सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Moradabad: Books from private publishers being forced on parents, administration's order ineffective

यूपी में निजी स्कूलों की मनमानी: अभिभावकों पर थोपी जा रही निजी प्रकाशकों की किताबें, प्रशासन का आदेश बेअसर

अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा Published by: Vimal Sharma Updated Wed, 01 Apr 2026 06:40 PM IST
विज्ञापन
सार

निजी स्कूलों के किताबों को लेकर मनमानी सामने आई है। मुरादाबाद प्रशासन के निर्देश के बावजूद कई स्कूल एनसीईआरटी लागू नहीं कर रहे हैं। कई स्कूल महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं।

Moradabad: Books from private publishers being forced on parents, administration's order ineffective
एनसीआरटी की किताब - फोटो : freepik
विज्ञापन

विस्तार

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी सामने आई है। जिला प्रशासन के कक्षा आठवीं तक केवल एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के निर्देश के बाद भी अधिकांश स्कूलों में इसका पालन होता नहीं दिख रहा है।

Trending Videos


स्कूल प्रबंधन अभिभावकों पर महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं। मुरादाबाद पैरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल के पदाधिकारियों के अनुसार 46 प्राइवेट स्कूलों में पूरी तरह निजी प्रकाशकों की किताबें ही लागू कर दी गई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं 27 स्कूलों में से कुछ स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें तो लगाई गई हैं, लेकिन उनके साथ निजी प्रकाशकों की अतिरिक्त किताबें भी अनिवार्य कर दी गई हैं। इससे अभिभावकों की जेब पर दोहरा बोझ पड़ रहा है। इसके अलावा किताबों की कीमतों में भारी अंतर भी सामने आया है।

जहां एनसीईआरटी की एक किताब करीब 60 से 65 रुपये में उपलब्ध है। वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें 250 से लेकर 700 रुपये तक में मिल रही है। एक ही कक्षा की किताबों का पूरा सेट अलग-अलग स्कूलों में 3000 से 5000 रुपये तक महंगा मिल रहा है।

अभिभावकों का कहना हैं कि स्कूलों ने पहले से ही कुछ चुनिंदा बुक स्टॉल तय कर रखे हैं। वहां से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है। इन दुकानों पर न तो कोई छूट मिलती है और न ही बाहर से किताबें खरीदने की अनुमति दी जाती है। इससे काफी समस्याएं हो रही हैं।

बेटे का एक निजी स्कूल में एडमिशन करना है।ट्रांसपोर्ट की फीस के अलावा किताबें इस साल महंगी हो गई है। कई स्कूलों में एडमिशन कराने के लिए जानकारी ली। हर स्कूल में फीस, किताबों की कीमत अलग अलग है। कम पैसे खर्च होने वाले निजी स्कूल में एडमिशन को लेकर बात फाइनल हुई है। हरिओम सैनी, अभिभावक

मैंने सोमवार को ही कोर्स खरीदा है। जो 4600 रुपये में मिला है। इसमें एनसीईआरटी की एक भी किताब नहीं है। साथ ही मुरादाबाद की एक ही दुकानों में यह किताबें उपलब्ध होगी, जिससे यह भी नहीं सोच सकते कि दूसरी दुकान पर जाकर डिस्काउंट करवा लेंगे। - शालू सैनी, अभिभावक

एनसीईआरटी और निजी किताबों में 100 रुपये का भी अंतर होता तो शायद परेशानी नहीं होती, लेकिन जहां एनसीईआरटी का पूरा कोर्स आ जाएगा। वहां एक निजी किताब आ रही है। साथ ही 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने के बाद 1200 रुपये क्वार्टर फीस अलग लगा दी है। - सौरभ अग्रवाल, अभिभावक

सरकार ने अगर एनसीईआरटी की किताबों के सिलेबस को अप्रूव्ड किया है, तो वह किताबें बच्चों के लिए सही ही होंगी। फिर भी पता नहीं क्यों एनसीईआरटी की जगह निजी किताबों को आगे रखा जा रहा है। मेरी बेटी की 70 प्रतिशत किताबें निजी हैं। निजी किताबें 5 से 6 दुकानों पर मिलनी चाहिए, जिससे एक ही दुकान से किताबें खरीदने का दबाव न हो। - नेहा मिश्रा, अभिभावक

कक्षा एनसीईआरटी (₹) एनसीईआरटी नहीं (₹)
1 700 3500 – 5000
2 1000 3500 – 7500
3 1100 4000 – 4500
4 1150 5000 – 6000
5 1100 7000 – 7500
6 1250 7500 – 8000
7 1000 7500 – 8500
8 1000 7500 – 8000
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed