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Amroha News: डिजिटल रजिस्ट्री के विरोध में वकीलों का उग्र प्रदर्शन, रजिस्ट्री कार्यालयों में तालाबंदी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 16 Jun 2026 01:45 AM IST
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अमरोहा। जिले में डिजिटल रजिस्ट्री योजना के विरोध ने सोमवार को व्यापक रूप ले लिया। अमरोहा सदर, नौगावां सादात, मंडी धनौरा और हसनपुर तहसीलों में अधिवक्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार किया। वकीलों ने रजिस्ट्री कार्यालयों में तालाबंदी कर दी और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पूरे दिन तहसील परिसर में कामकाज ठप रहा, जिससे वादकारियों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। दिनभर धरना पर रहे अधिवक्ताओं ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
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सदर और नौगावां सादात में रजिस्ट्री कार्यालय में जड़ा ताला, धरने पर बैठे अधिवक्ता
अमरोहा सदर और नौगावां सादात तहसील में वकीलों ने सुबह 10 बजे ही रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचकर तालाबंदी कर दी। इसके बाद किसी भी कर्मचारी को कार्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया गया। अधिवक्ताओं ने एसडीएम और तहसीलदार न्यायालयों का भी बहिष्कार करते हुए परिसर में धरना शुरू कर दिया। अमरोहा तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शकील अहमद और सचिव संजीव कुमार के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में वकीलों ने डिजिटल रजिस्ट्री योजना को जनविरोधी बताया।
उनका कहना था कि इस व्यवस्था से दस्तावेज लेखक, स्टांप वेंडर और अधिवक्ताओं की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। विरोध प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने एसडीएम सदर विभा श्रीवास्तव को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा। इसमें डिजिटल रजिस्ट्री योजना को तत्काल वापस लेने, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने और रजिस्ट्री कार्यालय को नवीन तहसील भवन में स्थापित करने की मांग की गई। अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रस्तावित ई-रजिस्ट्रेशन प्रणाली के तहत आधार ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और ई-सिग्नेचर के माध्यम से पहचान की जाएगी, जिससे पारंपरिक प्रक्रिया खत्म हो जाएगी और बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
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मंडी धनौरा में उपनिबंधक कार्यालय की तालाबंदी
मंडी धनौरा तहसील में भी अधिवक्ताओं का आक्रोश देखने को मिला। यहां वकीलों ने उपनिबंधक कार्यालय में तालाबंदी करते हुए पूरे दिन कार्य बंद रखा। बार एसोसिएशन अध्यक्ष संदीप गुप्ता ने कहा कि डिजिटल रजिस्ट्री व्यवस्था अव्यवहारिक है और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधा कमजोर होने के कारण आम जनता को भारी दिक्कतें होंगी। वकीलों ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार इस निर्णय को वापस नहीं लेती, तब तक रजिस्ट्री कार्यालय का बहिष्कार जारी रहेगा। हड़ताल के कारण सरकारी राजस्व को प्रतिदिन लाखों रुपये के स्टांप शुल्क की हानि होने की बात भी सामने आई।
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हसनपुर में पांचवें दिन भी कार्य बहिष्कार जारी
हसनपुर तहसील में अधिवक्ताओं का विरोध लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा। सब रजिस्ट्री कार्यालय में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। न तो कोई रजिस्ट्री हो सकी और न ही कोई औपचारिक प्रक्रिया पूरी हो पाई। तहसील बार एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ताओं ने कार्यालय परिसर में धरना देते हुए सरकार से योजना को जनहित में तत्काल वापस लेने की मांग दोहराई। लगातार हड़ताल के चलते तहसील परिसर में स्टांप बिक्री और टाइपिंग कार्य भी पूरी तरह ठप रहा, जिससे दूर-दराज से आए लोगों को निराश लौटना पड़ा।
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आम जनता को भारी परेशानी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
लगातार चल रहे इस आंदोलन के कारण न्यायिक और राजस्व कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। वकीलों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखक संगठनों का मानना है कि डिजिटल रजिस्ट्री व्यवस्था से जहां पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया जा रहा है, वहीं इससे फर्जीवाड़े की आशंका और बेरोजगारी बढ़ने का खतरा है।
सदर और नौगावां सादात में रजिस्ट्री कार्यालय में जड़ा ताला, धरने पर बैठे अधिवक्ता
अमरोहा सदर और नौगावां सादात तहसील में वकीलों ने सुबह 10 बजे ही रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचकर तालाबंदी कर दी। इसके बाद किसी भी कर्मचारी को कार्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया गया। अधिवक्ताओं ने एसडीएम और तहसीलदार न्यायालयों का भी बहिष्कार करते हुए परिसर में धरना शुरू कर दिया। अमरोहा तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शकील अहमद और सचिव संजीव कुमार के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में वकीलों ने डिजिटल रजिस्ट्री योजना को जनविरोधी बताया।
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उनका कहना था कि इस व्यवस्था से दस्तावेज लेखक, स्टांप वेंडर और अधिवक्ताओं की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। विरोध प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने एसडीएम सदर विभा श्रीवास्तव को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा। इसमें डिजिटल रजिस्ट्री योजना को तत्काल वापस लेने, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने और रजिस्ट्री कार्यालय को नवीन तहसील भवन में स्थापित करने की मांग की गई। अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रस्तावित ई-रजिस्ट्रेशन प्रणाली के तहत आधार ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और ई-सिग्नेचर के माध्यम से पहचान की जाएगी, जिससे पारंपरिक प्रक्रिया खत्म हो जाएगी और बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
मंडी धनौरा में उपनिबंधक कार्यालय की तालाबंदी
मंडी धनौरा तहसील में भी अधिवक्ताओं का आक्रोश देखने को मिला। यहां वकीलों ने उपनिबंधक कार्यालय में तालाबंदी करते हुए पूरे दिन कार्य बंद रखा। बार एसोसिएशन अध्यक्ष संदीप गुप्ता ने कहा कि डिजिटल रजिस्ट्री व्यवस्था अव्यवहारिक है और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधा कमजोर होने के कारण आम जनता को भारी दिक्कतें होंगी। वकीलों ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार इस निर्णय को वापस नहीं लेती, तब तक रजिस्ट्री कार्यालय का बहिष्कार जारी रहेगा। हड़ताल के कारण सरकारी राजस्व को प्रतिदिन लाखों रुपये के स्टांप शुल्क की हानि होने की बात भी सामने आई।
हसनपुर में पांचवें दिन भी कार्य बहिष्कार जारी
हसनपुर तहसील में अधिवक्ताओं का विरोध लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा। सब रजिस्ट्री कार्यालय में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। न तो कोई रजिस्ट्री हो सकी और न ही कोई औपचारिक प्रक्रिया पूरी हो पाई। तहसील बार एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ताओं ने कार्यालय परिसर में धरना देते हुए सरकार से योजना को जनहित में तत्काल वापस लेने की मांग दोहराई। लगातार हड़ताल के चलते तहसील परिसर में स्टांप बिक्री और टाइपिंग कार्य भी पूरी तरह ठप रहा, जिससे दूर-दराज से आए लोगों को निराश लौटना पड़ा।
आम जनता को भारी परेशानी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
लगातार चल रहे इस आंदोलन के कारण न्यायिक और राजस्व कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। वकीलों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखक संगठनों का मानना है कि डिजिटल रजिस्ट्री व्यवस्था से जहां पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया जा रहा है, वहीं इससे फर्जीवाड़े की आशंका और बेरोजगारी बढ़ने का खतरा है।