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Baghpat News: आम के बोर में लगा हॉपर कीट, बागान मालिकों की बढ़ी चिंता
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रटौल। मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण हॉपर कीट ने रटौल में आम की फसल पर कहर बरपाया है। इससे करीब तीस फीसदी फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है, जिससे क्षेत्र के बागान मालिकों की चिंता बढ़ गई है। कई बार कीटनाशकों का छिड़काव करने के बाद भी इस कीट से छुटकारा नहीं मिल रहा है।
बागान मालिक हबीब चौहान, कदीर अब्बासी, सुखबीर, अनवार, फैयाज, जावेद चौधरी आदि ने बताया कि रटौल में 600 एकड़ से ज्यादा जमीन पर आम के बाग हैं। आम उत्पादकों को अच्छा बौर आने से इस बार ज्यादा उत्पादन की उम्मीद थी। मगर, दिन में तापमान ज्यादा और रात को कम रहने से आम की फसल हॉपर कीट की चपेट में आ गई। किसानों ने उद्यान विभाग, कृषि विभाग के अधिकारियों से आम के बागों की जांच कर फसल के बचाव के लिए जानकारी देने की मांग उठाई है ताकि आम को बचाया जा सके। बताया कि 30 फीसदी आम हॉपर कीट लगने से नष्ट होने की कगार पहुंच गया है और इससे बागान मालिक को काफी नुकसान होगा।
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संकट में आम की मशहूर प्रजातियां
रटौल में मख्सूस, दशहरी, लंगड़ा, गुलाब जामुन, रटौल, सफेदा, हुस्नआरा, कच्चा मीठा, चितला, हाथी झूल, रामकेला, फजरी समेत आम की करीब 150 प्रजातियों के पेड़ मौजूद हैं। इस तरह हॉपर कीट लगने से इन सभी की स्थिति खराब है।
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इस बार आम बागानों पर बंपर बौर आने से अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। हॉपर कीट से 30 फीसदी तक फसल नष्ट होने के कगार पर है। कीटनाशकों का स्प्रे कराने पर हजारों रुपये खर्च कर चुके हैं, लेकिन फायदा नहीं हो रहा। -कदीर अब्बासी
आम बागानों में आए बौर पर बेमौसम बारिश और दिन-रात के मौसम में बदलाव से बौर को काफी नुकसान पहुंचा है। रोग से फसल को बचाने के लिए कीटनाशक दवाई का छिड़काव करना पड़ रहा। -हबीब चौहान
हॉपर कीट आम के बौर व कोमल पत्तियों का रस चूसकर नुकसान पहुंचता है। कीट का चिपचिपा पदार्थ बारिश के दिनों में आम को काला कर सकता है। -अनवार अहमद
बेमौसम बारिश से हर बार नुकसान पहुंचता है। पिछले वर्ष भी 50 फीसदी आम को नुकसान हुआ था। मौसम की वजह से कीटनाशक दवाई का छिड़काव भी बेअसर हो रहा। -फैयाज सिद्दीकी
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आम बागानों में हॉपर कीट लगने की जानकारी नहीं है। रटौल गांव के आम के बागानों की जांच कराकर किसानों को बचाव की जानकारी दी जाएगी। आम बागानों के मालिक हमारे कार्यालय या जिला उद्यान अधिकारी से संपर्क कर कीटनाशक की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। -बाल गोविंद यादव, जिला कृषि अधिकारी
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बागान मालिक हबीब चौहान, कदीर अब्बासी, सुखबीर, अनवार, फैयाज, जावेद चौधरी आदि ने बताया कि रटौल में 600 एकड़ से ज्यादा जमीन पर आम के बाग हैं। आम उत्पादकों को अच्छा बौर आने से इस बार ज्यादा उत्पादन की उम्मीद थी। मगर, दिन में तापमान ज्यादा और रात को कम रहने से आम की फसल हॉपर कीट की चपेट में आ गई। किसानों ने उद्यान विभाग, कृषि विभाग के अधिकारियों से आम के बागों की जांच कर फसल के बचाव के लिए जानकारी देने की मांग उठाई है ताकि आम को बचाया जा सके। बताया कि 30 फीसदी आम हॉपर कीट लगने से नष्ट होने की कगार पहुंच गया है और इससे बागान मालिक को काफी नुकसान होगा।
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संकट में आम की मशहूर प्रजातियां
रटौल में मख्सूस, दशहरी, लंगड़ा, गुलाब जामुन, रटौल, सफेदा, हुस्नआरा, कच्चा मीठा, चितला, हाथी झूल, रामकेला, फजरी समेत आम की करीब 150 प्रजातियों के पेड़ मौजूद हैं। इस तरह हॉपर कीट लगने से इन सभी की स्थिति खराब है।
इस बार आम बागानों पर बंपर बौर आने से अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। हॉपर कीट से 30 फीसदी तक फसल नष्ट होने के कगार पर है। कीटनाशकों का स्प्रे कराने पर हजारों रुपये खर्च कर चुके हैं, लेकिन फायदा नहीं हो रहा। -कदीर अब्बासी
आम बागानों में आए बौर पर बेमौसम बारिश और दिन-रात के मौसम में बदलाव से बौर को काफी नुकसान पहुंचा है। रोग से फसल को बचाने के लिए कीटनाशक दवाई का छिड़काव करना पड़ रहा। -हबीब चौहान
हॉपर कीट आम के बौर व कोमल पत्तियों का रस चूसकर नुकसान पहुंचता है। कीट का चिपचिपा पदार्थ बारिश के दिनों में आम को काला कर सकता है। -अनवार अहमद
बेमौसम बारिश से हर बार नुकसान पहुंचता है। पिछले वर्ष भी 50 फीसदी आम को नुकसान हुआ था। मौसम की वजह से कीटनाशक दवाई का छिड़काव भी बेअसर हो रहा। -फैयाज सिद्दीकी
आम बागानों में हॉपर कीट लगने की जानकारी नहीं है। रटौल गांव के आम के बागानों की जांच कराकर किसानों को बचाव की जानकारी दी जाएगी। आम बागानों के मालिक हमारे कार्यालय या जिला उद्यान अधिकारी से संपर्क कर कीटनाशक की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। -बाल गोविंद यादव, जिला कृषि अधिकारी