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Amroha News: आधे दिन तक पूजन, शाम को मंदिरों में गूंजे भजन
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अमरोहा। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन रविवार को जिले भर में देवी मंदिरों और घरों में मां भगवती के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने मां के समक्ष माथा टेककर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिरों में भक्ति का माहौल बना रहा। नगर को दुर्गा मंदिर में भजन कीर्तन कर महिलाओं ने माता रानी का गुणगान किया।
सुबह होते ही श्रद्धालु पूजा के लिए मंदिरों की ओर उमड़ पड़े। शहर के ऐतिहासिक वासुदेव तीर्थ स्थल, प्राचीन दुर्गा मंदिर, चामुंडा मंदिर, बाबा गंगानाथ मंदिर, चौरासी घंटे वाला मंदिर, विरासत मंदिर और कामनाथ मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
मंदिर परिसर मां के जयकारों से गूंज उठे और पूरे वातावरण में भक्तिभाव का संचार होता रहा। श्रद्धालुओं ने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर मां कूष्मांडा को प्रसाद अर्पित किया और अपने परिवार के लिए सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। कई जगहों पर भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया, जिससे माहौल और अधिक भक्तिमय हो गया।
पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की उपासना की जाती है। उन्होंने बताया कि भगवान स्कंद, जिन्हें कार्तिकेय के नाम से भी जाना जाता है, देवी स्कंदमाता के पुत्र हैं। देवासुर संग्राम में भगवान कार्तिकेय देवताओं के सेनापति बने थे और उनका वाहन मयूर है।
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सुबह होते ही श्रद्धालु पूजा के लिए मंदिरों की ओर उमड़ पड़े। शहर के ऐतिहासिक वासुदेव तीर्थ स्थल, प्राचीन दुर्गा मंदिर, चामुंडा मंदिर, बाबा गंगानाथ मंदिर, चौरासी घंटे वाला मंदिर, विरासत मंदिर और कामनाथ मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
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मंदिर परिसर मां के जयकारों से गूंज उठे और पूरे वातावरण में भक्तिभाव का संचार होता रहा। श्रद्धालुओं ने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर मां कूष्मांडा को प्रसाद अर्पित किया और अपने परिवार के लिए सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। कई जगहों पर भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया, जिससे माहौल और अधिक भक्तिमय हो गया।
पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की उपासना की जाती है। उन्होंने बताया कि भगवान स्कंद, जिन्हें कार्तिकेय के नाम से भी जाना जाता है, देवी स्कंदमाता के पुत्र हैं। देवासुर संग्राम में भगवान कार्तिकेय देवताओं के सेनापति बने थे और उनका वाहन मयूर है।