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वेदज्ञान की शरण में जाने से ही मनुष्य का विकास संभव : अरविंद शास्त्री
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-बरनावा के संस्कृत विद्यालय में चौथे दिन भी हुआ महायज्ञ
फोटो-चार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली। बरनावा के महानंद संस्कृत विद्यालय गुरुकुल में चौथे दिन महायज्ञ किया गया। यज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुति देकर विश्व शांति के लिए कामना की।
यज्ञ प्रधानाचार्य आचार्य अरविंद कुमार शास्त्री व आचार्य गुरुवचन शास्त्री ने विधि विधान से कराया। प्रधानाचार्य आचार्य अरविंद कुमार शास्त्री ने कहा कि वेद ज्ञान की शरण में जाने से ही मनुष्य का विकास हो सकता है। युग प्रवर्तक महऋषि दयानंद सरस्वती और श्रंगी ऋषि कृष्णदत्त महाराज का अवतरण नहीं होता तो समाज में अंधविश्वास और कुरीतियां अभिशाप बनकर फैलती हैं। ऋषि मुनियों व महापुरुषों ने यज्ञ करके और वैदिक ज्ञान की ज्योति जलाकर समाज से अंधविश्वाश और पाखंड का विनाश किया। राष्ट्रीय वाचस्पति परोपकारिणी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्माचार्य धनकुमार शास्त्री, आचार्य गुरुवचन शास्त्री, आचार्य सौदान शास्त्री, आचार्य देवेंद्र शास्त्री, आचार्य विजय कुमार ने वेदोपदेश दिए। यज्ञ में अध्यक्ष यशोधर्मा सोलंकी, मंत्री राजपाल त्यागी, डॉ. सोमदत्त भारद्वाज, पूर्व जीएम चंद्रहास, राहुल त्यागी, सुबोध धामा आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली। बरनावा के महानंद संस्कृत विद्यालय गुरुकुल में चौथे दिन महायज्ञ किया गया। यज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुति देकर विश्व शांति के लिए कामना की।
यज्ञ प्रधानाचार्य आचार्य अरविंद कुमार शास्त्री व आचार्य गुरुवचन शास्त्री ने विधि विधान से कराया। प्रधानाचार्य आचार्य अरविंद कुमार शास्त्री ने कहा कि वेद ज्ञान की शरण में जाने से ही मनुष्य का विकास हो सकता है। युग प्रवर्तक महऋषि दयानंद सरस्वती और श्रंगी ऋषि कृष्णदत्त महाराज का अवतरण नहीं होता तो समाज में अंधविश्वास और कुरीतियां अभिशाप बनकर फैलती हैं। ऋषि मुनियों व महापुरुषों ने यज्ञ करके और वैदिक ज्ञान की ज्योति जलाकर समाज से अंधविश्वाश और पाखंड का विनाश किया। राष्ट्रीय वाचस्पति परोपकारिणी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्माचार्य धनकुमार शास्त्री, आचार्य गुरुवचन शास्त्री, आचार्य सौदान शास्त्री, आचार्य देवेंद्र शास्त्री, आचार्य विजय कुमार ने वेदोपदेश दिए। यज्ञ में अध्यक्ष यशोधर्मा सोलंकी, मंत्री राजपाल त्यागी, डॉ. सोमदत्त भारद्वाज, पूर्व जीएम चंद्रहास, राहुल त्यागी, सुबोध धामा आदि मौजूद रहे।
