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Amroha News: दहेज हत्या में पति को आठ साल की सजा
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अमरोहा। दहेज हत्या के मामले में अदालत ने दोषी पति मोहन को आठ वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 8 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। फैसले के बाद न्यायालय के आदेश पर उसे हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।
मामला नौगावां सादात थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां के निवासी कलुवा सिंह की बेटी रिंकी की शादी वर्ष 2018 में बीबड़ा कलां गांव निवासी मोहन के साथ हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही मोहन दहेज की मांग को लेकर रिंकी को प्रताड़ित करता था। रिंकी के दो छोटे बच्चे भी हैं।
23 मई 2023 की रात दहेज को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर रिंकी ने फंदे पर लटककर आत्महत्या कर ली। 24 मई को घटना की सूचना मिलने पर मायके पक्ष के लोग मौके पर पहुंचे और दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी।
पुलिस ने रिंकी के पिता कलवा की शिकायत पर आरोपी मोहन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में वह जमानत पर रिहा हो गया था।
इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो एक्ट तृतीय की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रविंदर गर्ग प्रभावी पैरवी कर रहे थे।।
शनिवार को अदालत ने अंतिम सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल पर मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज बयानों को महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए आरोपी मोहन को दोषी करार दिया। मृतका के माता-पिता और भाई की गवाही इस मामले में निर्णायक साबित हुई, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट किया। इन मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोषी मोहन आठ साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए 8 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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मामला नौगावां सादात थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां के निवासी कलुवा सिंह की बेटी रिंकी की शादी वर्ष 2018 में बीबड़ा कलां गांव निवासी मोहन के साथ हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही मोहन दहेज की मांग को लेकर रिंकी को प्रताड़ित करता था। रिंकी के दो छोटे बच्चे भी हैं।
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23 मई 2023 की रात दहेज को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर रिंकी ने फंदे पर लटककर आत्महत्या कर ली। 24 मई को घटना की सूचना मिलने पर मायके पक्ष के लोग मौके पर पहुंचे और दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी।
पुलिस ने रिंकी के पिता कलवा की शिकायत पर आरोपी मोहन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में वह जमानत पर रिहा हो गया था।
इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो एक्ट तृतीय की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रविंदर गर्ग प्रभावी पैरवी कर रहे थे।।
शनिवार को अदालत ने अंतिम सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल पर मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज बयानों को महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए आरोपी मोहन को दोषी करार दिया। मृतका के माता-पिता और भाई की गवाही इस मामले में निर्णायक साबित हुई, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट किया। इन मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोषी मोहन आठ साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए 8 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।