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Amroha News: पढ़ाई संग हुनर पर जोर, विद्यालयों में क्विज-प्रोजेक्ट और ओडीओपी गतिविधियां अनिवार्य
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अमरोहा। माध्यमिक विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र से शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है। अब छात्रों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखकर उन्हें व्यावहारिक ज्ञान, रचनात्मकता और स्थानीय हुनर से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए शैक्षणिक कैलेंडर में कई महत्वपूर्ण गतिविधियों को अनिवार्य किया गया है, जिससे विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
नए कैलेंडर के तहत विद्यालयों में अब नियमित रूप से क्विज प्रतियोगिताएं, रचनात्मक प्रोजेक्ट और ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना से जुड़ी गतिविधियां कराई जाएंगी। खासतौर पर कक्षा 9 और 11 के छात्रों के लिए सत्र की शुरुआत से ही प्रोजेक्ट कार्य अनिवार्य कर दिया गया है। छात्र भाषा, गणित, विज्ञान और कला जैसे विषयों पर प्रोजेक्ट तैयार करेंगे, जिससे उनकी विश्लेषण क्षमता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिलेगा।
ओडीओपी योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को जिले के पारंपरिक उत्पादों और स्थानीय उद्योगों से जोड़ने के लिए शिल्प मेलों और प्रदर्शनियों का भ्रमण भी कराया जाएगा। इससे उन्हें न केवल सांस्कृतिक विरासत की जानकारी मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार के अवसरों को समझने में भी मदद मिलेगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से छात्रों में रटने की प्रवृत्ति कम होगी और वे व्यावहारिक ज्ञान के साथ अधिक आत्मनिर्भर और सक्षम बन सकेंगे।
डीआईओएस डॉ. प्रवेश कुमार ने बताया कि नए शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार सभी विद्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं और इन गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू कराया जाएगा।
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नए कैलेंडर के तहत विद्यालयों में अब नियमित रूप से क्विज प्रतियोगिताएं, रचनात्मक प्रोजेक्ट और ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना से जुड़ी गतिविधियां कराई जाएंगी। खासतौर पर कक्षा 9 और 11 के छात्रों के लिए सत्र की शुरुआत से ही प्रोजेक्ट कार्य अनिवार्य कर दिया गया है। छात्र भाषा, गणित, विज्ञान और कला जैसे विषयों पर प्रोजेक्ट तैयार करेंगे, जिससे उनकी विश्लेषण क्षमता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिलेगा।
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ओडीओपी योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को जिले के पारंपरिक उत्पादों और स्थानीय उद्योगों से जोड़ने के लिए शिल्प मेलों और प्रदर्शनियों का भ्रमण भी कराया जाएगा। इससे उन्हें न केवल सांस्कृतिक विरासत की जानकारी मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार के अवसरों को समझने में भी मदद मिलेगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से छात्रों में रटने की प्रवृत्ति कम होगी और वे व्यावहारिक ज्ञान के साथ अधिक आत्मनिर्भर और सक्षम बन सकेंगे।
डीआईओएस डॉ. प्रवेश कुमार ने बताया कि नए शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार सभी विद्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं और इन गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू कराया जाएगा।