Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च से शुरू होंगे चैत्र नवरात्र, डोली में आएंगी माता रानी, जानें शुभ मुहूर्त
बागपत में 19 मार्च से चैत्र नवरात्र शुरू होंगे। इस बार माता रानी डोली पर आएंगी और हाथी पर विदा होंगी। जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
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बागपत में 19 मार्च से चैत्र नवरात्र शुरू होंगे। इस बार माता रानी डोली पर आएंगी और हाथी पर विदा होंगी। जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
बागपत। चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 19 मार्च से होने जा रहा है। इस वर्ष माता रानी का आगमन डोली पर और प्रस्थान हाथी पर होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार डोली पर माता का आगमन शुभ नहीं माना जाता, जिससे देश में अस्थिरता और राजनीति में उथल-पुथल के संकेत मिलते हैं। हालांकि हाथी पर प्रस्थान को शुभ माना गया है, जिससे अच्छी वर्षा और फसलों की बेहतर पैदावार का संकेत मिलता है।
शहर के बाबा जानकीदास मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 53 मिनट तक अमावस्या तिथि रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा तिथि का प्रवेश होगा, जो 20 मार्च को सुबह चार बजकर 53 मिनट तक रहेगी। सूर्योदय के बाद तिथि का प्रवेश और सूर्योदय से पहले समाप्त होने के कारण इसे तिथि का क्षय माना जाता है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 54 मिनट से 7 बजकर 40 मिनट तक तथा 9 बजकर 16 मिनट से 11 बजकर 40 मिनट तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापना कर सकते हैं।
महाष्टमी और रामनवमी की तिथि
नवरात्र के दौरान श्रद्धालु नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं। इस वर्ष 26 मार्च को महाष्टमी और 27 मार्च को रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष देव गुरु बृहस्पति राजा और मंगल मंत्री होने के कारण वर्ष को शुभ माना जा रहा है।
ऐसे करें कलश स्थापना
नवरात्र के पहले दिन सुबह स्नान करने के बाद घर के उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछाएं। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। इसके बाद मिट्टी या तांबे के कलश में जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी और हल्दी की गांठ रखकर उसके कंठ पर कलावा बांधें। कलश के ऊपर नारियल स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाकर भगवान गणेश, वरुण देव और मां दुर्गा का ध्यान कर पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।