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Auraiya News: आधी से भी कम नर्सों के भरोसे मेडिकल कॉलेज
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 17 Mar 2026 11:07 PM IST
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फोटो-9-मेडिकल कॉलेज में मरीज देखते चिकित्सक।
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औरैया। जिले के मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी अब स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर डाल रही है।
420 बेड वाले इस अस्पताल में जहां रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं वहीं, स्टाफ नर्सों की संख्या जरूरत के मुकाबले आधी भी नहीं है। इससे वार्ड प्रबंधन से लेकर आपात सेवाओं तक पर दबाव बढ़ गया है।
मेडिकल कॉलेज में करीब 100 स्टाफ नर्सों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 31 और स्थायी केवल 12 नर्सें ही तैनात हैं। ऐसे में एक-एक नर्स को कई-कई वार्ड संभालने पड़ रहे हैं, जिससे मरीजों की देखभाल प्रभावित हो रही है। गंभीर मरीजों की निगरानी और समय पर उपचार में भी दिक्कतें सामने आ रही है। बीच में प्रयास जरूर हुए, लेकिन वे भी सफल नहीं हो सके।
एक साल पहले सीएचसी से 12 स्टाफ नर्सों के तबादले किए गए थे, इन्हें उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की थी। इनमें से केवल छह नर्सों ने ज्वाइन किया, जबकि बाकी ने किनारा कर लिया। ज्वाइन करने वाली छह नर्सों ने भी कुछ दिन बाद अपनी ड्यूटी वापस करा ली, जिससे स्थिति जस की तस बनी हुई है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि स्टाफ की कमी के चलते मौजूदा नर्सों पर अत्यधिक कार्यभार है, जिसका असर सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेशवीर सिंह ने बताया कि नर्सिंग स्टाफ की कमी को लेकर शासन को मांग भेज दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही पर्याप्त संख्या में नर्सों की तैनाती होगी, जिससे व्यवस्थाएं सुधर सकेंगी।
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420 बेड वाले इस अस्पताल में जहां रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं वहीं, स्टाफ नर्सों की संख्या जरूरत के मुकाबले आधी भी नहीं है। इससे वार्ड प्रबंधन से लेकर आपात सेवाओं तक पर दबाव बढ़ गया है।
मेडिकल कॉलेज में करीब 100 स्टाफ नर्सों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 31 और स्थायी केवल 12 नर्सें ही तैनात हैं। ऐसे में एक-एक नर्स को कई-कई वार्ड संभालने पड़ रहे हैं, जिससे मरीजों की देखभाल प्रभावित हो रही है। गंभीर मरीजों की निगरानी और समय पर उपचार में भी दिक्कतें सामने आ रही है। बीच में प्रयास जरूर हुए, लेकिन वे भी सफल नहीं हो सके।
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एक साल पहले सीएचसी से 12 स्टाफ नर्सों के तबादले किए गए थे, इन्हें उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की थी। इनमें से केवल छह नर्सों ने ज्वाइन किया, जबकि बाकी ने किनारा कर लिया। ज्वाइन करने वाली छह नर्सों ने भी कुछ दिन बाद अपनी ड्यूटी वापस करा ली, जिससे स्थिति जस की तस बनी हुई है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि स्टाफ की कमी के चलते मौजूदा नर्सों पर अत्यधिक कार्यभार है, जिसका असर सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेशवीर सिंह ने बताया कि नर्सिंग स्टाफ की कमी को लेकर शासन को मांग भेज दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही पर्याप्त संख्या में नर्सों की तैनाती होगी, जिससे व्यवस्थाएं सुधर सकेंगी।