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Azamgarh News: जन्म-मृत्यु पंजीकरण में देरी अब पड़ेगी महंगी, विलंब शुल्क में दस गुना तक बढ़ोतरी
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आजमगढ़। जन्म और मृत्यु पंजीकरण को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 की नियमावली में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर पंजीकरण न कराने पर लोगों को पहले की तुलना में कई गुना अधिक विलंब शुल्क देना होगा। संशोधित नियमों के अनुसार अब जन्म या मृत्यु की घटना के 21 दिन बाद पंजीकरण कराने पर दो रुपये के बजाय 20 रुपये विलंब शुल्क देना होगा। इसी तरह 30 दिन से लेकर एक वर्ष के भीतर पंजीकरण कराने पर पहले जहां पांच रुपये शुल्क लिया जाता था, अब इसके लिए 50 रुपये जमा करने होंगे। वहीं एक वर्ष से अधिक समय बाद पंजीकरण कराने वालों को दस रुपये के स्थान पर 100 रुपये विलंब शुल्क देना पड़ेगा। ईओ ने बताया कि इस बदलाव का उद्देश्य लोगों को जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समय पर कराने के लिए प्रोत्साहित करना है। समय से पंजीकरण होने पर सरकारी अभिलेखों की शुद्धता बढ़ेगी, योजनाओं के लाभार्थियों का सही आंकलन हो सकेगा तथा जनसंख्या संबंधी आंकड़ों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। ईओ नगर पालिका प्रशांत कुमार ने लोगों से अपील की है कि जन्म या मृत्यु होने पर निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित कार्यालय में पंजीकरण कराएं, ताकि अतिरिक्त शुल्क के साथ-साथ अनावश्यक प्रक्रियाओं से भी बचा जा सके। नई व्यवस्था लागू होने के बाद विलंब से पंजीकरण कराने वालों को बढ़े हुए शुल्क का भुगतान करना होगा।
समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देने की कोशिश :
सरकार ने यह संशोधन लोगों को समय पर पंजीकरण के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से किया है। नए नियमों के अनुसार जन्म या मृत्यु होने के 21 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। इसके बाद निर्धारित विलंब शुल्क लागू होगा। अधिकांश लोग लापरवाही या जागरूकता की कमी के कारण समय पर आवेदन नहीं करते। परिणामस्वरूप कई मामलों में वर्षों बाद प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किए जाते हैं, जिससे रिकॉर्ड सत्यापन और दस्तावेज प्रक्रिया जटिल हो जाती है। न व्यवस्था से इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
इनकी है जन्म-मृत्यु पंजीकरण की जिम्मेदारी : जन्म और मृत्यु पंजीकरण की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों पर है। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों और स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से पंजीकरण कराया जाता है, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगर पालिका एवं नगर पंचायतें यह कार्य करती हैं। संबंधित विभागों का दायित्व है कि क्षेत्र में होने वाले प्रत्येक जन्म और मृत्यु का समय पर रिकॉर्ड तैयार किया जाए तथा नागरिकों को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाए। जन्म और मृत्यु का पंजीकरण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के कानूनी और प्रशासनिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है। जन्म प्रमाणपत्र शिक्षा, पासपोर्ट, आधार कार्ड, सरकारी योजनाओं और रोजगार से संबंधित कई कार्यों में आवश्यक होता है। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र संपत्ति हस्तांतरण, बीमा दावों, बैंक खातों और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य माना जाता है।
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30 प्रतिशत लोग ही समय पर करा रहे पंजीकरण : नगर पालिका आजमगढ़ के आंकड़े बताते हैं कि बच्चे के जन्म के 21 दिन के भीतर जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वालों का प्रतिशत केवल 13 के आसपास है। करीब 30 प्रतिशत लोग ही बच्चे के जन्म के एक वर्ष के भीतर प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन करते हैं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि 50 प्रतिशत से अधिक लोग एक वर्ष या उससे भी अधिक समय बीत जाने के बाद जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पहुंचते हैं। अधिकारियों के अनुसार देरी से आवेदन करने के कारण कई बार अभिलेखों की जांच में अतिरिक्त समय लगता है और नागरिकों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन और रिकॉर्ड मिलान करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रत्येक नागरिक के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है। शासन द्वारा नियमों में संशोधन कर विलंब शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य लोगों को समय पर पंजीकरण के लिए प्रेरित करना है। समयबद्ध पंजीकरण से सरकारी अभिलेख अद्यतन रहते हैं और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सुविधा होती है। नागरिकों को चाहिए कि जन्म या मृत्यु की घटना होने पर निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित कार्यालय में आवेदन कर पंजीकरण कराएं, ताकि उन्हें अतिरिक्त शुल्क का भुगतान न करना पड़े। नगर पालिका प्रशासन आमजन को बेहतर और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।- प्रशांत कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद।
समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देने की कोशिश :
सरकार ने यह संशोधन लोगों को समय पर पंजीकरण के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से किया है। नए नियमों के अनुसार जन्म या मृत्यु होने के 21 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। इसके बाद निर्धारित विलंब शुल्क लागू होगा। अधिकांश लोग लापरवाही या जागरूकता की कमी के कारण समय पर आवेदन नहीं करते। परिणामस्वरूप कई मामलों में वर्षों बाद प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किए जाते हैं, जिससे रिकॉर्ड सत्यापन और दस्तावेज प्रक्रिया जटिल हो जाती है। न व्यवस्था से इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
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इनकी है जन्म-मृत्यु पंजीकरण की जिम्मेदारी : जन्म और मृत्यु पंजीकरण की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों पर है। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों और स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से पंजीकरण कराया जाता है, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगर पालिका एवं नगर पंचायतें यह कार्य करती हैं। संबंधित विभागों का दायित्व है कि क्षेत्र में होने वाले प्रत्येक जन्म और मृत्यु का समय पर रिकॉर्ड तैयार किया जाए तथा नागरिकों को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाए। जन्म और मृत्यु का पंजीकरण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के कानूनी और प्रशासनिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है। जन्म प्रमाणपत्र शिक्षा, पासपोर्ट, आधार कार्ड, सरकारी योजनाओं और रोजगार से संबंधित कई कार्यों में आवश्यक होता है। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र संपत्ति हस्तांतरण, बीमा दावों, बैंक खातों और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य माना जाता है।
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जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रत्येक नागरिक के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है। शासन द्वारा नियमों में संशोधन कर विलंब शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य लोगों को समय पर पंजीकरण के लिए प्रेरित करना है। समयबद्ध पंजीकरण से सरकारी अभिलेख अद्यतन रहते हैं और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सुविधा होती है। नागरिकों को चाहिए कि जन्म या मृत्यु की घटना होने पर निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित कार्यालय में आवेदन कर पंजीकरण कराएं, ताकि उन्हें अतिरिक्त शुल्क का भुगतान न करना पड़े। नगर पालिका प्रशासन आमजन को बेहतर और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।- प्रशांत कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद।