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Auraiya News: महिला की हत्या के मामले में पति व सास दोषी
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-अदालत ने दोषी को सात-सात साल की सजा सुनाई
-दोनों पर 15-15 हजार रुपये का लगाया अर्थदंड
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। थाना बेला क्षेत्र के गांव नन्दपुर में एक विवाहिता की मौत के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी पति व सास को दोषी करार दिया। दोषी पति हरि कुमार और सास निर्मला देवी को को सात-सात साल की सजा और 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड भी गलाया गया।
वादी विकास कुमार ने थाने में दी गई तहरीर में बताया था कि उसने अपनी बहन रजनी की शादी 25 मई 2020 को बेला थाना क्षेत्र के गांव नंदपुर निवासी हरि कुमार के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति हरि कुमार, सास निर्मला देवी व अन्य ससुरालीजन अतिरिक्त दहेज के रूप में एक लाख रुपये और बाइक की मांग करने लगे।
मांग पूरी न होने पर विवाहिता को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। छह जून 2022 को अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर गला दबाकर रजनी की हत्या कर दी गई और उसके शव को कमरे में छोड़ दिया गया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से माननीय न्यायालय के समक्ष कई महत्वपूर्ण गवाह और दस्तावेजी सबूत पेश किए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर ने खुलासा किया था कि मृतका की मृत्यु गला कसने व श्वासावरोध के कारण हुई थी। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों को दोषी करार दिया।
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कार सवार परिवार पर फायरिंग के आरोपी दो भाइयों को मिली जमानत
औरैया। सड़क दुर्घटना की पुरानी रंजिश को लेकर कार में बैठे परिवार पर तमंचे से फायर करने के मामले में आरोपी पिता-पुत्र को अदालत से जमानत मिल गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान की अदालत ने आरोपी गौतम शुक्ला और पुरुषोत्तम शुक्ला की जमानत याचिकाएं स्वीकार करते हुए उन्हें बुधवार को रिहा करने का आदेश दिया है।
शहर के मोहल्ला नारायणपुर निवासी राकेश कुमार ने तीन मई को प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उनके बेटे अंकित की गाड़ी से करीब एक महीने पहले आरोपियों के पिता कृष्णदयाल शुक्ला का एक्सीडेंट हो गया था। इसी रंजिश के चलते तीन मई को जब राकेश कुमार पत्नी सुनीता और बेटे के साथ मामा दूध डेयरी के बाहर कार में बैठे थे, तभी कृष्णदयाल के पुत्र गौतम शुक्ला और पुरुषोत्तम शुक्ला ने आकर गाली-गलौज की और जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी। शोर मचने पर आरोपी धमकी देते हुए भाग निकले थे। बचाव पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया कि आरोपियों को रंजिश के तहत झूठा फंसाया गया है, उनसे कोई बरामदगी नहीं हुई है और वे 10 मई से जेल में बंद हैं। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 40-40 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और दो-दो जमानतगीर प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत मंजूर कर ली।
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पुलिस टीम पर हमला के आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
औरैया। दिबियापुर कस्बे में पुलिस टीम पर हमला करने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और आरोपियों को छुड़ा ले जाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम पारूल जैन की अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी शुऐब खान और मसीत अहमद की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दिबियापुर थाने के कस्बा प्रभारी उप निरीक्षक अरुण कुमार अपनी हमराह पुलिस टीम के साथ दो अगस्त को कानपुर नगर न्यायालय की ओर से जारी गैर-जमानती वारंट की तामील कराने के लिए अभियुक्त सुऐब खान के घर पहुंचे थे। पुलिस ने सुऐब खान को उसके घर के बाहर से गिरफ्तार कर लिया और थाने लेकर जाने लगे।
आरोप है कि शुऐब खान के चिल्लाने पर मसीत अहमद, मुसाहिब, ऐजाज और यासीन समेत अन्य लोग एकजुट हो गए। सभी ने मिलकर पुलिस पर हमला कर दिया और अभियुक्त शुऐब खान को छुड़ा ले गए। इस दौरान पुलिस र्किमयों के साथ हाथापाई हुई, उनकी वर्दियां फट गईं और पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें भी आईं। बुधवार को मामले की सुनवाई की गई। इस दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियुक्तों को इस मुकदमे में झूठा फंसाया गया है। वे पूरी तरह से निर्दोष हैं और घटना के समर्थन में कोई भी स्वतंत्र व निष्पक्ष गवाह मौजूद नहीं है। अभियोजन की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोनों आरोपियों शुऐब खान और मसीत अहमद का अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।
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साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त दोषमुक्त
औरैया। अपर सत्र न्यायाधीश कैलाश कुमार की अदालत ने पुलिस पर फायरिंग और अवैध असलहा रखने के मामले में अभियुक्त अंकित यादव को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 दिसंबर 2016 की रात पुलिस वाहन चेकिंग के दौरान मुखबिर की सूचना पर कखावतू बम्बा के पास आरोपी को पकड़ने गई थी। आरोप था कि अंकित यादव ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायर किया था। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़कर उसके कब्जे से एक तमंचा और कारतूस बरामद करने का दावा किया था। मामले में कोतवाली पुलिस ने हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया। बुधवार को मामले की सुनवाई की गई।
विचारण के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष थाने से पुलिस की जीडी रवानगी साबित करने में असफल रहा। घटना स्थल के पास आबादी होने के बावजूद कोई भी स्वतंत्र जनसाक्षी पेश नहीं किया गया। इसके अलावा, पुलिस पार्टी पर फायरिंग का दावा करने के बावजूद किसी भी पुलिसकर्मी को कोई चोट नहीं आई और न ही बैलिस्टिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। शस्त्र अधिनियम के तहत जिलाधिकारी की अनुमति भी केवल मैकेनिकल तरीके से ली गई थी। अदालत ने अभियोजन के संदेह से परे आरोप साबित करने में असफल रहने पर अभियुक्त अंकित यादव को दोनों मामलों के सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
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-दोनों पर 15-15 हजार रुपये का लगाया अर्थदंड
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। थाना बेला क्षेत्र के गांव नन्दपुर में एक विवाहिता की मौत के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी पति व सास को दोषी करार दिया। दोषी पति हरि कुमार और सास निर्मला देवी को को सात-सात साल की सजा और 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड भी गलाया गया।
वादी विकास कुमार ने थाने में दी गई तहरीर में बताया था कि उसने अपनी बहन रजनी की शादी 25 मई 2020 को बेला थाना क्षेत्र के गांव नंदपुर निवासी हरि कुमार के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति हरि कुमार, सास निर्मला देवी व अन्य ससुरालीजन अतिरिक्त दहेज के रूप में एक लाख रुपये और बाइक की मांग करने लगे।
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मांग पूरी न होने पर विवाहिता को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। छह जून 2022 को अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर गला दबाकर रजनी की हत्या कर दी गई और उसके शव को कमरे में छोड़ दिया गया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से माननीय न्यायालय के समक्ष कई महत्वपूर्ण गवाह और दस्तावेजी सबूत पेश किए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर ने खुलासा किया था कि मृतका की मृत्यु गला कसने व श्वासावरोध के कारण हुई थी। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों को दोषी करार दिया।
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औरैया। सड़क दुर्घटना की पुरानी रंजिश को लेकर कार में बैठे परिवार पर तमंचे से फायर करने के मामले में आरोपी पिता-पुत्र को अदालत से जमानत मिल गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान की अदालत ने आरोपी गौतम शुक्ला और पुरुषोत्तम शुक्ला की जमानत याचिकाएं स्वीकार करते हुए उन्हें बुधवार को रिहा करने का आदेश दिया है।
शहर के मोहल्ला नारायणपुर निवासी राकेश कुमार ने तीन मई को प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उनके बेटे अंकित की गाड़ी से करीब एक महीने पहले आरोपियों के पिता कृष्णदयाल शुक्ला का एक्सीडेंट हो गया था। इसी रंजिश के चलते तीन मई को जब राकेश कुमार पत्नी सुनीता और बेटे के साथ मामा दूध डेयरी के बाहर कार में बैठे थे, तभी कृष्णदयाल के पुत्र गौतम शुक्ला और पुरुषोत्तम शुक्ला ने आकर गाली-गलौज की और जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी। शोर मचने पर आरोपी धमकी देते हुए भाग निकले थे। बचाव पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया कि आरोपियों को रंजिश के तहत झूठा फंसाया गया है, उनसे कोई बरामदगी नहीं हुई है और वे 10 मई से जेल में बंद हैं। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 40-40 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और दो-दो जमानतगीर प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत मंजूर कर ली।
पुलिस टीम पर हमला के आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
औरैया। दिबियापुर कस्बे में पुलिस टीम पर हमला करने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और आरोपियों को छुड़ा ले जाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम पारूल जैन की अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी शुऐब खान और मसीत अहमद की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दिबियापुर थाने के कस्बा प्रभारी उप निरीक्षक अरुण कुमार अपनी हमराह पुलिस टीम के साथ दो अगस्त को कानपुर नगर न्यायालय की ओर से जारी गैर-जमानती वारंट की तामील कराने के लिए अभियुक्त सुऐब खान के घर पहुंचे थे। पुलिस ने सुऐब खान को उसके घर के बाहर से गिरफ्तार कर लिया और थाने लेकर जाने लगे।
आरोप है कि शुऐब खान के चिल्लाने पर मसीत अहमद, मुसाहिब, ऐजाज और यासीन समेत अन्य लोग एकजुट हो गए। सभी ने मिलकर पुलिस पर हमला कर दिया और अभियुक्त शुऐब खान को छुड़ा ले गए। इस दौरान पुलिस र्किमयों के साथ हाथापाई हुई, उनकी वर्दियां फट गईं और पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें भी आईं। बुधवार को मामले की सुनवाई की गई। इस दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियुक्तों को इस मुकदमे में झूठा फंसाया गया है। वे पूरी तरह से निर्दोष हैं और घटना के समर्थन में कोई भी स्वतंत्र व निष्पक्ष गवाह मौजूद नहीं है। अभियोजन की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोनों आरोपियों शुऐब खान और मसीत अहमद का अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।
साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त दोषमुक्त
औरैया। अपर सत्र न्यायाधीश कैलाश कुमार की अदालत ने पुलिस पर फायरिंग और अवैध असलहा रखने के मामले में अभियुक्त अंकित यादव को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 दिसंबर 2016 की रात पुलिस वाहन चेकिंग के दौरान मुखबिर की सूचना पर कखावतू बम्बा के पास आरोपी को पकड़ने गई थी। आरोप था कि अंकित यादव ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायर किया था। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़कर उसके कब्जे से एक तमंचा और कारतूस बरामद करने का दावा किया था। मामले में कोतवाली पुलिस ने हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया। बुधवार को मामले की सुनवाई की गई।
विचारण के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष थाने से पुलिस की जीडी रवानगी साबित करने में असफल रहा। घटना स्थल के पास आबादी होने के बावजूद कोई भी स्वतंत्र जनसाक्षी पेश नहीं किया गया। इसके अलावा, पुलिस पार्टी पर फायरिंग का दावा करने के बावजूद किसी भी पुलिसकर्मी को कोई चोट नहीं आई और न ही बैलिस्टिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। शस्त्र अधिनियम के तहत जिलाधिकारी की अनुमति भी केवल मैकेनिकल तरीके से ली गई थी। अदालत ने अभियोजन के संदेह से परे आरोप साबित करने में असफल रहने पर अभियुक्त अंकित यादव को दोनों मामलों के सभी आरोपों से बरी कर दिया है।