{"_id":"69ac69d305cd1fdbf50ca051","slug":"the-flight-of-womens-minds-touching-the-sky-with-courage-auraiya-news-c-211-1-aur1006-140875-2026-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: नारी मन की उड़ान... हौसलों से छू रहीं आसमान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: नारी मन की उड़ान... हौसलों से छू रहीं आसमान
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sat, 07 Mar 2026 11:39 PM IST
विज्ञापन
फोटो-24- सीमा सेंगर। संवाद
विज्ञापन
औरैया। महिलाएं हौसलों के साथ आसमान छू रही हैं। शहर कस्बों से लेकर गांव में इसकी मिसालें भी सामने आ रही हैं। इनमें किसी ने सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी दिखाकर अपना नाम बनाया तो किसी ने अपने सपने को साकार करते हुए उद्योगीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
घर की बहू और बेटियों ने ये कदम जिस मजबूती के साथ उठाए, उसके परिणाम भी दिखने लगे हैं। कभी रोक-टोक करने वाला समाज अब इन्हें आंखों पर बैठा रहा है। आधुनिकता के दौर में नारी शक्ति स्वावलंबन की राह पर है।
कंपनी बनाने का सपना, ससुराल में किया पूरा
एरवाकटरा ब्लॉक के गांव एरवा टिकटा निवासी सीमा सेंगर ने सालों पहले प्लास्टिक पाइप की कंपनी खोलने का सपना देखा था। मायके में देखा गया यह सपना ससुराल में पहुंचने के बाद पूरा हो गया। सीमा सेंगर ने बताया कि साल 2003 में उनकी शादी एरवा टीकुर निवासी अमित तोमर के साथ हुई। घर के कामकाज के साथ उन्होंने कंपनी बनाने की बारीकी समझी।
साल 2014 में अपना छोटा सा कारोबार खड़ा किया। इसी बीच सरकारी योजना के तहत 40 लाख का ऋण मिल गया। कंपनी को श्री गिर्राज जी प्लास्टिक इंडस्ट्री नाम देते हुए 10 अन्य लोगों को रोजगार दिया। दो साल के अंदर कंपनी का कारोबार प्रदेश की बाजारों में पहुंच चुका है। कंपनी में अब वेस्ट प्लास्टिक को रिसाइकिल कर पाइप बनाने का भी काम शुरू कर दिया गया है। 100 से ज्यादा लोगों को कंपनी से रोजगार मिलने लगा है।
गांव की बेटी आयुषी ने कि्रकेट में बनाई पहचान
सदर ब्लॉक के गांव भरसेन निवासी आयुषी सेंगर ने मुश्किलों के बीच हार नहीं मानी। बचपन में कि्रकेट में अपनी पहचान बनाने का जो सपना देखा उसे साकार भी कर लिया। गांव के खेत खलियानों में बैट बॉल खेलते हुए अपने हुनर को निखारा। साल 2022 में अंडर-19 महिला कि्रकेट टीम में जगह बनाई। अब इस टीम के साथ ही आयुषी कानपुर के सीएसजेएम विश्वविद्यालय टीम के कप्तान की भी जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
फास्ट बॉलर के तौर पर अब वो देश की महिला कि्रकेट टीम का भी हिस्सा बनना चाहती है। आयुषी ने बताया कि आज जिस मुकाम पर वह पहुंची है, उसका पूरा श्रेय उनकी मां, गुरुजनों और चाचा व परिवार वालों को जाता है। उनके पिता की मृत्यु उसके जन्म से 15 दिन पहले ही हो गई थी। जिसको लेकर रिश्तेदार और गांव के लोग उसको और उसकी मां को तरह-तरह की बातें बोलकर ताने मारते थे। जैसे-तैसे मां रामलक्ष्मी ने खुद को संभाला और एक एनजीओ में प्राइवेट नौकरी कर भाई बहनों को स्कूल भेजा। मां को देखते हुए उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में अपना रुख करना शुरू कर दिया।
बेटियों को आत्मरक्षा में दक्ष बना रहीं रितु
दिबियापुर कस्बा के गुंजन रोड निवासी रितु चंदेरिया प्राइवेट स्कूल में सेल्फ डिफेंस के ट्रेनर पद पर तैनात हैं। इसके साथ ही वह सामाजिक कार्यों में भी हिस्सेदारी करती हैं। रितु ने बताया कि बहू बेटियों के साथ आए दिन होने वाली घटनाओं ने उन्हें आठ साल पहले झकझोर दिया था। इसके बाद उन्होंने बेटियों को आत्मरक्षा में दक्ष बनाने की पहल शुरू की।
उनका यह प्रयास पहले जिले के स्कूलों में किया गया। इसके बाद दिनों दिन इस प्रयास का दायरा बढ़ता चला गया। गेल ने भी सीएसआर फंड के जरिए उन्हें प्रदेश व अन्य राज्यों में बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के लिए भेजा। खास तौर पर उन्होंने झारखंड व छत्तीसगढ़ राज्य में जाकर नक्सली क्षेत्रों में बेटियों को सशक्त बनाने का काम किया। इसके लिए उन्हें कई बार सम्मानित भी किया गया।
महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में जुटीं रीना
समाज सेवा के लिए जिले में रीना पांडेय ने अपनी अलग ही पहचान बनाई है। उन्होंने साल 2009 में अपेक्षा महिला एवं बाल विकास समिति नाम की संस्था बनाई। इस संस्था के जरिये महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ते हुए स्वावलंबन की राह दिखा रही है। रीना पांडेय ने बताया कि समाज सेवा की यह प्रेरणा उन्हें मां से मिली थी। उन्होंने बताया कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें आर्थिक तौर पर मजबूत करना होगा।
इसके लिए उन्होंने स्वरोजगार पर काम करने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि कुटीर उद्योग से लेकर छोटे-छोटे व्यवसायों से महिलाओं को जोड़ने के लिए उन्होंने गांव-गांव पहल की। सब्जी, मशरूम, सिलाई, बुनाई, दुकान, मार्केटिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण समेत तमाम कार्यों से जोड़ा। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाते हुए बजट का भी इंतजाम कराया। पिछले 17 साल से जारी इस प्रयास से जिले की चार हजार महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जा चुका है।
Trending Videos
घर की बहू और बेटियों ने ये कदम जिस मजबूती के साथ उठाए, उसके परिणाम भी दिखने लगे हैं। कभी रोक-टोक करने वाला समाज अब इन्हें आंखों पर बैठा रहा है। आधुनिकता के दौर में नारी शक्ति स्वावलंबन की राह पर है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कंपनी बनाने का सपना, ससुराल में किया पूरा
एरवाकटरा ब्लॉक के गांव एरवा टिकटा निवासी सीमा सेंगर ने सालों पहले प्लास्टिक पाइप की कंपनी खोलने का सपना देखा था। मायके में देखा गया यह सपना ससुराल में पहुंचने के बाद पूरा हो गया। सीमा सेंगर ने बताया कि साल 2003 में उनकी शादी एरवा टीकुर निवासी अमित तोमर के साथ हुई। घर के कामकाज के साथ उन्होंने कंपनी बनाने की बारीकी समझी।
साल 2014 में अपना छोटा सा कारोबार खड़ा किया। इसी बीच सरकारी योजना के तहत 40 लाख का ऋण मिल गया। कंपनी को श्री गिर्राज जी प्लास्टिक इंडस्ट्री नाम देते हुए 10 अन्य लोगों को रोजगार दिया। दो साल के अंदर कंपनी का कारोबार प्रदेश की बाजारों में पहुंच चुका है। कंपनी में अब वेस्ट प्लास्टिक को रिसाइकिल कर पाइप बनाने का भी काम शुरू कर दिया गया है। 100 से ज्यादा लोगों को कंपनी से रोजगार मिलने लगा है।
गांव की बेटी आयुषी ने कि्रकेट में बनाई पहचान
सदर ब्लॉक के गांव भरसेन निवासी आयुषी सेंगर ने मुश्किलों के बीच हार नहीं मानी। बचपन में कि्रकेट में अपनी पहचान बनाने का जो सपना देखा उसे साकार भी कर लिया। गांव के खेत खलियानों में बैट बॉल खेलते हुए अपने हुनर को निखारा। साल 2022 में अंडर-19 महिला कि्रकेट टीम में जगह बनाई। अब इस टीम के साथ ही आयुषी कानपुर के सीएसजेएम विश्वविद्यालय टीम के कप्तान की भी जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
फास्ट बॉलर के तौर पर अब वो देश की महिला कि्रकेट टीम का भी हिस्सा बनना चाहती है। आयुषी ने बताया कि आज जिस मुकाम पर वह पहुंची है, उसका पूरा श्रेय उनकी मां, गुरुजनों और चाचा व परिवार वालों को जाता है। उनके पिता की मृत्यु उसके जन्म से 15 दिन पहले ही हो गई थी। जिसको लेकर रिश्तेदार और गांव के लोग उसको और उसकी मां को तरह-तरह की बातें बोलकर ताने मारते थे। जैसे-तैसे मां रामलक्ष्मी ने खुद को संभाला और एक एनजीओ में प्राइवेट नौकरी कर भाई बहनों को स्कूल भेजा। मां को देखते हुए उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में अपना रुख करना शुरू कर दिया।
बेटियों को आत्मरक्षा में दक्ष बना रहीं रितु
दिबियापुर कस्बा के गुंजन रोड निवासी रितु चंदेरिया प्राइवेट स्कूल में सेल्फ डिफेंस के ट्रेनर पद पर तैनात हैं। इसके साथ ही वह सामाजिक कार्यों में भी हिस्सेदारी करती हैं। रितु ने बताया कि बहू बेटियों के साथ आए दिन होने वाली घटनाओं ने उन्हें आठ साल पहले झकझोर दिया था। इसके बाद उन्होंने बेटियों को आत्मरक्षा में दक्ष बनाने की पहल शुरू की।
उनका यह प्रयास पहले जिले के स्कूलों में किया गया। इसके बाद दिनों दिन इस प्रयास का दायरा बढ़ता चला गया। गेल ने भी सीएसआर फंड के जरिए उन्हें प्रदेश व अन्य राज्यों में बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के लिए भेजा। खास तौर पर उन्होंने झारखंड व छत्तीसगढ़ राज्य में जाकर नक्सली क्षेत्रों में बेटियों को सशक्त बनाने का काम किया। इसके लिए उन्हें कई बार सम्मानित भी किया गया।
महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में जुटीं रीना
समाज सेवा के लिए जिले में रीना पांडेय ने अपनी अलग ही पहचान बनाई है। उन्होंने साल 2009 में अपेक्षा महिला एवं बाल विकास समिति नाम की संस्था बनाई। इस संस्था के जरिये महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ते हुए स्वावलंबन की राह दिखा रही है। रीना पांडेय ने बताया कि समाज सेवा की यह प्रेरणा उन्हें मां से मिली थी। उन्होंने बताया कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें आर्थिक तौर पर मजबूत करना होगा।
इसके लिए उन्होंने स्वरोजगार पर काम करने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि कुटीर उद्योग से लेकर छोटे-छोटे व्यवसायों से महिलाओं को जोड़ने के लिए उन्होंने गांव-गांव पहल की। सब्जी, मशरूम, सिलाई, बुनाई, दुकान, मार्केटिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण समेत तमाम कार्यों से जोड़ा। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाते हुए बजट का भी इंतजाम कराया। पिछले 17 साल से जारी इस प्रयास से जिले की चार हजार महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जा चुका है।

फोटो-24- सीमा सेंगर। संवाद

फोटो-24- सीमा सेंगर। संवाद

फोटो-24- सीमा सेंगर। संवाद
