मेजवां। फूलपुर क्षेत्र के मुंडियार स्थित सिद्धपीठ श्री बाबा मुंडेश्वर नाथ मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार की रात प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। कथावाचक गंगोत्री महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, उनकी बाल लीलाओं तथा कंस के अत्याचारों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बहन देवकी के विवाह के समय आकाशवाणी हुई थी कि उनकी आठवीं संतान ही कंस के वध का कारण बनेगी। यह सुनकर कंस क्रोधित हो उठा और देवकी का वध करने के लिए तैयार हो गया। तब वासुदेव ने उसे वचन दिया कि देवकी से जन्म लेने वाली प्रत्येक संतान को वे स्वयं उसके हवाले कर देंगे। कथावाचक ने कहा कि इस वचन के बाद कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया तथा उनके छह पुत्रों का निर्ममता से वध कर दिया। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने कारागार में जन्म लिया।
भगवान की कृपा से जेल के सभी बंधन स्वतः खुल गए और वासुदेव नवजात श्रीकृष्ण को लेकर यमुना पार करते हुए गोकुल पहुंचे। वहां उन्होंने नंद बाबा और माता यशोदा के यहां जन्मी कन्या को लेकर पुनः मथुरा लौट आए। गंगोत्री महाराज ने माखन चोरी, गोपियों के साथ रासलीला तथा गोवर्धन पर्वत धारण जैसी भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया। कार्यक्रम में आयोजक अनिल महाराज, योगेश, सुरेश कुमार मौर्य सहित आसपास के गांवों के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।