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Azamgarh News: तमसा नदी में 17 नालों से प्रतिदिन गिर रहा 1.90 करोड़ लीटर सीवेज
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42 करोड़ की लागत से बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को जल निगम ने एक साल पहले ही नगर पालिका को हैंडओवर कर दिया, लेकिन एसटीपी अभी तक पूरी क्षमता से नहीं चल पाई।
आठ एमएलडी की एसटीपी में रोजाना 5.6 एमएलडी पानी ही शोधित हो पा रहा है, जबकि नालों के माध्यम से एक करोड़ 90 लाख लीटर सीवेज तमसा नदी में गिर रहा है। इस पर नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान नहीं है।
शहर तीन तरफ से तमसा नदी से घिरा हुआ है। जल निगम के सर्वे के अनुसार 17 नालों के माध्यम से नदी में प्रतिदिन 19 एमएलडी यानी एक करोड़ 90 लाख लीटर सीवेज गिरता है।
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शहर से निकलने वाले सीवेज को शोधित कर नदी में छोड़ने के लिए आठ एमएलडी की एसटीपी बनाई गई है। इसके हैंडओवर हुए एक साल बीत गया, लेकिन अभी भी एसटीपी पूरी क्षमता से नहीं चल पाई है। यही नहीं, इस एसटीपी से 17 में से एक भी नाले को नहीं जोड़ा गया है।
सीवर लाइन से नालों को न जोड़े जाने के कारण उनका सीवेज तमसा में ही गिर रहा है। इससे तमसा का पानी गंदा हो रहा है। नगर पालिका की जलकल जेई निधि राय ने बताया कि लगभग 2400 घरों की नालियों को चैंबर बनाकर सीवर से जोड़ दिया गया है। प्रतिदिन करीब 5.6 एमएलडी सीवेज शोधित हो रहा है।
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कई क्षेत्रों में नहीं बिछाई गई सीवर लाइन
शहर के लगभग 65 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में सीवर लाइन नहीं बिछाई गई है। इसमें शहर का प्रमुख मुहल्ला सिविल लाइन और हरबंशपुर भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में डीएम, एसपी सहित अन्य अधिकारियों के कार्यालय और आवास हैं। इसके अलावा सिधारी, रैदोपुर, नरौली, सर्फुद्दीनपुर, मड़या आदि मुहल्लों का भी सीवेज नालों के माध्यम से तमसा नदी में गिर रहा है।
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लग चुका है 39.95 करोड़ का जुर्माना
शहर से निकलने वाले सीवेज को बिना शोधित किए तमसा नदी में गिराए जाने के मामले में सितंबर 2024 में नगर पालिका पर 39.95 करोड़ का जुर्माना लग चुका है। यह जुर्माना एनजीटी की जांच के बाद उसके निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लगाया था। पहले एनजीटी के निर्देश पर बोर्ड ने नगर पालिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया था कि उसके द्वारा बिना नालों को टैप किए ही नदी में दूषित पानी छोड़ा जा रहा है। इस पर नगर पालिका ने जवाब दिया था कि उसके द्वारा नालों पर जाली लगवा दी गई है और बायोरेमेडिएशन का कार्य कराया जा रहा है, लेकिन नगर पालिका का उत्तर संतोषजनक न मिलने पर बोर्ड ने जुर्माना लगाया।
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नगर पालिका को तीन जोन में बांटा गया है। एक जोन में आठ एमएलडी की एसटीपी बन गई है। इससे नालों को नहीं जोड़ा गया है। लगभग 2400 घरों की नालियों को चैंबर बनाकर जोड़ा गया है। इस समय प्रतिदिन लगभग 5.6 एमएलडी पानी शोधित हो रहा है। दो जोनों में एसटीपी बनाने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। -निधि राय, अवर अभियंता, नगर पालिका
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आठ एमएलडी की एसटीपी में रोजाना 5.6 एमएलडी पानी ही शोधित हो पा रहा है, जबकि नालों के माध्यम से एक करोड़ 90 लाख लीटर सीवेज तमसा नदी में गिर रहा है। इस पर नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान नहीं है।
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शहर तीन तरफ से तमसा नदी से घिरा हुआ है। जल निगम के सर्वे के अनुसार 17 नालों के माध्यम से नदी में प्रतिदिन 19 एमएलडी यानी एक करोड़ 90 लाख लीटर सीवेज गिरता है।
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शहर से निकलने वाले सीवेज को शोधित कर नदी में छोड़ने के लिए आठ एमएलडी की एसटीपी बनाई गई है। इसके हैंडओवर हुए एक साल बीत गया, लेकिन अभी भी एसटीपी पूरी क्षमता से नहीं चल पाई है। यही नहीं, इस एसटीपी से 17 में से एक भी नाले को नहीं जोड़ा गया है।
सीवर लाइन से नालों को न जोड़े जाने के कारण उनका सीवेज तमसा में ही गिर रहा है। इससे तमसा का पानी गंदा हो रहा है। नगर पालिका की जलकल जेई निधि राय ने बताया कि लगभग 2400 घरों की नालियों को चैंबर बनाकर सीवर से जोड़ दिया गया है। प्रतिदिन करीब 5.6 एमएलडी सीवेज शोधित हो रहा है।
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कई क्षेत्रों में नहीं बिछाई गई सीवर लाइन
शहर के लगभग 65 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में सीवर लाइन नहीं बिछाई गई है। इसमें शहर का प्रमुख मुहल्ला सिविल लाइन और हरबंशपुर भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में डीएम, एसपी सहित अन्य अधिकारियों के कार्यालय और आवास हैं। इसके अलावा सिधारी, रैदोपुर, नरौली, सर्फुद्दीनपुर, मड़या आदि मुहल्लों का भी सीवेज नालों के माध्यम से तमसा नदी में गिर रहा है।
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लग चुका है 39.95 करोड़ का जुर्माना
शहर से निकलने वाले सीवेज को बिना शोधित किए तमसा नदी में गिराए जाने के मामले में सितंबर 2024 में नगर पालिका पर 39.95 करोड़ का जुर्माना लग चुका है। यह जुर्माना एनजीटी की जांच के बाद उसके निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लगाया था। पहले एनजीटी के निर्देश पर बोर्ड ने नगर पालिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया था कि उसके द्वारा बिना नालों को टैप किए ही नदी में दूषित पानी छोड़ा जा रहा है। इस पर नगर पालिका ने जवाब दिया था कि उसके द्वारा नालों पर जाली लगवा दी गई है और बायोरेमेडिएशन का कार्य कराया जा रहा है, लेकिन नगर पालिका का उत्तर संतोषजनक न मिलने पर बोर्ड ने जुर्माना लगाया।
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नगर पालिका को तीन जोन में बांटा गया है। एक जोन में आठ एमएलडी की एसटीपी बन गई है। इससे नालों को नहीं जोड़ा गया है। लगभग 2400 घरों की नालियों को चैंबर बनाकर जोड़ा गया है। इस समय प्रतिदिन लगभग 5.6 एमएलडी पानी शोधित हो रहा है। दो जोनों में एसटीपी बनाने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। -निधि राय, अवर अभियंता, नगर पालिका