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Auraiya News: धीरे-धीरे बढ़ रहा जलप्रवाह, गावों का अफसरों ने लिया जायजा
Fri, 14 Aug 2026 12:13 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Fri, 14 Aug 2026 12:13 AM IST
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यमुना नदी किनारे बसे गांव अस्ता में निरीक्षण करते डीएम व एडीएम। स्रोत:प्रशासन
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औरैया। पिछले कुछ दिनों में यमुना नदी के जलप्रवाह का दायरा धीरे-धीरे बढ़ा है। ऐसे में यमुना नदी किनारे बसे गांवों में संभावित बाढ़ को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। बृहस्पतिवार को बाढ़ संभावित गांवों में अफसर पहुंचे। जहां जरूरी इंतजामों को देखने के साथ सभी विभागों के अफसरों को निर्देश दिए। राहत से लेकर बचाव व मदद से जुड़े हर बिंदु को पुख्ता रखने को कहा गया।
जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने औरैया तहसील के बाढ़ प्रभावित गांव अस्ता का निरीक्षण किया। वहीं अजीतमल में उप जिलाधिकारी निखिल राजपूत ने राजस्व टीम के साथ सिकरोड़ी पुल व गांव के संवेदनशील हिस्सों का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों को बाढ़ के प्रति जागरूक भी किया। वर्तमान में यमुना का जलस्तर बढ़कर 104.250 मीटर पहुंच गया है। यह चेतावनी बिंदु 112 मीटर और खतरे के निशान 113 मीटर से नीचे है। बैराजों से पानी छोड़े जाने पर बाढ़ की स्थिति बन सकती है। प्रशासन ने ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ जरूरी इंतजामों के लिए निरीक्षण शुरू कर दिए हैं।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को नावें, राशन किट, भोजन पैकेट और बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था व 100 प्रतिशत टीकाकरण करने को कहा। स्वास्थ्य टीमों को सर्पदंश उपचार और गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए तैनात रहने के निर्देश दिए गए। उप जिलाधिकारी ने लेखपालों को निरंतर निगरानी रखने को कहा। निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी अविनाश चंद्र मौर्य, उप जिलाधिकारी सदर ब्रह्मानंद और तहसीलदार प्रकाश चौधरी भी मौजूद रहे।
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बाढ़ की आशंका वाले गांव
जिले के कई गांवों में हर साल बाढ़ की आशंका बनी रहती है। इनमें गोहानी कलां, बड़ैरा, फरिहा, बीझलपुर, असेवा, जुहीखा, ततारपुर कलां, क्योंटरा, अस्ता, गूंज, रमपुरा, मिश्रपुर, सिखरना, असेवटा, भूरेपुर कलां और बबाइन शामिल हैं। ये सभी गांव यमुना नदी के किनारे बसे हैं। इन गांवों में पानी घुसने का खतरा रहता है। प्रशासन इन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरत रहा है।
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25 गांवों की फसलों में नुकसान की बनी रहती आशंका
हर साल बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी से जिले में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ता है। इसके चलते कुछ गांवों में जहां पानी घुस जाता है। वहीं, यमुना नदी से सटे औरैया व अजीतमल तहसील क्षेत्र के कई गांवों की फसलें डूब जाती हैं। बाढ़ का पानी अपने पीछे तबाही का मंजर छोड़ जाता है। फसलें जहां चौपट हो जाती है। वहीं, लोगों के मकान गिरने और रोगों के फैलने के खतरे से निपटना पड़ता है। हालांकि इसके लिए प्रशासन स्तर से जरूरी प्रबंध भी किए जाते हैं।
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जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने औरैया तहसील के बाढ़ प्रभावित गांव अस्ता का निरीक्षण किया। वहीं अजीतमल में उप जिलाधिकारी निखिल राजपूत ने राजस्व टीम के साथ सिकरोड़ी पुल व गांव के संवेदनशील हिस्सों का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों को बाढ़ के प्रति जागरूक भी किया। वर्तमान में यमुना का जलस्तर बढ़कर 104.250 मीटर पहुंच गया है। यह चेतावनी बिंदु 112 मीटर और खतरे के निशान 113 मीटर से नीचे है। बैराजों से पानी छोड़े जाने पर बाढ़ की स्थिति बन सकती है। प्रशासन ने ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ जरूरी इंतजामों के लिए निरीक्षण शुरू कर दिए हैं।
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जिलाधिकारी ने अधिकारियों को नावें, राशन किट, भोजन पैकेट और बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था व 100 प्रतिशत टीकाकरण करने को कहा। स्वास्थ्य टीमों को सर्पदंश उपचार और गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए तैनात रहने के निर्देश दिए गए। उप जिलाधिकारी ने लेखपालों को निरंतर निगरानी रखने को कहा। निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी अविनाश चंद्र मौर्य, उप जिलाधिकारी सदर ब्रह्मानंद और तहसीलदार प्रकाश चौधरी भी मौजूद रहे।
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बाढ़ की आशंका वाले गांव
जिले के कई गांवों में हर साल बाढ़ की आशंका बनी रहती है। इनमें गोहानी कलां, बड़ैरा, फरिहा, बीझलपुर, असेवा, जुहीखा, ततारपुर कलां, क्योंटरा, अस्ता, गूंज, रमपुरा, मिश्रपुर, सिखरना, असेवटा, भूरेपुर कलां और बबाइन शामिल हैं। ये सभी गांव यमुना नदी के किनारे बसे हैं। इन गांवों में पानी घुसने का खतरा रहता है। प्रशासन इन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरत रहा है।
25 गांवों की फसलों में नुकसान की बनी रहती आशंका
हर साल बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी से जिले में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ता है। इसके चलते कुछ गांवों में जहां पानी घुस जाता है। वहीं, यमुना नदी से सटे औरैया व अजीतमल तहसील क्षेत्र के कई गांवों की फसलें डूब जाती हैं। बाढ़ का पानी अपने पीछे तबाही का मंजर छोड़ जाता है। फसलें जहां चौपट हो जाती है। वहीं, लोगों के मकान गिरने और रोगों के फैलने के खतरे से निपटना पड़ता है। हालांकि इसके लिए प्रशासन स्तर से जरूरी प्रबंध भी किए जाते हैं।

यमुना नदी किनारे बसे गांव अस्ता में निरीक्षण करते डीएम व एडीएम। स्रोत:प्रशासन