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Amroha News: चौबीस कोसीय परिक्रमा मार्ग के लिए यूनुस व यूसुफ ने कराया पहला बैनामा
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संभल। चौबीस कोसीय परिक्रमा मार्ग के निर्माण के लिए बुधवार की रात्रि 10:30 मिनट पर पहला बैनामा कराया गया। सलारपुर कलां गांव के निवासी यूनुस और यूसुफ दो सगे भाइयों ने यह बैनामा कराया है। दोनों भाइयों ने गांव रशीदपुर स्थित गाटा संख्या-82 में से 192 मीटर भूमि बेची है। इस भूमि के बदले जिला प्रशासन के द्वारा सर्किल रेट से चार गुना अधिक 3.76 लाख रुपये खाते में भेजेे जाएंगे।
संभल के रजिस्ट्रार अमित कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बुधवार की देररात पहला बैनामा हुआ। यूनुस और यूसुफ ने 192 मीटर (करीब पांच बीसा) भूमि का बैनामा लोक निर्माण विभाग की सहायक अभियंता दीक्षा सिंह के पक्ष में निष्पादित कराया है।
तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि परिक्रमा मार्ग के लिए रजिस्ट्री की तैयारियां पूरी हैं। अन्य किसानों से भी जल्द ही बैनामे कराए जाएंगे। ताकि परियोजना निर्धारित समय में पूरी हो सके। बैनामा प्रक्रिया के दौरान राजस्व विभाग की ओर से प्रभारी राजस्व निरीक्षक ओमकार गौड़, लेखपाल सुनील यादव, मुकेश यादव, जबकि पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से एई विवेक बसंल, अर्शी महताब, राजीव कुमार, संतोष कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
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38 गांवों में खरीदी जाएगी 33.84 हेक्टेयर भूमि
संभल। पौराणिक और ऐतिहासिक 68 तीर्थ व 19 कूपों की 24 कोसीय परिक्रमा मार्ग के लिए 38 गांवों के तीन हजार किसानों से 33.84 हेक्टेयर भूमि खरीदी जानी है। बुधवार की रात्रि में परिक्रमा मार्ग के लिए जमीन खरीदी गई। तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जमीन खरीदने का काम शुरु हो गया है। अब इसमें तेजी आएगी। जल्द ही जमीन को खरीदकर अधिग्रहण किया जाएगा, ताकि समय से परियोजना पूरी हो सकें। संवाद
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68 तीर्थ और 19 कूपों की परिक्रमा का है महत्व
ऐतिहासिक नगरी संभल के 68 तीर्थ और 19 कूपों की परिक्रमा महत्व ठीक वैसा ही है, जैसा गोवर्धन, वृंदावन और नर्मदा परिक्रमा का है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाव के साथ इन तीर्थ और कूपों की परिक्रमा करते हैं। यूं तो दीपावली के बाद कार्तिक शुल्क पक्ष की चतुर्थी और पंचमी को प्राचीन तीर्थ श्री वंश गोपाल कल्किधाम बेनीपुर चक पर दो दिवसीय परिक्रमा का आयोजन होता है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और पैदल ही परिक्रमा करते हैं। खास बात यह है कि अब प्रत्येक माह के पहले रविवार को एक दिवसीय परिक्रमा होती है। इसमें श्रद्धालु पैदल नहीं, बल्कि दो पहिया व चार पहिया वाहनों से करते हैं। इसी को लेकर 24 कोसीय परिक्रमा मार्ग के साैंदर्यीकरण व चौड़ीकरण पर जोर दिया जा रहा था। ताकि मार्ग के चौड़ीकरण व साैंदर्यीकरण के बाद श्रद्धालुओं को परिक्रमा करने में सहूलियत मिले और बिना किसी परेशानी के परिक्रमा को पूरा कर सकें। संवाद
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निर्धारित है परियोजना पूरी करने का समय
वैसे तो 300 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं 24-30 महीने में पूरी करनी है। लेकिन शासन ने चौबीस कोसीय परिक्रमा मार्ग के लिए 18 महीने का समय तय किया है। जिस तरह तेजी से काम चल रहा है, उससे उम्मीद है कि यह तय समय में तैयार भी हो जाएगा। एक्सईएन पीडब्ल्यूडी सुनील प्रकाश का कहना है कि इस मार्ग के बनने से गांवों की भी तस्वीर बदल जाएगी। क्योंकि आवाजाही करने में आसानी होगी। लाजिमी, इससे कई गांवों का संपर्क आसान हो सकेगा। संवाद
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संभल के रजिस्ट्रार अमित कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बुधवार की देररात पहला बैनामा हुआ। यूनुस और यूसुफ ने 192 मीटर (करीब पांच बीसा) भूमि का बैनामा लोक निर्माण विभाग की सहायक अभियंता दीक्षा सिंह के पक्ष में निष्पादित कराया है।
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तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि परिक्रमा मार्ग के लिए रजिस्ट्री की तैयारियां पूरी हैं। अन्य किसानों से भी जल्द ही बैनामे कराए जाएंगे। ताकि परियोजना निर्धारित समय में पूरी हो सके। बैनामा प्रक्रिया के दौरान राजस्व विभाग की ओर से प्रभारी राजस्व निरीक्षक ओमकार गौड़, लेखपाल सुनील यादव, मुकेश यादव, जबकि पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से एई विवेक बसंल, अर्शी महताब, राजीव कुमार, संतोष कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
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38 गांवों में खरीदी जाएगी 33.84 हेक्टेयर भूमि
संभल। पौराणिक और ऐतिहासिक 68 तीर्थ व 19 कूपों की 24 कोसीय परिक्रमा मार्ग के लिए 38 गांवों के तीन हजार किसानों से 33.84 हेक्टेयर भूमि खरीदी जानी है। बुधवार की रात्रि में परिक्रमा मार्ग के लिए जमीन खरीदी गई। तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जमीन खरीदने का काम शुरु हो गया है। अब इसमें तेजी आएगी। जल्द ही जमीन को खरीदकर अधिग्रहण किया जाएगा, ताकि समय से परियोजना पूरी हो सकें। संवाद
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68 तीर्थ और 19 कूपों की परिक्रमा का है महत्व
ऐतिहासिक नगरी संभल के 68 तीर्थ और 19 कूपों की परिक्रमा महत्व ठीक वैसा ही है, जैसा गोवर्धन, वृंदावन और नर्मदा परिक्रमा का है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाव के साथ इन तीर्थ और कूपों की परिक्रमा करते हैं। यूं तो दीपावली के बाद कार्तिक शुल्क पक्ष की चतुर्थी और पंचमी को प्राचीन तीर्थ श्री वंश गोपाल कल्किधाम बेनीपुर चक पर दो दिवसीय परिक्रमा का आयोजन होता है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और पैदल ही परिक्रमा करते हैं। खास बात यह है कि अब प्रत्येक माह के पहले रविवार को एक दिवसीय परिक्रमा होती है। इसमें श्रद्धालु पैदल नहीं, बल्कि दो पहिया व चार पहिया वाहनों से करते हैं। इसी को लेकर 24 कोसीय परिक्रमा मार्ग के साैंदर्यीकरण व चौड़ीकरण पर जोर दिया जा रहा था। ताकि मार्ग के चौड़ीकरण व साैंदर्यीकरण के बाद श्रद्धालुओं को परिक्रमा करने में सहूलियत मिले और बिना किसी परेशानी के परिक्रमा को पूरा कर सकें। संवाद
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निर्धारित है परियोजना पूरी करने का समय
वैसे तो 300 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं 24-30 महीने में पूरी करनी है। लेकिन शासन ने चौबीस कोसीय परिक्रमा मार्ग के लिए 18 महीने का समय तय किया है। जिस तरह तेजी से काम चल रहा है, उससे उम्मीद है कि यह तय समय में तैयार भी हो जाएगा। एक्सईएन पीडब्ल्यूडी सुनील प्रकाश का कहना है कि इस मार्ग के बनने से गांवों की भी तस्वीर बदल जाएगी। क्योंकि आवाजाही करने में आसानी होगी। लाजिमी, इससे कई गांवों का संपर्क आसान हो सकेगा। संवाद