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Auraiya News: तापमान बढ़ने से सरसों की फसल को माहू से खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Wed, 14 Jan 2026 11:35 PM IST
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फोटो-4-खेत में खड़ी सरसों की फसल।संवाद
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बिधूना। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के चलते किसानों की चिंता बढ़ गई है। कोहरे के बाद तेज धूप निकलने से तापमान में वृद्धि हो रही है। इससे सरसों की फसल में माहू रोग का प्रकोप बढ़ने की आशंका है।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. रामपलट ने बताया कि जिन खेतों में सरसों की फसल में फूल आ चुके हैं, वहां माहू का हमला होने की संभावना अधिक रहती है। तापमान बढ़ने और धूप निकलने की स्थिति में माहू का आना स्वाभाविक है। यह कीट फूलों के नीचे, तने व कोमल हिस्सों पर हल्के काले रंग के झुंड के रूप में दिखाई देता है।
डॉ. पलट ने बताया कि माहू कीट पौधों का रस चूसकर फसल को कमजोर कर देता है। इससे फूल झड़ने लगते हैं और फलियों का विकास प्रभावित होता है। इससे पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि किसान माहू दिखाई देने पर तुरंत दवा का छिड़काव करें।
इसके लिए इमिडाक्लोप्रिड, थायोमेथोक्सम या साइपरमेथ्रिन दवा का प्रयोग किया जा सकता है। दवा की मात्रा एक मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर सुबह या शाम के समय छिड़काव करें। तेज धूप और हवा में छिड़काव से बचें।
मौसम वैज्ञानिक ने किसानों से अपील की कि नियमित रूप से अपने खेतों का निरीक्षण करें और प्रारंभिक अवस्था में ही माहू पर नियंत्रण कर सरसों की फसल को सुरक्षित रखें।
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मौसम वैज्ञानिक डॉ. रामपलट ने बताया कि जिन खेतों में सरसों की फसल में फूल आ चुके हैं, वहां माहू का हमला होने की संभावना अधिक रहती है। तापमान बढ़ने और धूप निकलने की स्थिति में माहू का आना स्वाभाविक है। यह कीट फूलों के नीचे, तने व कोमल हिस्सों पर हल्के काले रंग के झुंड के रूप में दिखाई देता है।
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डॉ. पलट ने बताया कि माहू कीट पौधों का रस चूसकर फसल को कमजोर कर देता है। इससे फूल झड़ने लगते हैं और फलियों का विकास प्रभावित होता है। इससे पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि किसान माहू दिखाई देने पर तुरंत दवा का छिड़काव करें।
इसके लिए इमिडाक्लोप्रिड, थायोमेथोक्सम या साइपरमेथ्रिन दवा का प्रयोग किया जा सकता है। दवा की मात्रा एक मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर सुबह या शाम के समय छिड़काव करें। तेज धूप और हवा में छिड़काव से बचें।
मौसम वैज्ञानिक ने किसानों से अपील की कि नियमित रूप से अपने खेतों का निरीक्षण करें और प्रारंभिक अवस्था में ही माहू पर नियंत्रण कर सरसों की फसल को सुरक्षित रखें।
