UP: सात साल से कर रहे थे श्राद्ध, जम्मू-कश्मीर में मिलीं बुजुर्ग, घर पहुंचते ही लगी भीड़, जानें पूरा मामला
11 साल पहले लापता हुईं बुजुर्ग लीलावती शुक्रवार को दौझा गांव स्थित अपने घर लौट आईं। परिवार ने उन्हें मृत मानकर सात साल से श्राद्ध किया था।
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जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में पुलिस को मिलीं बुजुर्ग लीलावती शुक्रवार को दौझा गांव में अपने घर आ गईं। जहां उनके पोते बिल्लू ने बताया कि चार साल तक दादी को तलाश किया, जिनके नहीं मिलने पर मृत मानकर पिछले सात साल से श्राद्ध कर रहे थे। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी दादी जीवित मिल जाएगी। बुजुर्ग लीलावती को जीवित देख परिवार और गांव वाले खुश हैं।
दौझा गांव निवासी बिल्लू ने बताया कि उसकी दादी लीलावती की मानसिक हालत ठीक नहीं हैं, जो 11 साल पहले अचानक लापता हो गई थीं। इसके बाद परिवार वालों ने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद खुद भी तलाश शुरू कर दी थी। परिवार वालों ने चार साल तक दादी लीलावती को दिल्ली, हरियाणा, यूपी के कई जिलों, उत्तराखंड के अलावा अन्य जगहों पर तलाश किया और पोस्टर भी लगाए।
इसके बाद भी दादी का कुछ पता नहीं चला तो परिवार वालों ने उनके जिंदा होने की उम्मीद छोड़ दी। जम्मू कश्मीर के राजोरी जिले की पुलिस ने परिवार वालों को फोन कर दादी लीलावती के जिंदा होने के बारे में बताया तो उन्हें यकीन नहीं हुआ। इसके बाद वीडियो कॉल पर दादी लीलावती को दिखाया तो परिवार के लोग खुशी से झूम उठे। शुक्रवार को लीलावती को उनके बेटे बुद्ध कश्यप व सतीश कश्यप समेत अन्य लोग राजौरी के सुरनकोट से दौझा गांव लेकर पहुंचे।
लीलावती को देखने आए काफी लोग
बुजुर्ग लीलावती के 11 साल बाद जीवित मिलने से ग्रामीण खुश है। इसके चलते शुक्रवार दोपहर बाद जैसे ही लीलावती को लेकर परिवार वाले घर पहुंचे तो वहां पर भीड़ लग गई। लीलावती के परिवार में उनके दो बेटे बुद्ध, सतीश, पुत्रवधू कौशल, सुनीता, बेटी सरला, मुनेश, पोता बिल्लू, शिवम, राहुल, कल्लू, मोनू, जोनी, शिवा, पोती पूनम, रीना, शिवानी, ललिता, पायल, कल्लू, मोनू, जोनी व शिवा समेत अन्य सदस्य हैं।