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भाव ही मनुष्य को बनाते हैं नर से नारायण : अंकित शास्त्री
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- बरनावा के श्रीचंद्र प्रभु जैन मंदिर में दूसरे दिन सिद्धचक्र महामंडल विधान हुआ
फोटो-पांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली। बरनावा के श्रीचंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने पूजा कर भगवान श्रीजी को 16 अर्घ्य समर्पित किए।
मंदिर में पंडित अंकित शास्त्री ने विधि-विधान से भगवान श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजा कराई। पुण्यार्जक का सौभाग्य हंस कुमार जैन, पंकज कुमार जैन, नीरज कुमार जैन को प्राप्त हुआ। पंडित ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में भावों का विशेष महत्व है। मनुष्य के भाव ही उसे नर से नारायण बना देते हैं। जब मनुष्य के भाव परमात्मा, आराध्य इष्ट से जुड़ जाते हैं तो दिव्य अनुराग प्रकट होता है। ऐसा अनुराग जो जन्मों जन्मों तक हमारे साथ रहता है। वह अनुराग जब तक साथ में रहता है, जब तक की व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो जाती।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली। बरनावा के श्रीचंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने पूजा कर भगवान श्रीजी को 16 अर्घ्य समर्पित किए।
मंदिर में पंडित अंकित शास्त्री ने विधि-विधान से भगवान श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजा कराई। पुण्यार्जक का सौभाग्य हंस कुमार जैन, पंकज कुमार जैन, नीरज कुमार जैन को प्राप्त हुआ। पंडित ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में भावों का विशेष महत्व है। मनुष्य के भाव ही उसे नर से नारायण बना देते हैं। जब मनुष्य के भाव परमात्मा, आराध्य इष्ट से जुड़ जाते हैं तो दिव्य अनुराग प्रकट होता है। ऐसा अनुराग जो जन्मों जन्मों तक हमारे साथ रहता है। वह अनुराग जब तक साथ में रहता है, जब तक की व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो जाती।
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