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Amroha News: नौगांवा सादात में शिया-सुन्नी टकराव और थाने पर चढ़ाई करने के मामले में दो फरवरी को होगी सुनवाई

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jan 2026 02:43 AM IST
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The hearing in the Naugawan Sadat Shia-Sunni clash and the attack on the police station will be held on February 2.
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अमरोहा। नौगांवा सादात में 37 साल पहले शिया-सुन्नी पक्षों के बीच टकराव और थाने पर चढ़ाई करने के मामले की सुनवाई अब दो फरवरी को होगी। इन दोनों न्यायालय में दोनों पक्षों को सुना जा रहा है। 17 अगस्त 1989 को हुई इस सनसनीखेज घटना घटना को आज तक लोग भूल नहीं सके हैं।
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1989 के दौर में नौगांवा सादात कस्बे में बड़ी संख्या में टेंपो चलते थे। टेंपो स्टैंड को लेकर शिया और सुन्नी पक्ष के लोगों में विवाद चल रहा था। शिया समुदाय के लोगों ने टेंपो स्टैंड को नई बस्ती से हटकर मोहल्ला बुध बाजार में कर लिया था। जबकि, इसका विरोध सुन्नी गुट के लोग कर रहे थे। 17 अगस्त 1989 की सुबह शिया गुट के टेंपो चालकों व सेक्रेटरी से थाने में बुलाकर बातचीत की गई और सुन्नी पक्ष के द्वारा दिए गए सुझावों को उनके सामने रखा। बाद में शिया समुदाय ने अपने टेंपो राधा बीड़ी कंपनी के घर के आसपास खड़े कर दिए। इसके बाद थानाध्यक्ष भगत सिंह मोतला ने घटना के बारे में उच्चाधिकारियों को बताया।
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सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त पुलिस फोर्स बुला लिया गया। दोपहर के समय मजिस्ट्रेट हीरालाल और अमरोहा सीओ एआर टमटा भी थाने पहुंच गए। अफसर के निर्देश पर तत्कालीन दरोगा योगेंद्र सिंह यादव के माध्यम से शिया और सुन्नी दोनों पक्षों को थाने बुलाया गया। दोपहर में करीब एक शिया समुदाय के मोहर्रम अली उर्फ शोहरत और मुंशी हकीम के नेतृत्व में करीब पांच से छह हजार लोग जुलूस की शक्ल में थाने के पास बनी टंकी के चक्कर लगाते हुए सड़क पर खड़े हो गए। जैसे ही सुन्नी पक्ष के जिम्मेदार लोग थाने के अंदर घुसे, तभी शिया समुदाय के लोगों की भीड़ पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए थाने की तरफ बढ़ने लगी और सुन्नी समुदाय के लोगों को मारुति कार के भीतर से खींचकर मारपीट शुरू कर दी थी। इसके बाद थाने में पथराव हुआ। उग्र बवालियों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के वाहन तोड़ दिए। दरोगा की सर्विस रिवाल्वर छीन लिया था। बवाल बढ़ता देख एसडीएम और सीओ ने लाठी चार्ज करने का आदेश दिया तो भीड़ ने पुलिस पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग शुरू कर दी।
पुलिस ने भी भीड़ पर को पाने के लिए अपनी आत्मरक्षा में दो राउंड फायरिंग की, जबकि पीएसी के जवानों ने चार राउंड फायरिंग की थी। इस दौरान गोली लगने घायल हुए दो लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में शिया पक्ष के लोगों पर दो प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। बाद में पुलिस ने तत्कालीन चेयरमैन समेत करीब 65 लोगों को आरोपी बनाते हुए चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की थी। मामले की सुनवाई एडीजी प्रथम कोर्ट में चल रही है। 27 जनवरी को इस मामले में सुनवाई हुई। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों काे सुना। शासकीय अधिवक्ता रविंद्र गर्ग ने बताया कि इस मामले में अगली सुनवाई दो फरवरी को होगी।
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