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Azamgarh News: सरकारी और निजी संस्थान के अधिकारियों का फर्जी आदेश पत्र बनाकर नौकरी दिलाने का देते थे झांसा, 3 गिरफ्तार
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नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरफ्तार अंतरजनपदीय गिरोह के तीन सदस्य। संवाद
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आजमगढ़। रानी की सराय पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर 100 से ज्यादा लोगों से ठगी करने वाले अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों बिहार के मधुबनी जिले के बासोपट्टी थाना क्षेत्र के सेलीबेली गांव निवासी लालू उर्फ राकेश कुमार, बलिया जिले के रसड़ा थाना क्षेत्र के डेहरी गांव निवासी दिनेश कुमार गुप्ता और मंदा गांव निवासी धर्मेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य फर्जी पुलिस सत्यापन रिपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और विभिन्न सरकारी और निजी संस्थान के कार्यालयों के कूटरचित दस्तावेज और अधिकारियों के आदेश पत्र तैयार करके सरकारी और निजी संस्थानों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलते थे।
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि रविवार की रात में प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार क्षेत्र में टीम के साथ गश्त कर रहे थे। मोबाइल लोकेशन के आधार पर आजमगढ़-वाराणसी मुख्य मार्ग स्थित कोटिला कट के पास एक ब्रेजा कार से तीन संदिग्धों को पुलिस ने पकड़ा। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करते हैं। एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि मामले की शुरुआत 20 मई 2026 को हुई थी। रानी की सराय थाना क्षेत्र के अंधौरी गांव निवासी पंकज यादव ने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में थाना रानी की सराय में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचना के दौरान तीनों आरोपियों के नाम सामने आए। जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को नौकरी दिलाने वाला एजेंट बताकर बेरोजगार युवाओं से संपर्क करते थे।
आरोपियों के पास से बरामद हुए ये सामान
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, दो सिम, 11 मुहरें, इंकपैड, स्टेपलर, आधार कार्ड, पुलिस वेरिफिकेशन प्रोफॉर्मा, प्रमाणित पुलिस सत्यापन रिपोर्ट, आधार व पैन कार्ड की प्रतियां, जन्म प्रमाण पत्र की प्रतियां, नागालैंड के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय का प्रोफॉर्मा, प्रमाणित दस्तावेज, एक लिफाफा, कार, रेलवे पहचान पत्र और 5,360 नकद बरामद किए हैं। मामले में अब तक 12 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अभी भी इस मामले में 50-50 हजार के मुख्य आरोपी विद्यासागर निवासी कोईलारी खुर्द और वीरेंद्र यादव की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। जिनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
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कोई इंटर तो कोई पांचवीं पास, ठगी का खड़ा कर लिया नेटवर्क
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के गिरफ्तार आरोपियों की शैक्षिक योग्यता चौंकाने वाली है। पुलिस की जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी लालू उर्फ राकेश कुमार निवासी सेलीबेली बासोपट्टी जिला मधुबनी (बिहार), धर्मेंद्र गुप्ता निवासी ग्राम मंदा, जिला बलिया इंटर पास हैं। तीसरा आरोपी दिनेश कुमार गुप्ता निवासी डेहरी रसड़ा, जिला बलिया कक्षा पांच पास है। कम शैक्षिक योग्यता होने के बावजूद तीनों आरोपियों ने फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करने और बेरोजगार युवाओं को सरकारी एवं निजी संस्थानों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी का सुनियोजित नेटवर्क खड़ा कर लिया था।
जांच के लिए 11 सदस्यीय एसआईटी गठित
नौकरी के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार करके ठगी करने वाले गिरोह की जांच के लिए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में 11 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है। उन्होंने बताया कि एसआईटी में साइबर सेल, एसओजी, स्थानीय पुलिस के साथ अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। टीम गिरोह के पूरे नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों, आर्थिक लेन-देन और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच करेगी।
100 से ज्यादा लोगों की जा चुकी है नौकरी
फर्जी नियुक्ति और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने के मामलों में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं। विभागीय जांच में नियुक्तियों में अनियमितता और दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद संबंधित कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी भी जारी है और जिन मामलों में फर्जीवाड़ा या कूटरचना की पुष्टि होगी, उनमें नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
28 राज्यों तक फैला है ठगी का नेटवर्क
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि पुलिस की जांच में सामने आया है कि नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का नेटवर्क देश के 28 राज्यों तक फैला है।
गिरफ्तार आरोपी सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार करके बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करते थे। इनके कब्जे से बड़ी मात्रा में कूटरचित दस्तावेज और उन्हें तैयार करने में प्रयुक्त सामग्री बरामद हुई है। गिरोह के नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है। जांच के आधार पर आगे भी गिरफ्तारी और विधिक कार्रवाई की जाएगी।
- चिराग जैन, एसपी ग्रामीण आजमगढ़।
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एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि रविवार की रात में प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार क्षेत्र में टीम के साथ गश्त कर रहे थे। मोबाइल लोकेशन के आधार पर आजमगढ़-वाराणसी मुख्य मार्ग स्थित कोटिला कट के पास एक ब्रेजा कार से तीन संदिग्धों को पुलिस ने पकड़ा। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करते हैं। एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि मामले की शुरुआत 20 मई 2026 को हुई थी। रानी की सराय थाना क्षेत्र के अंधौरी गांव निवासी पंकज यादव ने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में थाना रानी की सराय में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचना के दौरान तीनों आरोपियों के नाम सामने आए। जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को नौकरी दिलाने वाला एजेंट बताकर बेरोजगार युवाओं से संपर्क करते थे।
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आरोपियों के पास से बरामद हुए ये सामान
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, दो सिम, 11 मुहरें, इंकपैड, स्टेपलर, आधार कार्ड, पुलिस वेरिफिकेशन प्रोफॉर्मा, प्रमाणित पुलिस सत्यापन रिपोर्ट, आधार व पैन कार्ड की प्रतियां, जन्म प्रमाण पत्र की प्रतियां, नागालैंड के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय का प्रोफॉर्मा, प्रमाणित दस्तावेज, एक लिफाफा, कार, रेलवे पहचान पत्र और 5,360 नकद बरामद किए हैं। मामले में अब तक 12 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अभी भी इस मामले में 50-50 हजार के मुख्य आरोपी विद्यासागर निवासी कोईलारी खुर्द और वीरेंद्र यादव की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। जिनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
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कोई इंटर तो कोई पांचवीं पास, ठगी का खड़ा कर लिया नेटवर्क
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के गिरफ्तार आरोपियों की शैक्षिक योग्यता चौंकाने वाली है। पुलिस की जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी लालू उर्फ राकेश कुमार निवासी सेलीबेली बासोपट्टी जिला मधुबनी (बिहार), धर्मेंद्र गुप्ता निवासी ग्राम मंदा, जिला बलिया इंटर पास हैं। तीसरा आरोपी दिनेश कुमार गुप्ता निवासी डेहरी रसड़ा, जिला बलिया कक्षा पांच पास है। कम शैक्षिक योग्यता होने के बावजूद तीनों आरोपियों ने फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करने और बेरोजगार युवाओं को सरकारी एवं निजी संस्थानों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी का सुनियोजित नेटवर्क खड़ा कर लिया था।
जांच के लिए 11 सदस्यीय एसआईटी गठित
नौकरी के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार करके ठगी करने वाले गिरोह की जांच के लिए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में 11 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है। उन्होंने बताया कि एसआईटी में साइबर सेल, एसओजी, स्थानीय पुलिस के साथ अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। टीम गिरोह के पूरे नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों, आर्थिक लेन-देन और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच करेगी।
100 से ज्यादा लोगों की जा चुकी है नौकरी
फर्जी नियुक्ति और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने के मामलों में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं। विभागीय जांच में नियुक्तियों में अनियमितता और दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद संबंधित कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी भी जारी है और जिन मामलों में फर्जीवाड़ा या कूटरचना की पुष्टि होगी, उनमें नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
28 राज्यों तक फैला है ठगी का नेटवर्क
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि पुलिस की जांच में सामने आया है कि नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का नेटवर्क देश के 28 राज्यों तक फैला है।
गिरफ्तार आरोपी सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार करके बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करते थे। इनके कब्जे से बड़ी मात्रा में कूटरचित दस्तावेज और उन्हें तैयार करने में प्रयुक्त सामग्री बरामद हुई है। गिरोह के नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है। जांच के आधार पर आगे भी गिरफ्तारी और विधिक कार्रवाई की जाएगी।
- चिराग जैन, एसपी ग्रामीण आजमगढ़।