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Azamgarh News: 50 से कम पशुओं वाली आजमगढ़ मंडल की 40 गोशालाएं होंगी बंद
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संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। आजमगढ़ मंडल में संचालित 50 से कम गोवंश वाली 40 गोशालाओं को बंद करने का निर्णय लिया गया है।
इन गोशालाओं में मौजूद गोवंशों को निकट के स्थाई व अस्थाई गोशालाओं में स्थानांतरित किया जाएगा। इस कदम से सरकार को प्रतिमाह 10 से 15 लाख रुपये प्रतिमाह की बचत होगी।
शासन के आदेश के बाद पशुपालन विभाग ने सभी गोशालाओं की गहनता से निरीक्षण किया था।
निरीक्षण में पाया गया कि आजमगढ़ मंडल के तीनों जिलों में पाया गया कि 40 ऐसी गोशालाएं हैं, जहां गोवंशों की संख्या 50 से कम है। इन गोशालाओं के संचालन में अनावश्यक रूप से व्यय हो रहा है, जिसमें कर्मचारियों का मानदेय, खाने-पीने की व्यवस्था और अन्य रखरखाव के आदि शामिल है।
शासन की तरफ से कुछ दिन पूर्व यह निर्देश दिए गए थे कि जिन गोशालाओं में गोवंशाें की संख्या न्यूनतम मानक से कम है, उसे बंद कर वहां के पशुओं को अगल-बगल की गोशालाओं में भेजा जाए। इसको लेकर जब पशुपालन विभाग की तरफ से जिलावार जांच की गई तो 40 गोशालाएं ऐसी निकलीं। विभाग का मानना है कि इससे न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि सरकार के खजाने पर भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
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प्रति गोशाला पशुओं के भोजन और पानी के अतिरिक्त केयरटेकर आदि कर्मचारियों के मानदेय और अन्य खर्चों के मदों में ग्राम पंचायतों की ओर से प्रतिमाह से 20 से 25 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा था।
100 से कम गोवंश वाली गोशाला भी होगी शिफ्ट : पहले चरण में 50 गोवंश से कम वाली गोशाला को इसमें शामिल कर रहे हैं।
पहले इन्हें शिफ्ट करने के बाद 100 गोवंश से कम वाली गोशालाओं को भी अगल-बगल की गोशालाओं में मर्ज किया जाएगा। इसके लिए निकटवर्ती गोशालाओं में सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।
आजमगढ़। आजमगढ़ मंडल में संचालित 50 से कम गोवंश वाली 40 गोशालाओं को बंद करने का निर्णय लिया गया है।
इन गोशालाओं में मौजूद गोवंशों को निकट के स्थाई व अस्थाई गोशालाओं में स्थानांतरित किया जाएगा। इस कदम से सरकार को प्रतिमाह 10 से 15 लाख रुपये प्रतिमाह की बचत होगी।
शासन के आदेश के बाद पशुपालन विभाग ने सभी गोशालाओं की गहनता से निरीक्षण किया था।
निरीक्षण में पाया गया कि आजमगढ़ मंडल के तीनों जिलों में पाया गया कि 40 ऐसी गोशालाएं हैं, जहां गोवंशों की संख्या 50 से कम है। इन गोशालाओं के संचालन में अनावश्यक रूप से व्यय हो रहा है, जिसमें कर्मचारियों का मानदेय, खाने-पीने की व्यवस्था और अन्य रखरखाव के आदि शामिल है।
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शासन की तरफ से कुछ दिन पूर्व यह निर्देश दिए गए थे कि जिन गोशालाओं में गोवंशाें की संख्या न्यूनतम मानक से कम है, उसे बंद कर वहां के पशुओं को अगल-बगल की गोशालाओं में भेजा जाए। इसको लेकर जब पशुपालन विभाग की तरफ से जिलावार जांच की गई तो 40 गोशालाएं ऐसी निकलीं। विभाग का मानना है कि इससे न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि सरकार के खजाने पर भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
प्रति गोशाला पशुओं के भोजन और पानी के अतिरिक्त केयरटेकर आदि कर्मचारियों के मानदेय और अन्य खर्चों के मदों में ग्राम पंचायतों की ओर से प्रतिमाह से 20 से 25 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा था।
100 से कम गोवंश वाली गोशाला भी होगी शिफ्ट : पहले चरण में 50 गोवंश से कम वाली गोशाला को इसमें शामिल कर रहे हैं।
पहले इन्हें शिफ्ट करने के बाद 100 गोवंश से कम वाली गोशालाओं को भी अगल-बगल की गोशालाओं में मर्ज किया जाएगा। इसके लिए निकटवर्ती गोशालाओं में सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।