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Azamgarh News: संशो... टेंडर घोटाले में जिला पंचायत अध्यक्ष को नोटिस
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आजमगढ़। जिला पंचायत अध्यक्ष विजय यादव की कुर्सी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। लालगंज के भाजपा निवर्तमान जिलाध्यक्ष सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने रविवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष पर टेंडर घोटाले के आरोपों का शासन संज्ञान ले लिया है। राज्यपाल के निर्देश पर प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने जिला पंचायत अध्यक्ष को नोटिस जारी कर 30 दिन के भीतर जवाब मांगा है। कहा कि स्पष्टीकरण न देने पर अधिनियम 1961 की धारा 29 के तहत अध्यक्ष को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
सिविल लाइन स्थित कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्रकाशित किए गए कुछ टेंडर ऐसे कार्यों के थे, जिनका निर्माण पूर्व में ही किसी अन्य कार्यदायी संस्था या स्वयं जिला पंचायत द्वारा कराया जा चुका था। इस मामले की जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर जिला विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह और मुख्य कोषाधिकारी अनुराग श्रीवास्तव के नेतृत्व में नौ सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने आठ कार्यों की जांच की, जिसमें से सात कार्यों में पूर्व में निर्माण होने की शिकायत सही पाई गई।
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी, जिसे जिलाधिकारी द्वारा शासन को भेज दिया गया। इसके बाद पंचायती राज समिति, विधान परिषद उत्तर प्रदेश में सदस्य विधान परिषद एवं भाजपा प्रदेश महामंत्री अनूप गुप्ता द्वारा इस प्रकरण को उठाया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने दावा किया कि लंबी लड़ाई के बाद इस प्रकरण में बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजमगढ़ का जिला पंचायत विभाग भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ है। पूर्व की जिला स्तरीय जांच में अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत विद्या शंकर पांडेय, प्रभारी अभियंता रविंद्र यादव और अवर अभियंता गणेश पाल को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निलंबित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष भी इस पूरे मामले में बराबर के दोषी पाए गए हैं।
अनूप गुप्ता द्वारा पंचायती राज समिति, विधान परिषद में मामला उठाए जाने के बाद प्रमुख सचिव की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि दो वर्ष पूर्व जिला पंचायत आजमगढ़ में पहले से कराए जा चुके कार्यों के लिए अपने ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से दोबारा टेंडर निकाले गए थे। नौ अधिकारियों की जांच में पाया गया कि सात सड़कें टेंडर प्रक्रिया से पहले ही बनी हुई थीं। इस मामले में 1 करोड़ 27 लाख 78 हजार रुपये के भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था।
सूरज ने बताया कि राज्यपाल की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों का सही तरीके से संपादन नहीं किया गया तथा स्वयं को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से उनका दुरुपयोग किया गया। साथ ही यह भी पाया गया कि जिला पंचायत अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ रही है। इस मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष विजय यादव को प्रथम दृष्टया उत्तरदायी माना गया है। उन्होंने कहा कि यदि जिला पंचायत अध्यक्ष 30 दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण शासन को नहीं देते हैं, तो उनकी वित्तीय शक्तियों पर रोक लगाते हुए पद से हटाया जा सकता है। साथ ही जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 29 के अंतर्गत उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन वर्षों तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाई जा सकती है।
एक हफ्ते पहले शासन से पत्र आया था। जिला पंचायत अध्यक्ष को पत्र रिसीव करा दिया गया है। रिसीविंग लेटर शासन को भेज दिया गया है। - परीक्षित खटाना, प्रभारी जिलाधिकारी
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सिविल लाइन स्थित कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्रकाशित किए गए कुछ टेंडर ऐसे कार्यों के थे, जिनका निर्माण पूर्व में ही किसी अन्य कार्यदायी संस्था या स्वयं जिला पंचायत द्वारा कराया जा चुका था। इस मामले की जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर जिला विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह और मुख्य कोषाधिकारी अनुराग श्रीवास्तव के नेतृत्व में नौ सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने आठ कार्यों की जांच की, जिसमें से सात कार्यों में पूर्व में निर्माण होने की शिकायत सही पाई गई।
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जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी, जिसे जिलाधिकारी द्वारा शासन को भेज दिया गया। इसके बाद पंचायती राज समिति, विधान परिषद उत्तर प्रदेश में सदस्य विधान परिषद एवं भाजपा प्रदेश महामंत्री अनूप गुप्ता द्वारा इस प्रकरण को उठाया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने दावा किया कि लंबी लड़ाई के बाद इस प्रकरण में बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजमगढ़ का जिला पंचायत विभाग भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ है। पूर्व की जिला स्तरीय जांच में अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत विद्या शंकर पांडेय, प्रभारी अभियंता रविंद्र यादव और अवर अभियंता गणेश पाल को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निलंबित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष भी इस पूरे मामले में बराबर के दोषी पाए गए हैं।
अनूप गुप्ता द्वारा पंचायती राज समिति, विधान परिषद में मामला उठाए जाने के बाद प्रमुख सचिव की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि दो वर्ष पूर्व जिला पंचायत आजमगढ़ में पहले से कराए जा चुके कार्यों के लिए अपने ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से दोबारा टेंडर निकाले गए थे। नौ अधिकारियों की जांच में पाया गया कि सात सड़कें टेंडर प्रक्रिया से पहले ही बनी हुई थीं। इस मामले में 1 करोड़ 27 लाख 78 हजार रुपये के भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था।
सूरज ने बताया कि राज्यपाल की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों का सही तरीके से संपादन नहीं किया गया तथा स्वयं को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से उनका दुरुपयोग किया गया। साथ ही यह भी पाया गया कि जिला पंचायत अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ रही है। इस मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष विजय यादव को प्रथम दृष्टया उत्तरदायी माना गया है। उन्होंने कहा कि यदि जिला पंचायत अध्यक्ष 30 दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण शासन को नहीं देते हैं, तो उनकी वित्तीय शक्तियों पर रोक लगाते हुए पद से हटाया जा सकता है। साथ ही जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 29 के अंतर्गत उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन वर्षों तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाई जा सकती है।
एक हफ्ते पहले शासन से पत्र आया था। जिला पंचायत अध्यक्ष को पत्र रिसीव करा दिया गया है। रिसीविंग लेटर शासन को भेज दिया गया है। - परीक्षित खटाना, प्रभारी जिलाधिकारी
