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Amroha News: राष्ट्रीय लोक अदालत में निपटे 1.04 लाख वाद, जुर्माना भी वसूला
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sun, 15 Mar 2026 02:05 AM IST
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अमरोहा। जनपद न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों का बड़े स्तर पर निस्तारण किया गया। लोक अदालत में कुल 1,19,315 वाद लगाए गए थे, जिनमें से 1,04,758 वादों का निस्तारण आपसी सहमति और समझौते के आधार पर किया गया। साथ ही 3.71 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।
जिला जज विवेक ने कहा कि लोक अदालत भारतीय न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसके माध्यम से वादकारियों को सरल, सुलभ और त्वरित न्याय मिलता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में आपसी सहमति के आधार पर विवादों का निस्तारण किया जाता है, जिससे न केवल अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ कम होता है, बल्कि पक्षकारों के समय और धन दोनों की बचत भी होती है और आपसी सौहार्द बना रहता है।
संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अमरोहा के सचिव एवं न्यायाधीश अभिषेक कुमार व्यास ने किया। उन्होंने बताया कि इस लोक अदालत में जिला न्यायालय स्तर पर कुल 6,620 वादों का निस्तारण किया गया। इनमें 5,731 फौजदारी मामलों का निपटारा करते हुए 3,71,270 रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गए। इसके अलावा विद्युत अधिनियम से जुड़े 700 मामलों का निस्तारण किया गया। कुटुंब न्यायालय की ओर से गठित कमेटी ने पारिवारिक विवादों के 53 मामलों का समाधान कराया, जिसमें 40.66 लाख रुपये प्रतिकर के रूप में दिलाए गए। इस दौरान दो दंपती आपसी मतभेद भुलाकर फिर से साथ रहने के लिए राजी हो गए।
सिविल मामलों के 44 वादों का भी निस्तारण किया गया। वहीं बैंकों की ऋण वसूली, दूरसंचार कंपनियों के वाद, एआरटीओ और पुलिस चालान से जुड़े मामलों में कुल 1,38,70,793 रुपये की वसूली की गई। इसके अलावा सभी तहसीलों और राजस्व न्यायालयों में भी लोक अदालत आयोजित की गई, जहां कुल 2,094 मामलों का निस्तारण किया गया। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं की भी सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में शाकिर हुसैन, शैल्जा राठी, हेमलता त्यागी, अरविंद शुक्ला, नसीमा खानम, ईश्वर सिंह, संजय चौधरी, नाजमीन बानो, ज्योति चौधरी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. लकी, चेतना सिंह, अवधेश कुमार तृतीय, गीतिका गर्ग, मोनिका, सुप्रिया शर्मा, अर्पिता सिंह आदि मौजूद रहे। न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है, ताकि छोटे-छोटे विवाद आपसी समझौते से निपट सकें और अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम हो सके।
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जिला जज विवेक ने कहा कि लोक अदालत भारतीय न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसके माध्यम से वादकारियों को सरल, सुलभ और त्वरित न्याय मिलता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में आपसी सहमति के आधार पर विवादों का निस्तारण किया जाता है, जिससे न केवल अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ कम होता है, बल्कि पक्षकारों के समय और धन दोनों की बचत भी होती है और आपसी सौहार्द बना रहता है।
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संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अमरोहा के सचिव एवं न्यायाधीश अभिषेक कुमार व्यास ने किया। उन्होंने बताया कि इस लोक अदालत में जिला न्यायालय स्तर पर कुल 6,620 वादों का निस्तारण किया गया। इनमें 5,731 फौजदारी मामलों का निपटारा करते हुए 3,71,270 रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गए। इसके अलावा विद्युत अधिनियम से जुड़े 700 मामलों का निस्तारण किया गया। कुटुंब न्यायालय की ओर से गठित कमेटी ने पारिवारिक विवादों के 53 मामलों का समाधान कराया, जिसमें 40.66 लाख रुपये प्रतिकर के रूप में दिलाए गए। इस दौरान दो दंपती आपसी मतभेद भुलाकर फिर से साथ रहने के लिए राजी हो गए।
सिविल मामलों के 44 वादों का भी निस्तारण किया गया। वहीं बैंकों की ऋण वसूली, दूरसंचार कंपनियों के वाद, एआरटीओ और पुलिस चालान से जुड़े मामलों में कुल 1,38,70,793 रुपये की वसूली की गई। इसके अलावा सभी तहसीलों और राजस्व न्यायालयों में भी लोक अदालत आयोजित की गई, जहां कुल 2,094 मामलों का निस्तारण किया गया। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं की भी सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में शाकिर हुसैन, शैल्जा राठी, हेमलता त्यागी, अरविंद शुक्ला, नसीमा खानम, ईश्वर सिंह, संजय चौधरी, नाजमीन बानो, ज्योति चौधरी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. लकी, चेतना सिंह, अवधेश कुमार तृतीय, गीतिका गर्ग, मोनिका, सुप्रिया शर्मा, अर्पिता सिंह आदि मौजूद रहे। न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है, ताकि छोटे-छोटे विवाद आपसी समझौते से निपट सकें और अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम हो सके।