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Amroha News: युद्ध का असर, कॉटन वेस्ट और टाइल्स कारोबार प्रभावित
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अमरोहा। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब स्थानीय कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। खासतौर पर कॉटन वेस्ट और टाइल्स से जुड़े व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कच्चे माल की कीमतों में तेजी, गैस आपूर्ति में कमी और सप्लाई प्रभावित होने से कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
कॉटन वेस्ट रिजवान पाशा व संदीप अग्रवाल के मुताबिक अमरोहा से बड़ी मात्रा में रॉ मैटेरियल तमिलनाडु, पानीपत, पंजाब, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भेजा जाता है। यहां से मिलने वाले कच्चे माल से पहले रुई और फिर धागा तैयार किया जाता है, जिसका इस्तेमाल होजरी, कच्छा और अन्य गारमेंट्स बनाने में होता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण फाइबर और धागा उद्योग भी प्रभावित हो रहा है। सामान्य दिनों में यहां से रोजाना करीब 200 टन रॉ मटेरियल भेजा जाता था, लेकिन मौजूदा हालात में आपूर्ति और निर्यात प्रभावित हो गया है। इससे स्थानीय व्यापारियों को रोजाना करीब 20 लाख रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
दूसरी ओर एलपीजी गैस की किल्लत का असर टाइल्स उद्योग पर भी साफ दिखाई दे रहा है। गुजरात स्थित कई टाइल्स फैक्ट्रियों में गैस की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है और कुछ इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। इसके चलते बाजार में टाइल्स की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
टाइल्स कारोबारी हरीश सिंह और कुलदीप सिंह ने बताया कि पहले जहां टाइल्स का माल कुछ ही दिनों में मिल जाता था, वहीं अब कंपनियां करीब 40 दिन की वेटिंग के बाद सप्लाई कर रही हैं। जिले में करीब 15 टाइल्स की दुकानें संचालित हैं, जबकि पूरे जनपद में 100 से अधिक व्यापारी इस कारोबार से जुड़े हैं।
पहले 450 रुपये में मिलने वाली टाइल्स की पेटी अब करीब 550 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि 160 रुपये की पेटी का दाम बढ़कर लगभग 230 रुपये हो गया है। कीमतों में आई इस तेजी से मकान बनवा रहे लोगों और ठेकेदारों की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
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कॉटन वेस्ट रिजवान पाशा व संदीप अग्रवाल के मुताबिक अमरोहा से बड़ी मात्रा में रॉ मैटेरियल तमिलनाडु, पानीपत, पंजाब, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भेजा जाता है। यहां से मिलने वाले कच्चे माल से पहले रुई और फिर धागा तैयार किया जाता है, जिसका इस्तेमाल होजरी, कच्छा और अन्य गारमेंट्स बनाने में होता है।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण फाइबर और धागा उद्योग भी प्रभावित हो रहा है। सामान्य दिनों में यहां से रोजाना करीब 200 टन रॉ मटेरियल भेजा जाता था, लेकिन मौजूदा हालात में आपूर्ति और निर्यात प्रभावित हो गया है। इससे स्थानीय व्यापारियों को रोजाना करीब 20 लाख रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
दूसरी ओर एलपीजी गैस की किल्लत का असर टाइल्स उद्योग पर भी साफ दिखाई दे रहा है। गुजरात स्थित कई टाइल्स फैक्ट्रियों में गैस की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है और कुछ इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। इसके चलते बाजार में टाइल्स की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
टाइल्स कारोबारी हरीश सिंह और कुलदीप सिंह ने बताया कि पहले जहां टाइल्स का माल कुछ ही दिनों में मिल जाता था, वहीं अब कंपनियां करीब 40 दिन की वेटिंग के बाद सप्लाई कर रही हैं। जिले में करीब 15 टाइल्स की दुकानें संचालित हैं, जबकि पूरे जनपद में 100 से अधिक व्यापारी इस कारोबार से जुड़े हैं।
पहले 450 रुपये में मिलने वाली टाइल्स की पेटी अब करीब 550 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि 160 रुपये की पेटी का दाम बढ़कर लगभग 230 रुपये हो गया है। कीमतों में आई इस तेजी से मकान बनवा रहे लोगों और ठेकेदारों की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं।