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Auraiya News: बुकलेट तक सीमित बाढ़ प्रबंधन, धरातल पर बदहाली
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प्राथमिक विद्यालय हनूमान गढ़ी में बनाई जाती है बाढ़ चौकी। संवाद
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फोटो -12 प्राथमिक विद्यालय हनूमान गढ़ी में बनाई जाती है बाढ़ चौकी। संवाद
= यमुना के जलस्तर में वृद्धि से दहशत में हैं यमुना पट्टी के ग्रामीण
= बाढ़ से मड़राने लगता है 10 गांवों पर आपदा का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
अजीतमल। जिले में यमुना का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है। इससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन ने नौ बाढ़ राहत चौकियों को कागज में तो सक्रिय कर दिया है, लेकिन बाढ़ से निपटने के एक में भी इंतजाम नहीं किए हैं। अधिकारियाें का तर्क है कि बाढ़ की स्थिति में व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी।
तहसील क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से किनारे बसे संवेदनशील 10 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। तटवर्ती इलाकों में बाढ़ से बचाव और राहत के लिए बाढ़ चौकियां बनाई जाती हैं। दो दिन से हो रही बारिश से यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी होने के पूरे आसार दिखाई दे रहे हैं। इसको लेकर तहसील क्षेत्र में नौ बाढ़ चौकियां बनाने की प्रशासन ने घोषणा की थी।
डीएम ने संबंधित विभागों को पंचायत भवन व सरकारी स्कूलों में चौकी बनाकर पशुओं के लिए चारा, खाना-पानी, पेजयल, प्रकाश आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। हालांकि बाढ़ चौकियों सहित समस्त व्यवस्थाएं बुकलेट में पूरी तरह तैयारी हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक चौकियों पर न तो कोई बोर्ड लगाया गया है और न ही अभी तक कोई व्यवस्था हुई है।
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दरअसल, ब्लाॅक अजीतमल व औरैया के 10 गांव बडेरा, भूरेपुर कलां, गौहानी खुर्द, गौहानी कलां, जुहीखा, गूंज, असेवटा, बीझलपुर, फरिहा व असेवा बाढ़ के लिए संवेदनशील हैं। इनमें कुछ गांवों को तो पूरी तरह से खाली कराकर ऊपरी स्थानों पर पहुंचाने का प्रशासन इंतजाम करता है। इसके लिए पांच स्थान चिह्नित किए गए हैं। राहत कार्यों के लिए तहसील के 14 अधिकारियों सहित लेखपाल व ब्लाॅक के कर्मचारी नामित किए गए हैं। इनमें तहसीलदार को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जबकि बीडीओ, एडीओ और नायब तहसीलदार प्रभारी के रूप में कार्य करेंगे। इसके अलावा 24 बड़ी और छोटी गांव व नाविक भी चिह्नित हैं और गोताखारों को भी तैयार रहने को कहा गया है।
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यह बाढ़ चौकियां चिह्नित हैं
प्रशासन ने प्राथमिक विद्यालय बड़ेरा, प्राथमिक विद्यालय हनुमान गढ़ी, प्राथमिक विद्यालय असेवा, असेवटा, बीझलपुर, फरहा, बड़ी गूंज, गौहानी कलां, गौहानी खुर्द तथा पंचायत घर खोड़ जुहीखा में बाढ़ चौकी बनाईं गईं हैं।
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नहीं बन सका रपटा पुल
जब भी बाढ़ आती है तो सबसे पहले गांव गौहानी कलां का संपर्क टूट जाता है। इस गांव के मार्ग पर एक रपटा का पुल है और इसी पर सबसे पहले बाढ़ का पानी भरता है। पिछली साल आई बाढ़ का दौरा करने पहुंचे अधिकारियों ने रपटा पुल ऊंचा कराने की बात कही थी, लेकिन आज तक उसे ऊंचा नहीं कराया गया है।
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ये गांव पांच वर्षों से बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे
तहसील में बाढ से पिछले पांच साल से गौहानी कलां, बडैरा, सिकरोडी, जुहीखा, सिमार, गूंज, फरिहा, बीझलपुर, जाजपुर, असेवा, सिखरना, सढरापुर, असेवटा, वंसियापुर, गौहानी खुर्द, मिश्रपुर मानिकचंद्र, भूरेपुर कलां, पहाडपुर, ततारपुर कलां व फरिहा हैं। यह गांव तहसील से दक्षिण दिशा में लगभग 12 किमी दूर स्थित हैं। इनमें मिश्रित आबादी निवास करती है, लेकिन मल्लाह व ठाकुर जाति की बाहुल्यता है। वर्ष 2019, 2021 व 2025 में नदी का जल स्तर बढने से ये गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे। वर्ष 2025 में 22 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे।
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वर्जन
बाढ़ से निपटने के लिए चौकी आदि बना दी गई हैं। उन्होंने बताया जो पहले से चौकियां बनाई गई थीं, उन्हीं को फिर से चौकी एवं आपदा शिविर बनाया गया है। बाढ़ आने की स्थिति में सक्रिय कर दिया जाएगा। निखिल राजपूत, उपजिलाधिकारी, अजीतमल
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= यमुना के जलस्तर में वृद्धि से दहशत में हैं यमुना पट्टी के ग्रामीण
= बाढ़ से मड़राने लगता है 10 गांवों पर आपदा का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
अजीतमल। जिले में यमुना का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है। इससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन ने नौ बाढ़ राहत चौकियों को कागज में तो सक्रिय कर दिया है, लेकिन बाढ़ से निपटने के एक में भी इंतजाम नहीं किए हैं। अधिकारियाें का तर्क है कि बाढ़ की स्थिति में व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी।
तहसील क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से किनारे बसे संवेदनशील 10 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। तटवर्ती इलाकों में बाढ़ से बचाव और राहत के लिए बाढ़ चौकियां बनाई जाती हैं। दो दिन से हो रही बारिश से यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी होने के पूरे आसार दिखाई दे रहे हैं। इसको लेकर तहसील क्षेत्र में नौ बाढ़ चौकियां बनाने की प्रशासन ने घोषणा की थी।
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डीएम ने संबंधित विभागों को पंचायत भवन व सरकारी स्कूलों में चौकी बनाकर पशुओं के लिए चारा, खाना-पानी, पेजयल, प्रकाश आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। हालांकि बाढ़ चौकियों सहित समस्त व्यवस्थाएं बुकलेट में पूरी तरह तैयारी हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक चौकियों पर न तो कोई बोर्ड लगाया गया है और न ही अभी तक कोई व्यवस्था हुई है।
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दरअसल, ब्लाॅक अजीतमल व औरैया के 10 गांव बडेरा, भूरेपुर कलां, गौहानी खुर्द, गौहानी कलां, जुहीखा, गूंज, असेवटा, बीझलपुर, फरिहा व असेवा बाढ़ के लिए संवेदनशील हैं। इनमें कुछ गांवों को तो पूरी तरह से खाली कराकर ऊपरी स्थानों पर पहुंचाने का प्रशासन इंतजाम करता है। इसके लिए पांच स्थान चिह्नित किए गए हैं। राहत कार्यों के लिए तहसील के 14 अधिकारियों सहित लेखपाल व ब्लाॅक के कर्मचारी नामित किए गए हैं। इनमें तहसीलदार को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जबकि बीडीओ, एडीओ और नायब तहसीलदार प्रभारी के रूप में कार्य करेंगे। इसके अलावा 24 बड़ी और छोटी गांव व नाविक भी चिह्नित हैं और गोताखारों को भी तैयार रहने को कहा गया है।
यह बाढ़ चौकियां चिह्नित हैं
प्रशासन ने प्राथमिक विद्यालय बड़ेरा, प्राथमिक विद्यालय हनुमान गढ़ी, प्राथमिक विद्यालय असेवा, असेवटा, बीझलपुर, फरहा, बड़ी गूंज, गौहानी कलां, गौहानी खुर्द तथा पंचायत घर खोड़ जुहीखा में बाढ़ चौकी बनाईं गईं हैं।
नहीं बन सका रपटा पुल
जब भी बाढ़ आती है तो सबसे पहले गांव गौहानी कलां का संपर्क टूट जाता है। इस गांव के मार्ग पर एक रपटा का पुल है और इसी पर सबसे पहले बाढ़ का पानी भरता है। पिछली साल आई बाढ़ का दौरा करने पहुंचे अधिकारियों ने रपटा पुल ऊंचा कराने की बात कही थी, लेकिन आज तक उसे ऊंचा नहीं कराया गया है।
ये गांव पांच वर्षों से बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे
तहसील में बाढ से पिछले पांच साल से गौहानी कलां, बडैरा, सिकरोडी, जुहीखा, सिमार, गूंज, फरिहा, बीझलपुर, जाजपुर, असेवा, सिखरना, सढरापुर, असेवटा, वंसियापुर, गौहानी खुर्द, मिश्रपुर मानिकचंद्र, भूरेपुर कलां, पहाडपुर, ततारपुर कलां व फरिहा हैं। यह गांव तहसील से दक्षिण दिशा में लगभग 12 किमी दूर स्थित हैं। इनमें मिश्रित आबादी निवास करती है, लेकिन मल्लाह व ठाकुर जाति की बाहुल्यता है। वर्ष 2019, 2021 व 2025 में नदी का जल स्तर बढने से ये गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे। वर्ष 2025 में 22 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे।
वर्जन
बाढ़ से निपटने के लिए चौकी आदि बना दी गई हैं। उन्होंने बताया जो पहले से चौकियां बनाई गई थीं, उन्हीं को फिर से चौकी एवं आपदा शिविर बनाया गया है। बाढ़ आने की स्थिति में सक्रिय कर दिया जाएगा। निखिल राजपूत, उपजिलाधिकारी, अजीतमल