकलन संबंधी करीब 25 करोड़ रुपये की रिपोर्ट दो माह पहले शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि कुछ किसानों ने अभी अपनी सहमति नहीं दी है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और जेल निर्माण शुरू होने से जिले में रोजगार, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सुविधाओं को भी मजबूती मिलेगी।
अमरोहा जनपद की घोषणा वर्ष 1997 में हुई। तब से अधिकांश कार्यालय बन गए लेकिन आज तक जेल का निर्माण कार्य नहीं हो सका। कलक्ट्रेट से लेकर पुलिस लाइन का भी निर्माण हो चुका है जबकि इस जमीन को लेकर मामला कोर्ट में भी चला लेकिन आज 29 साल बाद भी जेल का निर्माण नहीं हो पाया।
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यहां के कैदियों को पहले मुरादाबाद की जेल में रखा जाता था। जहां क्षमता से अधिक कैदी रहते है। अब बिजनौर की जेल में अमरोहा के कैदियों को भेजा जाता है। जेल के लिए कई बार जमीन की तलाश की गई लेकिन किसी ना किसी कारण से जमीन का अधिग्रहण नहीं हो सका। नौगावां तहसील में भी जमीन की तलाश की गई लेकिन जमीन नहीं मिल पाई।
पिछले साल प्रशासन ने रसूलपुर गुर्जर, चुबका और डिडौली में करीब 300 बीघा (21.72 हेक्टेयर) जमीन का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। हालांकि इसे लेकर कुछ किसान नाराजगी भी जता चुके है। जेल निर्माण में 169 किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।
इस जमीन की अनुमानित कीमत 25 करोड़ है। जेल निर्माण से आसपास में बाजार भी सजेगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। दुकानों का भी निर्माण कराया जाएगा। किसानों को जमीन का मुआवजा दिया जाएगा। इससे आसपास के ग्रामीणों को फायदा मिलेगा। अब दो दिन पहले यानि 9 अप्रैल को प्रशासन ने जमीन की आंकलन रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी है।
हरी झंडी मिलने के बाद जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा और उसके बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरु की जाएगी। अभी शासन स्तर से कोई मंजूरी नहीं मिली है।
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अमरोहा। जिला जेल के निर्माण की योजना फिलहाल शासन की मंजूरी का इंतजार कर रही है। करीब 300 बीघा भूमि पर प्रस्तावित जेल के लिए प्रशासन लगभग 169 किसानों की जमीन का अधिग्रहण करेगा।
भूमि अधिग्रहण के आकलन संबंधी करीब 25 करोड़ रुपये की रिपोर्ट दो माह पहले शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि कुछ किसानों ने अभी अपनी सहमति नहीं दी है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और जेल निर्माण शुरू होने से जिले में रोजगार, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सुविधाओं को भी मजबूती मिलेगी।
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अमरोहा जनपद की घोषणा वर्ष 1997 में हुई। तब से अधिकांश कार्यालय बन गए लेकिन आज तक जेल का निर्माण कार्य नहीं हो सका। कलक्ट्रेट से लेकर पुलिस लाइन का भी निर्माण हो चुका है जबकि इस जमीन को लेकर मामला कोर्ट में भी चला लेकिन आज 29 साल बाद भी जेल का निर्माण नहीं हो पाया।
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यहां के कैदियों को पहले मुरादाबाद की जेल में रखा जाता था। जहां क्षमता से अधिक कैदी रहते है। अब बिजनौर की जेल में अमरोहा के कैदियों को भेजा जाता है। जेल के लिए कई बार जमीन की तलाश की गई लेकिन किसी ना किसी कारण से जमीन का अधिग्रहण नहीं हो सका। नौगावां तहसील में भी जमीन की तलाश की गई लेकिन जमीन नहीं मिल पाई।
पिछले साल प्रशासन ने रसूलपुर गुर्जर, चुबका और डिडौली में करीब 300 बीघा (21.72 हेक्टेयर) जमीन का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। हालांकि इसे लेकर कुछ किसान नाराजगी भी जता चुके है। जेल निर्माण में 169 किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।
इस जमीन की अनुमानित कीमत 25 करोड़ है। जेल निर्माण से आसपास में बाजार भी सजेगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। दुकानों का भी निर्माण कराया जाएगा। किसानों को जमीन का मुआवजा दिया जाएगा। इससे आसपास के ग्रामीणों को फायदा मिलेगा। अब दो दिन पहले यानि 9 अप्रैल को प्रशासन ने जमीन की आंकलन रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी है।
हरी झंडी मिलने के बाद जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा और उसके बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरु की जाएगी। अभी शासन स्तर से कोई मंजूरी नहीं मिली है।