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जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में हो रही वृद्धि : संजय
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-नगर के दयानंद बाल विद्या मंदिर में चल रही पर्यावरण संरक्षण प्रशिक्षण कार्यशाला
फोटो संख्या 4
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के दयानंद बाल विद्या मंदिर में रविवार को पर्यावरण संरक्षण प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। एस्रो के निदेशक संजय राणा ने कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया।
राणा ने विद्यार्थियों को बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इससे लू (हीट वेव) की घटनाएं अधिक तीव्र हो रही हैं। इन घटनाओं का मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि ध्रुवीय बर्फ और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण बरसात का पैटर्न अनियमित हो गया है। प्राकृतिक आपदाओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है। कम बरसात से जल संसाधनों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इससे फसलों के उत्पादन में कमी आने की आशंका है। कई जीव-जंतु जलवायु परिवर्तन के कारण विलुप्त हो चुके हैं, और कुछ पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के अन्य पहलुओं पर भी प्रकाश डाला।
कम बरसात होने से जल संसाधनों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इससे कृषि उत्पादन में कमी आ सकती है, जो खाद्य सुरक्षा के लिए चुनौती है। संजय राणा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण कई प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। अन्य कई प्रजातियों पर भी विलुप्त होने का खतरा बना हुआ है। इस अवसर पर खुशी, सुमेधा, भार्गवी, रोहित, सिद्धार्थ, सूरज और उमंग सहित कई विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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फोटो संख्या 4
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के दयानंद बाल विद्या मंदिर में रविवार को पर्यावरण संरक्षण प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। एस्रो के निदेशक संजय राणा ने कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया।
राणा ने विद्यार्थियों को बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इससे लू (हीट वेव) की घटनाएं अधिक तीव्र हो रही हैं। इन घटनाओं का मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि ध्रुवीय बर्फ और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण बरसात का पैटर्न अनियमित हो गया है। प्राकृतिक आपदाओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है। कम बरसात से जल संसाधनों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इससे फसलों के उत्पादन में कमी आने की आशंका है। कई जीव-जंतु जलवायु परिवर्तन के कारण विलुप्त हो चुके हैं, और कुछ पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के अन्य पहलुओं पर भी प्रकाश डाला।
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कम बरसात होने से जल संसाधनों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इससे कृषि उत्पादन में कमी आ सकती है, जो खाद्य सुरक्षा के लिए चुनौती है। संजय राणा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण कई प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। अन्य कई प्रजातियों पर भी विलुप्त होने का खतरा बना हुआ है। इस अवसर पर खुशी, सुमेधा, भार्गवी, रोहित, सिद्धार्थ, सूरज और उमंग सहित कई विद्यार्थी उपस्थित रहे।