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प्रधानमंत्री सिंचाई योजना ... उद्यान विभाग : डीलर की मिलीभगत, अपात्र किसानों को दिया था लाभ
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ओबीसी किसानों को एससी दिखाकर जमीन बढ़ाई, पांच लाख तक की सब्सिडी
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जनपद में वर्ष 2022 के दौरान प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत खुलासा हुआ है कि उद्यान विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों और मैसर्स शनिदेव इरीगेशन कंपनी सहारनपुर के डीलर आशीष कुमार की मिलीभगत से अपात्र किसानों को पात्र दर्शाकर योजना का लाभ दे दिया गया। अन्य पिछड़ा वर्ग के किसानों को अनुसूचित जाति का दिखाकर तथा उनकी भूमि अधिक दर्शाकर ढाई से लेकर पांच लाख रुपये तक की सब्सिडी दिलाई गई।
किसानों की शिकायत पर उपजिलाधिकारी विनय प्रताप सिंह भदौरिया ने नायब तहसीलदार से मामले की जांच कराई। जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद एसडीएम ने उद्यान विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित डीलर के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूरी रिपोर्ट अपर जिलाधिकारी को भेज दी है। माना जा रहा है कि जल्द ही दोषियों पर गाज गिर सकती है।
जांच में ऐसे हुआ खेल
एसडीएम द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, सहारनपुर के नकुड़ निवासी किसान प्रमोद कुमार समेत अन्य किसानों ने योजना में गड़बड़ी की शिकायत की थी। जांच में पाया गया कि जेहरा गांव के किसान जग्गू की जाति अन्य पिछड़ा वर्ग है और उसके नाम मात्र 0.03646 हेक्टेयर भूमि दर्ज है, जबकि लाभ देने के लिए उसे अनुसूचित जाति का दर्शाकर 30.000 हेक्टेयर भूमि दिखा दी गई।
इसी प्रकार रामस्वरूप की जाति ओबीसी और भूमि 0.8080 हेक्टेयर थी, लेकिन उसे अनुसूचित जाति दर्शाकर 3.200 हेक्टेयर भूमि दिखाई गई। सूरत सिंह, प्रमोद व सेठपाल सहित अन्य किसानों के साथ भी इसी तरह जाति और भूमि के रिकॉर्ड में हेरफेर कर योजना का लाभ दिलाया गया। जांच में कुल आठ किसानों को इस प्रकार अपात्र होते हुए भी लाभ दिए जाने की पुष्टि हुई है।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जिन व्यक्तियों को योजना का लाभ दिया गया, वे इसके अधिकारी नहीं थे। मामले में उद्यान विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों और डीलर की मिलीभगत प्रथम दृष्टया प्रतीत हो रही है।
सैकड़ों किसानों तक पहुंच सकता है मामला
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल केवल आठ किसानों की जांच की गई है। आशंका है कि वर्ष 2023 और 2024 में भी इसी तरह सैकड़ों किसानों को गलत तरीके से योजना का लाभ दिया गया हो। इसे देखते हुए संबंधित वर्षों की योजनाओं की भी जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था मामला
जेहरा गांव के पृथ्वी सिंह, प्रमोद कुमार, बलजीत, प्रकाश सहित अन्य किसानों ने करीब आठ माह पहले जिलाधिकारी से शिकायत की थी। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बाद में मुख्य विकास अधिकारी की जांच में भी गड़बड़ी का पता लगा, जिसके बाद जांच एसडीएम को सौंपी गई। किसानों ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और डीलर के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की जाए, अन्यथा वे धरना-प्रदर्शन को मजबूर होंगे।
यह है मामला
वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ऊन व जेहरा क्षेत्र के किसानों ने जिला उद्यान विभाग में आवेदन किया था। बाद में कई किसानों ने आरोप लगाया कि विभागीय कर्मचारियों ने धोखाधड़ी कर योजना की धनराशि उनके खातों से निकाल ली। जिलाधिकारी के आदेश पर मामले की जांच कराई गई, जिसमें अब बड़ा घोटाला सामने आया है।
उधर, जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान का कहना है कि मामले की रिपोर्ट मिली है, जिसे कार्रवाई के लिए संबल विभाग के अधिकारियों को मंडल मुख्यालय भेज दिया गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जनपद में वर्ष 2022 के दौरान प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत खुलासा हुआ है कि उद्यान विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों और मैसर्स शनिदेव इरीगेशन कंपनी सहारनपुर के डीलर आशीष कुमार की मिलीभगत से अपात्र किसानों को पात्र दर्शाकर योजना का लाभ दे दिया गया। अन्य पिछड़ा वर्ग के किसानों को अनुसूचित जाति का दिखाकर तथा उनकी भूमि अधिक दर्शाकर ढाई से लेकर पांच लाख रुपये तक की सब्सिडी दिलाई गई।
किसानों की शिकायत पर उपजिलाधिकारी विनय प्रताप सिंह भदौरिया ने नायब तहसीलदार से मामले की जांच कराई। जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद एसडीएम ने उद्यान विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित डीलर के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूरी रिपोर्ट अपर जिलाधिकारी को भेज दी है। माना जा रहा है कि जल्द ही दोषियों पर गाज गिर सकती है।
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जांच में ऐसे हुआ खेल
एसडीएम द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, सहारनपुर के नकुड़ निवासी किसान प्रमोद कुमार समेत अन्य किसानों ने योजना में गड़बड़ी की शिकायत की थी। जांच में पाया गया कि जेहरा गांव के किसान जग्गू की जाति अन्य पिछड़ा वर्ग है और उसके नाम मात्र 0.03646 हेक्टेयर भूमि दर्ज है, जबकि लाभ देने के लिए उसे अनुसूचित जाति का दर्शाकर 30.000 हेक्टेयर भूमि दिखा दी गई।
इसी प्रकार रामस्वरूप की जाति ओबीसी और भूमि 0.8080 हेक्टेयर थी, लेकिन उसे अनुसूचित जाति दर्शाकर 3.200 हेक्टेयर भूमि दिखाई गई। सूरत सिंह, प्रमोद व सेठपाल सहित अन्य किसानों के साथ भी इसी तरह जाति और भूमि के रिकॉर्ड में हेरफेर कर योजना का लाभ दिलाया गया। जांच में कुल आठ किसानों को इस प्रकार अपात्र होते हुए भी लाभ दिए जाने की पुष्टि हुई है।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जिन व्यक्तियों को योजना का लाभ दिया गया, वे इसके अधिकारी नहीं थे। मामले में उद्यान विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों और डीलर की मिलीभगत प्रथम दृष्टया प्रतीत हो रही है।
सैकड़ों किसानों तक पहुंच सकता है मामला
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल केवल आठ किसानों की जांच की गई है। आशंका है कि वर्ष 2023 और 2024 में भी इसी तरह सैकड़ों किसानों को गलत तरीके से योजना का लाभ दिया गया हो। इसे देखते हुए संबंधित वर्षों की योजनाओं की भी जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था मामला
जेहरा गांव के पृथ्वी सिंह, प्रमोद कुमार, बलजीत, प्रकाश सहित अन्य किसानों ने करीब आठ माह पहले जिलाधिकारी से शिकायत की थी। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बाद में मुख्य विकास अधिकारी की जांच में भी गड़बड़ी का पता लगा, जिसके बाद जांच एसडीएम को सौंपी गई। किसानों ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और डीलर के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की जाए, अन्यथा वे धरना-प्रदर्शन को मजबूर होंगे।
यह है मामला
वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ऊन व जेहरा क्षेत्र के किसानों ने जिला उद्यान विभाग में आवेदन किया था। बाद में कई किसानों ने आरोप लगाया कि विभागीय कर्मचारियों ने धोखाधड़ी कर योजना की धनराशि उनके खातों से निकाल ली। जिलाधिकारी के आदेश पर मामले की जांच कराई गई, जिसमें अब बड़ा घोटाला सामने आया है।
उधर, जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान का कहना है कि मामले की रिपोर्ट मिली है, जिसे कार्रवाई के लिए संबल विभाग के अधिकारियों को मंडल मुख्यालय भेज दिया गया है।