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Auraiya News: 14 एकड़ जमीन पर अवैध प्लॉटिंग और गेस्ट हाउस का कब्जा
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खास खबर
सुरक्षित व बंजर पट्टों की आड़ में बड़ा खेल
- बेशकीमती जमीन पाकर कई लोग बन गए रसूखदार, जांच बैठी तो लगाने लगे चक्कर
- दिबियापुर कस्बा से सटे ककराही मौजा का मामला, शनिवार को सामने आया था मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। जमीन फर्जीवाड़े को लेकर सदर तहसील में कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे ही एक मामले ने संपूर्ण समाधान दिवस की जनसुनवाई में शनिवार को अधिकारियों के होश उड़ा दिए थे। दिबियापुर कस्बा से सटी ककराही मौजा की बेशकीमती 14 एकड़ सुरक्षित जमीन को पहले बंजर में बदला गया। इसके बाद इस पर रेवड़ी की तरह पट्टे बांट दिए गए थे। इस जमीन पर कुछ जगह गेस्ट हाउस से लेकर व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। तो कुछ लोगों ने प्लाटिंग कर मोटी रकम पार कर दी है। शिकायत सामने आने पर डीएम के आदेश पर इस पूरे मामले में जांच बैठाई गई है।
राजस्व नियमों के अनुसार सुरक्षित जमीन पर पट्टे नहीं किए जा सकते हैं। क्षेत्रीय लेखपाल के अनुसार ककराही के सात गाटों की इस जमीन का मामला साल 1995 का है। दिबियापुर कस्बा की बढ़ती आबादी के बीच यहां पर जमीन के दाम बढ़ते ही जा रहे थे। वहीं गेल व एनटीपीसी आने के बाद भूमाफियाओं की निगाहें यहां की बेशकीमती जमीनों पर टिकी थीं।
सूत्रों की माने तो इस पूरे मामले में तहसील के अधिकारियों व कर्मचारियों से सांठगांठ कर पहले सुरक्षित जमीन को कागजों में बंजर दर्ज कराया गया। इसके बाद पट्टा आवंटन कर बेशकीमती जमीन का बंदरबांट कर दिया गया। जमीन पाने वाले चुनिंदा लोग अब रसूखदार हो गए हैं। इन जमीनों पर किसी ने व्यापारिक प्रतिष्ठान के तौर पर गेस्टहाउस तो किसी ने प्लाटिंग कर करोड़ों रुपये पार कर दिए। प्लाटिंग कारोबारियों के अनुसार खुले बाजार में इन जमीनों की कीमत 100 करोड़ के करीब है।
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श्रीनारायण त्रिपाठी की शिकायत ने अधिकारियों को भी चौका दिया है। इस मामले में जांच शुरू होने के बाद भूमाफियाओं ने तहसील के चक्कर लगाना शुरू कर दिया है। किसी तरह मामले को दबाने के प्रयास में जुट गए हैं।
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सुरक्षित जमीन तक नहीं पहुंची दो साल पहले की जांच
दो साल पहले सदर तहसील के वैसुंधरा, ककराही, जमुहां, जमूही, ककराही, सेहुद समेत आठ गांवों में जमीन फर्जीवाड़ा की जांच शुरू हुई थी, लेकिन यह जांच ककराही मौजा के सुरक्षित जमीनों तक नहीं पहुंच पाई थी। हालांकि समय के साथ अधिकारियों की कुर्सी बदलती रही। ऐसे में अफसर दो साल पुरानी जांच के सिलसिले में अनजान नजर आ रहे हैं।
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वर्जन
सुरक्षित जमीन पर पट्टे का आवंटन नहीं किया जा सकता है। ककराही में सामने आई शिकायत में जांच हो रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद वाद दर्ज कराया जाएगा। सरकारी जमीनों को सुरक्षित रखने के लिए तहसील प्रशासन तत्पर है। -ब्रह्मानंद, एसडीएम सदर
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सुरक्षित व बंजर पट्टों की आड़ में बड़ा खेल
- बेशकीमती जमीन पाकर कई लोग बन गए रसूखदार, जांच बैठी तो लगाने लगे चक्कर
- दिबियापुर कस्बा से सटे ककराही मौजा का मामला, शनिवार को सामने आया था मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। जमीन फर्जीवाड़े को लेकर सदर तहसील में कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे ही एक मामले ने संपूर्ण समाधान दिवस की जनसुनवाई में शनिवार को अधिकारियों के होश उड़ा दिए थे। दिबियापुर कस्बा से सटी ककराही मौजा की बेशकीमती 14 एकड़ सुरक्षित जमीन को पहले बंजर में बदला गया। इसके बाद इस पर रेवड़ी की तरह पट्टे बांट दिए गए थे। इस जमीन पर कुछ जगह गेस्ट हाउस से लेकर व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। तो कुछ लोगों ने प्लाटिंग कर मोटी रकम पार कर दी है। शिकायत सामने आने पर डीएम के आदेश पर इस पूरे मामले में जांच बैठाई गई है।
राजस्व नियमों के अनुसार सुरक्षित जमीन पर पट्टे नहीं किए जा सकते हैं। क्षेत्रीय लेखपाल के अनुसार ककराही के सात गाटों की इस जमीन का मामला साल 1995 का है। दिबियापुर कस्बा की बढ़ती आबादी के बीच यहां पर जमीन के दाम बढ़ते ही जा रहे थे। वहीं गेल व एनटीपीसी आने के बाद भूमाफियाओं की निगाहें यहां की बेशकीमती जमीनों पर टिकी थीं।
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सूत्रों की माने तो इस पूरे मामले में तहसील के अधिकारियों व कर्मचारियों से सांठगांठ कर पहले सुरक्षित जमीन को कागजों में बंजर दर्ज कराया गया। इसके बाद पट्टा आवंटन कर बेशकीमती जमीन का बंदरबांट कर दिया गया। जमीन पाने वाले चुनिंदा लोग अब रसूखदार हो गए हैं। इन जमीनों पर किसी ने व्यापारिक प्रतिष्ठान के तौर पर गेस्टहाउस तो किसी ने प्लाटिंग कर करोड़ों रुपये पार कर दिए। प्लाटिंग कारोबारियों के अनुसार खुले बाजार में इन जमीनों की कीमत 100 करोड़ के करीब है।
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श्रीनारायण त्रिपाठी की शिकायत ने अधिकारियों को भी चौका दिया है। इस मामले में जांच शुरू होने के बाद भूमाफियाओं ने तहसील के चक्कर लगाना शुरू कर दिया है। किसी तरह मामले को दबाने के प्रयास में जुट गए हैं।
सुरक्षित जमीन तक नहीं पहुंची दो साल पहले की जांच
दो साल पहले सदर तहसील के वैसुंधरा, ककराही, जमुहां, जमूही, ककराही, सेहुद समेत आठ गांवों में जमीन फर्जीवाड़ा की जांच शुरू हुई थी, लेकिन यह जांच ककराही मौजा के सुरक्षित जमीनों तक नहीं पहुंच पाई थी। हालांकि समय के साथ अधिकारियों की कुर्सी बदलती रही। ऐसे में अफसर दो साल पुरानी जांच के सिलसिले में अनजान नजर आ रहे हैं।
वर्जन
सुरक्षित जमीन पर पट्टे का आवंटन नहीं किया जा सकता है। ककराही में सामने आई शिकायत में जांच हो रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद वाद दर्ज कराया जाएगा। सरकारी जमीनों को सुरक्षित रखने के लिए तहसील प्रशासन तत्पर है। -ब्रह्मानंद, एसडीएम सदर