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Baghpat News: कांवड़ कंधे पर रखते ही ढह गई मजहबी दीवार
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दोघट। हरिद्वार से गंगाजल लेकर गांगनौली गांव के मुस्लिम युवक कल्लू ने कंधे पर कांवड़ उठाई तो मजहबी दीवार गिर गई। गांव के मंदिर में सोमवार रात को पहुंचे कल्लू को लेने के लिए मंगलवार सुबह हिंदुओं ने जोरदार स्वागत किया। पुष्पवर्षा करते हुए ढोल बजवाकर कल्लू को लोग गांव लेकर आए। महिला भोली ने कांवड़ लेकर आने के बाद की सभी रस्म कराने के बाद कल्लू को घर भेजा।
गांगनौली गांव के रहने वाले कल्लू मजदूरी करते हैं, जो हरिद्वार से 31 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर सोमवार रात को गांव के शिव मंदिर में पहुंचे। गांवों की परंपरा के अनुसार जब कल्लू को कोई लेने के लिए नहीं आया तो वह उदास हो गया। इसका जब गांव के हिंदू परिवारों को पता लगा तो महिला भोली के साथ ही ग्रामीण मंदिर में पहुंचे।
मंदिर में कल्लू ने पहले जलाभिषेक किया और उसके बाद कल्लू को सभी ढोल बजवाते हुए गांव में लेकर आए। महिला भोली उसको अपने घर लेकर गई, जहां गंगाजल से उसे स्नान कराया गया। उसके बाद कांवड़ लेकर आने के बाद होने वाली रस्म कन्याओं को भोजन खिलवाने की कराई गई।
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उसके बाद कल्लू अपने घर पहुंचे और अपनी मां हमीदन व अन्य परिजनों को कांवड़ यात्रा के अनुभवों के बारे में बताया। कल्लू की मां हमीदन ने कहा कि उनका बेटा परिवार की सहमति से कांवड़ लेने गया था। उनको उससे कोई आपत्ति नहीं है। इस तरह गांव में भाईचारे की मिसाल देखने को मिली।
पुलिस को घर में नहीं घुसने देने की सूचना दी
कांवड़ लेकर आने के बाद की सभी रस्म पड़ोसी महिला भोली के घर कराने पर किसी ने पुलिस को सूचना दी कि कल्लू को कांवड़ लाने के कारण परिवार वाले घर में नहीं घुसने दे रहे हैं। इस पर दोघट थाना पुलिस वहां पहुंच गई। एसपी सूरज कुमार राय के अनुसार पुलिस ने पूरी जांच करने के साथ ही सभी के बयान लिए। युवक, उसकी मां ने कांवड़ अपनी मर्जी से लेकर आने और प्यार से साथ रहने की बात बताई। वहीं पड़ोस की महिला भोली ने बताया कि उसने कल्लू की कांवड़ लेकर आने के बाद ही रस्म कराई थी, मगर वह बाद में अपने घर चला गया।
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गांगनौली गांव के रहने वाले कल्लू मजदूरी करते हैं, जो हरिद्वार से 31 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर सोमवार रात को गांव के शिव मंदिर में पहुंचे। गांवों की परंपरा के अनुसार जब कल्लू को कोई लेने के लिए नहीं आया तो वह उदास हो गया। इसका जब गांव के हिंदू परिवारों को पता लगा तो महिला भोली के साथ ही ग्रामीण मंदिर में पहुंचे।
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मंदिर में कल्लू ने पहले जलाभिषेक किया और उसके बाद कल्लू को सभी ढोल बजवाते हुए गांव में लेकर आए। महिला भोली उसको अपने घर लेकर गई, जहां गंगाजल से उसे स्नान कराया गया। उसके बाद कांवड़ लेकर आने के बाद होने वाली रस्म कन्याओं को भोजन खिलवाने की कराई गई।
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उसके बाद कल्लू अपने घर पहुंचे और अपनी मां हमीदन व अन्य परिजनों को कांवड़ यात्रा के अनुभवों के बारे में बताया। कल्लू की मां हमीदन ने कहा कि उनका बेटा परिवार की सहमति से कांवड़ लेने गया था। उनको उससे कोई आपत्ति नहीं है। इस तरह गांव में भाईचारे की मिसाल देखने को मिली।
पुलिस को घर में नहीं घुसने देने की सूचना दी
कांवड़ लेकर आने के बाद की सभी रस्म पड़ोसी महिला भोली के घर कराने पर किसी ने पुलिस को सूचना दी कि कल्लू को कांवड़ लाने के कारण परिवार वाले घर में नहीं घुसने दे रहे हैं। इस पर दोघट थाना पुलिस वहां पहुंच गई। एसपी सूरज कुमार राय के अनुसार पुलिस ने पूरी जांच करने के साथ ही सभी के बयान लिए। युवक, उसकी मां ने कांवड़ अपनी मर्जी से लेकर आने और प्यार से साथ रहने की बात बताई। वहीं पड़ोस की महिला भोली ने बताया कि उसने कल्लू की कांवड़ लेकर आने के बाद ही रस्म कराई थी, मगर वह बाद में अपने घर चला गया।