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Amroha News: स्ट्रॉबेरी की खेती कर महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2026 12:44 AM IST
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Women are becoming self-reliant through strawberry cultivation.
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मंडी धनौरा। क्षेत्र के गांव मुसल्लेपुर की महिलाएं अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर स्ट्रॉबेरी की खेती के जरिए अपनी अलग पहचान बना रही हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं करीब 30 महिलाएं मिलकर लगभग 90 बीघा भूमि पर स्ट्रॉबेरी की खेती कर रही हैं। उनकी मेहनत और सफलता की चर्चा अब दिल्ली तक पहुंच रही है। स्ट्रॉबेरी की खेती महिलाओं के लिए आमदनी का मजबूत जरिया बन गई है और इससे वह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
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मुसल्लेपुर गांव में पिछले करीब एक साल से महिलाएं आधुनिक तरीके से स्ट्रॉबेरी की खेती कर रही हैं। उनकी उगाई गई स्ट्रॉबेरी की गुणवत्ता की भी काफी प्रशंसा हो रही है। हाल ही में मुख्य विकास अधिकारी ने गांव का दौरा कर महिलाओं द्वारा की जा रही इस पहल की सराहना की थी और इसे अन्य गांवों के लिए प्रेरणादायक बताया था। स्ट्रॉबेरी की खेती में सक्रिय भूमिका निभा रही कविता देवी बतातीं हैं कि उन्हें एक परिचित ने इस खेती का सुझाव दिया था। इसके बाद उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं के साथ इस बारे में चर्चा की। सभी महिलाओं ने मिलकर इस नई खेती को अपनाने का निर्णय लिया। करीब 30 महिलाओं ने अपने परिवारों को इसके लिए राजी किया और धीरे-धीरे 90 बीघा भूमि पर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर दी। बबीता देवी के अनुसार स्ट्रॉबेरी के पौधे अमेरिका से मंगाए जाते हैं और इसकी खेती मुख्य रूप से सर्दियों में लाभदायक होती है। एक बीघा भूमि से लगभग 30 से 40 हजार रुपये तक का लाभ मिल जाता है। सर्दियों के मौसम में 250 ग्राम स्ट्रॉबेरी की कीमत करीब 200 रुपये तक मिलती है लेकिन तापमान बढ़ने के साथ इसकी कीमत घटकर करीब 50 रुपये प्रति 250 ग्राम रह जाती है। स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहीं सरस्वती देवी ने बताया कि इसका सीजन गंगा स्नान से लेकर होली तक रहता है। इसी अवधि में बाजार में इसकी मांग सबसे ज्यादा रहती है। तापमान बढ़ने के साथ ही फसल खराब होने लगती है, इसलिए इसकी देखभाल में काफी मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती से उन्हें अच्छी आमदनी होने लगी है और इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है। गांव की यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी आधुनिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ा रही है। मुसल्लेपुर की महिलाएं अब अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बनती जा रही हैं।
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महिलाओं को खेती के लिए बैंकों ने ऋण नहीं दिया

मंडी धनौरा। स्ट्रॉबेरी की खेती करने के लिए गांव की महिलाओं ने ऋण का प्रयास किया लेकिन उनको कहीं से भी ऋण नहीं मिला। बाद में गांव की महिलाओं ने ब्लॉक के अधिकारियों से संपर्क स्थापित कर स्वयं सहायता समूह का गठन किया। उसके बाद ही उनको ऋण मिल पाया। कविता देवी बतातीं हैं कि ऋण मिलने के बाद उनका काम बेहतर ढंग से चलने लगा। हालांकि स्ट्रॅाबेरी को कम तापमान पर रखने के लिए सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं है। वह कहतीं है कि यदि सरकार की ओर से उनको सुविधा मिल जाए तो यह क्षेत्र स्ट्रॉबेरी का हब बन सकता है। ललिता देवी का कहना है कि सरकार की ओर से स्ट्रॉबेरी की खेती पर अनुदान मिलना चाहिए। एडीओ मनोज कुमार ने बताया कि पिछले दिनों महिलाओं को स्ट्रॉबेरी की आधुनिक तरीके से खेती के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। उनका कहना है कि गांव की महिलाएं आसपास के पांच गांवों के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को काम दे रही हैं।
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