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Amroha News: टीईटी मामले में नीतिगत संरक्षण देने की मांग, शिक्षकों का प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 19 Jun 2026 01:46 AM IST
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अमरोहा। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (प्राथमिक संवर्ग) से जुड़े शिक्षकों ने बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डिप्टी कलक्टर को सौंपा।
शिक्षकों ने वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों एवं उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को विधायी एवं नीतिगत संरक्षण प्रदान किए जाने की मांग की है।
संगठन के जिलाध्यक्ष देवराज सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में लाखों शिक्षकों के बीच सेवा शर्तों और भविष्य को लेकर चिंता एवं असुरक्षा की भावना व्याप्त है।
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जिसमें 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई द्वारा जारी टीईटी संबंधी अधिसूचना, आरटीई अधिनियम में हुए संशोधन तथा हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का उल्लेख करते हुए स्थिति को गंभीर बताया गया है।
कहा है कि पूर्व में नियुक्त शिक्षक तत्कालीन नियमों और योग्यता के आधार पर चयनित हुए थे और वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं। ऐसे में बाद में लागू मानकों को पूर्व प्रभाव से लागू करना न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के विपरीत होगा।
जिला महामंत्री विकास कुमार बग्गा ने कहा कि दशकों से कार्यरत शिक्षकों का अनुभव और योगदान शिक्षा प्रणाली की रीढ़ है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। यदि इस वर्ग पर नए नियमों का कठोर प्रभाव लागू होता है तो इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल प्रभावित होगा बल्कि शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए राज्य सरकार इस विषय पर केंद्र सरकार से प्रभावी पैरवी करे और आवश्यक विधायी या नीतिगत समाधान सुनिश्चित कराए।
साथ ही शिक्षकों के सेवा अधिकार, पदोन्नति और अन्य लाभों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए जाएं। इस दौरान आंकीका शर्मा, पवन कुमार, योगेंद्र सिंह, संजय वीर सिंह मौजूद रहे।
शिक्षकों ने वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों एवं उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को विधायी एवं नीतिगत संरक्षण प्रदान किए जाने की मांग की है।
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संगठन के जिलाध्यक्ष देवराज सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में लाखों शिक्षकों के बीच सेवा शर्तों और भविष्य को लेकर चिंता एवं असुरक्षा की भावना व्याप्त है।
जिसमें 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई द्वारा जारी टीईटी संबंधी अधिसूचना, आरटीई अधिनियम में हुए संशोधन तथा हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का उल्लेख करते हुए स्थिति को गंभीर बताया गया है।
कहा है कि पूर्व में नियुक्त शिक्षक तत्कालीन नियमों और योग्यता के आधार पर चयनित हुए थे और वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं। ऐसे में बाद में लागू मानकों को पूर्व प्रभाव से लागू करना न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के विपरीत होगा।
जिला महामंत्री विकास कुमार बग्गा ने कहा कि दशकों से कार्यरत शिक्षकों का अनुभव और योगदान शिक्षा प्रणाली की रीढ़ है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। यदि इस वर्ग पर नए नियमों का कठोर प्रभाव लागू होता है तो इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल प्रभावित होगा बल्कि शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए राज्य सरकार इस विषय पर केंद्र सरकार से प्रभावी पैरवी करे और आवश्यक विधायी या नीतिगत समाधान सुनिश्चित कराए।
साथ ही शिक्षकों के सेवा अधिकार, पदोन्नति और अन्य लाभों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए जाएं। इस दौरान आंकीका शर्मा, पवन कुमार, योगेंद्र सिंह, संजय वीर सिंह मौजूद रहे।