{"_id":"6a77782d7e5af7e0d50ca2b4","slug":"leases-for-33-acres-of-protected-land-cancelled-after-29-years-auraiya-news-c-211-1-aur1006-149531-2026-08-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: 29 साल बाद 33 एकड़ सुरक्षित जमीन के पट्टे खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: 29 साल बाद 33 एकड़ सुरक्षित जमीन के पट्टे खारिज
Sun, 09 Aug 2026 12:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 09 Aug 2026 12:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
औरैया। स्वतः संज्ञान के तहत साल 1996 में तत्कालीन बिधूना एसडीएम ने जलालपुर फफूंद और गहेसर गांव में 22 से ज्यादा लोगों को 33 एकड़ सुरक्षित जमीन पर पट्टे बांट दिए थे। सरकारी जमीन का मानकों को ताक पर रखकर हुए बंदरबांट के बाद से पट्टाधारक लोग यहां फसलें कर थे। साल 2024 में एक शिकायत पर बिधूना एसडीएम ने जांच बैठाई तो मानकों का उल्लंघन पकड़ा गया। इसके बाद वाद दर्ज हुआ। एडीएम न्यायिक कोर्ट ने अब इन पट्टों को खारिज कर दिया है।
चकबंदी के बाद जमीनों में फर्जी प्रविष्टि व मानकों को ताक पर रखकर पट्टों के आवंटन के मामले में जिला प्रशासन का रुख सख्त है। इन मामलों को लेकर डीएम से लेकर अन्य न्यायालयों में तेजी से सुनवाई चल रही है। सामने आ रहे फैसलों के बाद भूमि हथियाने वाले लोगों के पैरों से जमीन खिसक रही है। बिधूना तहसील क्षेत्र के एक ऐसे ही मामले में आए आदेश ने खलबली मचा दी है।
बिधूना के गांव जलालपुर फफूंद व गहेसर में साल 1996 में तत्कालीन एसडीएम ने स्वतः संज्ञान के तहत 22 से ज्यादा लोगों को पट्टे का आवंटन कर दिया था। ये जमीनें ग्राम सभा की चरागाह व खलिहान की थी। राजस्व मानकों के अनुसार ग्राम सभा की सुरक्षित जमीनों पर पट्टे नहीं किए जा सकते हैं। इस मानक को ताक पर रखकर लोगों को पट्टा आवंटन कर दिया गया। लाभ लेकर लोग इन जमीनों पर साल दर साल फसलें उगा रहे थे। वर्ष 2024 में एक शिकायत पर एसडीएम बिधूना ने जांच बैठाई।
विज्ञापन
इस जांच रिपोर्ट में सुरक्षित जमीन का बंदरबांट पकड़ा गया। एसडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर 19 सितंबर 2024 को डीएम कोर्ट में वाद दर्ज कराया गया। पट्टा पाने वाले लोगों को नोटिस जारी हुए। बाद में यह वाद बीते 16 फरवरी 2026 को एडीएम न्यायिक कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। जहां लगातार चली सुनवाई के बाद अब फैसला आया है। एडीएम न्यायिक कोर्ट ने इस जमीन के पट्टों में अनियमितता पाई गई। इसके आधार पर पट्टे निरस्त करते हुए दोबारा से जमीन को चरागाह व खलिहान में दर्ज करने का आदेश दिया है। इसके लिए एसडीएम बिधूना को आदेश भी जारी किए गए हैं।
तत्कालीन अधिकारी व कर्मचारी भी आएंगे प्रशासन के रडार पर
सुमोटो के तहत साल 1996-97 में जलालपुर फफूंद व गहेसर में हुए पट्टे के मामले में तत्कालीन सरकारी तंत्र की बड़ी चूक पकड़ी गई है। नियमों का उल्लंघन करते हुए सुरक्षित जमीन के ही पट्टे काट दिए गए थे। ऐसे में अब प्रशासन के रडार पर तत्कालीन अधिकारी व कर्मचारी भी आ गए हैं।
इन्हें मिल गए थे पट्टे
वरजोर सिंह, कमलेश कुमार, लज्जाराम, जयराम, घसीटी, जयराम, नंदकिशोर, हरिओम, मुन्नालाल, अशोक, चंद्रशेखर, रामकरन, जगदीश, शिवपूजन, शीलू सिंह, शिवदत्त, मूलचंद्र, रमेशचंद्र, बिटानी, धनश्री, वृंदावन, नगू।
वर्जन
बिधूना के जलालपुर फफूंद व गहेसर में सुरक्षित जमीन पर पट्टा आवंटन को निरस्त किया गया है। बिधूना एसडीएम को इस जमीन पर कब्जा लेने और खतौनी में आदेश के तहत सुधार कराने को कहा गया है।
-नीरज प्रसाद, एडीएम न्यायिक
सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा को लेकर लगातार सख्ती की जा रही है। जनता की सहूलियत ही हमारी प्राथमिकता में है।
-बृजेश कुमार, डीएम
विज्ञापन
चकबंदी के बाद जमीनों में फर्जी प्रविष्टि व मानकों को ताक पर रखकर पट्टों के आवंटन के मामले में जिला प्रशासन का रुख सख्त है। इन मामलों को लेकर डीएम से लेकर अन्य न्यायालयों में तेजी से सुनवाई चल रही है। सामने आ रहे फैसलों के बाद भूमि हथियाने वाले लोगों के पैरों से जमीन खिसक रही है। बिधूना तहसील क्षेत्र के एक ऐसे ही मामले में आए आदेश ने खलबली मचा दी है।
विज्ञापन
बिधूना के गांव जलालपुर फफूंद व गहेसर में साल 1996 में तत्कालीन एसडीएम ने स्वतः संज्ञान के तहत 22 से ज्यादा लोगों को पट्टे का आवंटन कर दिया था। ये जमीनें ग्राम सभा की चरागाह व खलिहान की थी। राजस्व मानकों के अनुसार ग्राम सभा की सुरक्षित जमीनों पर पट्टे नहीं किए जा सकते हैं। इस मानक को ताक पर रखकर लोगों को पट्टा आवंटन कर दिया गया। लाभ लेकर लोग इन जमीनों पर साल दर साल फसलें उगा रहे थे। वर्ष 2024 में एक शिकायत पर एसडीएम बिधूना ने जांच बैठाई।
विज्ञापन
इस जांच रिपोर्ट में सुरक्षित जमीन का बंदरबांट पकड़ा गया। एसडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर 19 सितंबर 2024 को डीएम कोर्ट में वाद दर्ज कराया गया। पट्टा पाने वाले लोगों को नोटिस जारी हुए। बाद में यह वाद बीते 16 फरवरी 2026 को एडीएम न्यायिक कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। जहां लगातार चली सुनवाई के बाद अब फैसला आया है। एडीएम न्यायिक कोर्ट ने इस जमीन के पट्टों में अनियमितता पाई गई। इसके आधार पर पट्टे निरस्त करते हुए दोबारा से जमीन को चरागाह व खलिहान में दर्ज करने का आदेश दिया है। इसके लिए एसडीएम बिधूना को आदेश भी जारी किए गए हैं।
तत्कालीन अधिकारी व कर्मचारी भी आएंगे प्रशासन के रडार पर
सुमोटो के तहत साल 1996-97 में जलालपुर फफूंद व गहेसर में हुए पट्टे के मामले में तत्कालीन सरकारी तंत्र की बड़ी चूक पकड़ी गई है। नियमों का उल्लंघन करते हुए सुरक्षित जमीन के ही पट्टे काट दिए गए थे। ऐसे में अब प्रशासन के रडार पर तत्कालीन अधिकारी व कर्मचारी भी आ गए हैं।
इन्हें मिल गए थे पट्टे
वरजोर सिंह, कमलेश कुमार, लज्जाराम, जयराम, घसीटी, जयराम, नंदकिशोर, हरिओम, मुन्नालाल, अशोक, चंद्रशेखर, रामकरन, जगदीश, शिवपूजन, शीलू सिंह, शिवदत्त, मूलचंद्र, रमेशचंद्र, बिटानी, धनश्री, वृंदावन, नगू।
वर्जन
बिधूना के जलालपुर फफूंद व गहेसर में सुरक्षित जमीन पर पट्टा आवंटन को निरस्त किया गया है। बिधूना एसडीएम को इस जमीन पर कब्जा लेने और खतौनी में आदेश के तहत सुधार कराने को कहा गया है।
-नीरज प्रसाद, एडीएम न्यायिक
सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा को लेकर लगातार सख्ती की जा रही है। जनता की सहूलियत ही हमारी प्राथमिकता में है।
-बृजेश कुमार, डीएम