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Amroha News: ओडीओपी बना वरदान, अमरोहा के उत्पादों को अमेरिका-यूरोप तक मिली पहचान
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अमरोहा। अमरोहा में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नई इबारत लिख रही है। पिछले पांच वर्षों में ढोलक, रेडीमेड गारमेंट्स और मेटल-वुडन हैंडीक्राफ्ट उद्योगों ने उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है। योजना से जुड़े कारीगरों और उद्यमियों को न केवल आर्थिक मजबूती मिली है, बल्कि जिले में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 2147 इकाइयों को योजना का सीधा लाभ मिल चुका है। इसके चलते 4122 लोगों को प्रत्यक्ष और 10 हजार से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। इससे युवाओं का पलायन रुका है और बड़ी संख्या में महिलाओं को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।
अमरोहा के हैंडीक्राफ्ट और ढोलक उद्योग की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच चुकी है। स्टोनमैन क्राफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और राम म्यूजिकल जैसी कंपनियों का सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से बढ़कर 60 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि इन कंपनियों के उत्पादों का लगभग 95 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को किया जा रहा है, जबकि शेष 5 प्रतिशत यूरोप के देशों में भेजा जाता है।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए कंपनियों ने अपने उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन में भी सुधार किया है। इसके लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी के डिजाइनर्स की सेवाएं ली जा रही हैं, जिससे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का आकर्षक रूप दिया जा सके।
स्थानीय उद्योगों में रोजगार के अवसर बढ़ने से कारीगरों का जीवन स्तर सुधरा है। फैक्ट्रियों में काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी जिले के ही हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। न्यूनतम वेतन में वृद्धि और नियमित इंक्रीमेंट से श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा भी मिली है।
हालांकि, बढ़ते उत्पादन और निर्यात के बीच उद्यमियों को अब बुनियादी सुविधाओं की कमी खल रही है। उनका कहना है कि उद्योग अभी भी तंग गलियों और छोटे स्थानों से संचालित हो रहे हैं, जिससे लॉजिस्टिक समस्याएं सामने आती हैं। उद्यमियों ने सरकार से सर्वसुविधायुक्त इंडस्ट्रियल एरिया, आसान बैंक ऋण प्रक्रिया और विदेशों में वेयरहाउस की व्यवस्था की मांग की है।
प्रशासन भी इन चुनौतियों को लेकर गंभीर है। आने वाले समय में जिले में कॉमन फैसिलिटेशन सेंटर और प्लेज पार्क के निर्माण की योजना पर कार्य चल रहा है।
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व्यापार में 10 से 15 प्रतिशत का सीधा उछाल
जीआई टैग और ओडीओपी के बेहतरीन तालमेल ने अमरोहा के पुश्तैनी वाद्य यंत्र और गारमेंट उद्योग को नई ऊंचाइयां दी हैं। प्रबंधक राजीव कुमार के अनुसार चौथी पीढ़ी द्वारा संचालित राम म्यूजिकल हैंडीक्राफ्ट और उनकी अन्य दो कंपनियों का सालाना टर्नओवर 8 से 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स साइट्स पर ये कंपनियां अपनी श्रेणी में भारत की टॉप सेलर बनकर उभरी हैं। ढोलक, तबला, पखावज, डमरू और इकतारा जैसे स्वदेशी वाद्य यंत्र अमेरिका, कनाडा, खाड़ी देशों, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर सहित कई देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। ढोलक को जीआई टैग मिलने के बाद से इस व्यापार में 10 से 15 प्रतिशत का सीधा उछाल आया है। पूरे भारत में ढोलक का ढांचा (शैल) केवल अमरोहा में ही बनता है और यहीं से पूरे देश में सप्लाई होता है।
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पलायन पर लगी रोक, महिलाओं के हाथ में आई कमान
करीब 30 वर्षों से मुरादाबाद में हैंडीक्राफ्ट का कार्य कर रहे शमीष जैन ने ओडीओपी योजना से जुड़कर इस यूनिट की शुरुआत की है। नई यूनिट में 25 फैब्रिक मशीनें और 500 सिलाई मशीनें लगाई गई हैं, जहां टी-शर्ट, जॉगर्स, विंटर वियर और इनर वियर का उत्पादन किया जा रहा है। योजना के तहत मिली सहायता से वर्किंग कैपिटल की समस्या दूर हुई है, जिससे कारोबार में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पहले जहां कंपनी में 100 से 200 कर्मचारी कार्यरत थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 400 हो गई है। इस यूनिट की खास बात यह है कि इसमें 30 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं। कंपनी प्रबंधन का लक्ष्य भविष्य में इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक ले जाने का है, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
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इंडस्ट्रियल एरिया बनाया जाए। इसकी बहुत से समय से मांग की जा रही है। इसके बनने से ढोलक का रोजगार कई गुना बढ़ जाएगा। इस समय दस हजार से अधिक लोग सीधे तौर पर और करीब दस हजार ही लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े है। जिनको रोजगार मिल रहा है। ऋण की कागजी कार्रवाई को सरल बनाया जाए। जिससे आसानी से सस्ता ऋण मिल सके। इससे कारोबारियों को काफी फायदा मिलेगा।
-राजीव कुमार, अध्यक्ष ढोलक हस्तकला एसोसिएशन
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जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 2147 इकाइयों को योजना का सीधा लाभ मिल चुका है। इसके चलते 4122 लोगों को प्रत्यक्ष और 10 हजार से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। इससे युवाओं का पलायन रुका है और बड़ी संख्या में महिलाओं को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।
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अमरोहा के हैंडीक्राफ्ट और ढोलक उद्योग की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच चुकी है। स्टोनमैन क्राफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और राम म्यूजिकल जैसी कंपनियों का सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से बढ़कर 60 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि इन कंपनियों के उत्पादों का लगभग 95 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को किया जा रहा है, जबकि शेष 5 प्रतिशत यूरोप के देशों में भेजा जाता है।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए कंपनियों ने अपने उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन में भी सुधार किया है। इसके लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी के डिजाइनर्स की सेवाएं ली जा रही हैं, जिससे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का आकर्षक रूप दिया जा सके।
स्थानीय उद्योगों में रोजगार के अवसर बढ़ने से कारीगरों का जीवन स्तर सुधरा है। फैक्ट्रियों में काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी जिले के ही हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। न्यूनतम वेतन में वृद्धि और नियमित इंक्रीमेंट से श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा भी मिली है।
हालांकि, बढ़ते उत्पादन और निर्यात के बीच उद्यमियों को अब बुनियादी सुविधाओं की कमी खल रही है। उनका कहना है कि उद्योग अभी भी तंग गलियों और छोटे स्थानों से संचालित हो रहे हैं, जिससे लॉजिस्टिक समस्याएं सामने आती हैं। उद्यमियों ने सरकार से सर्वसुविधायुक्त इंडस्ट्रियल एरिया, आसान बैंक ऋण प्रक्रिया और विदेशों में वेयरहाउस की व्यवस्था की मांग की है।
प्रशासन भी इन चुनौतियों को लेकर गंभीर है। आने वाले समय में जिले में कॉमन फैसिलिटेशन सेंटर और प्लेज पार्क के निर्माण की योजना पर कार्य चल रहा है।
व्यापार में 10 से 15 प्रतिशत का सीधा उछाल
जीआई टैग और ओडीओपी के बेहतरीन तालमेल ने अमरोहा के पुश्तैनी वाद्य यंत्र और गारमेंट उद्योग को नई ऊंचाइयां दी हैं। प्रबंधक राजीव कुमार के अनुसार चौथी पीढ़ी द्वारा संचालित राम म्यूजिकल हैंडीक्राफ्ट और उनकी अन्य दो कंपनियों का सालाना टर्नओवर 8 से 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स साइट्स पर ये कंपनियां अपनी श्रेणी में भारत की टॉप सेलर बनकर उभरी हैं। ढोलक, तबला, पखावज, डमरू और इकतारा जैसे स्वदेशी वाद्य यंत्र अमेरिका, कनाडा, खाड़ी देशों, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर सहित कई देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। ढोलक को जीआई टैग मिलने के बाद से इस व्यापार में 10 से 15 प्रतिशत का सीधा उछाल आया है। पूरे भारत में ढोलक का ढांचा (शैल) केवल अमरोहा में ही बनता है और यहीं से पूरे देश में सप्लाई होता है।
पलायन पर लगी रोक, महिलाओं के हाथ में आई कमान
करीब 30 वर्षों से मुरादाबाद में हैंडीक्राफ्ट का कार्य कर रहे शमीष जैन ने ओडीओपी योजना से जुड़कर इस यूनिट की शुरुआत की है। नई यूनिट में 25 फैब्रिक मशीनें और 500 सिलाई मशीनें लगाई गई हैं, जहां टी-शर्ट, जॉगर्स, विंटर वियर और इनर वियर का उत्पादन किया जा रहा है। योजना के तहत मिली सहायता से वर्किंग कैपिटल की समस्या दूर हुई है, जिससे कारोबार में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पहले जहां कंपनी में 100 से 200 कर्मचारी कार्यरत थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 400 हो गई है। इस यूनिट की खास बात यह है कि इसमें 30 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं। कंपनी प्रबंधन का लक्ष्य भविष्य में इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक ले जाने का है, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
इंडस्ट्रियल एरिया बनाया जाए। इसकी बहुत से समय से मांग की जा रही है। इसके बनने से ढोलक का रोजगार कई गुना बढ़ जाएगा। इस समय दस हजार से अधिक लोग सीधे तौर पर और करीब दस हजार ही लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े है। जिनको रोजगार मिल रहा है। ऋण की कागजी कार्रवाई को सरल बनाया जाए। जिससे आसानी से सस्ता ऋण मिल सके। इससे कारोबारियों को काफी फायदा मिलेगा।
-राजीव कुमार, अध्यक्ष ढोलक हस्तकला एसोसिएशन