सीबीआई की टीम के छापा मारने के बाद अभी तक सत्यपाल मलिक की जितनी भी संपत्ति का पता चला है, उसे सुनकर सीबीआई के अधिकारियों के साथ ही हर कोई हतप्रभ हो गया। सत्यपाल मलिक केंद्र में मंत्री से लेकर कई राज्यों के राज्यपाल तक रहे। मगर गांव में उनके पास आज भी खंडहर पड़े चार कमरे हैं और उन्होंने गांव की पुश्तैनी 30 बीघा जमीन दो बार में चुनाव लड़ने से पहले ही बेच दी।
CBI RAID PICS: पूर्व राज्यपाल की हवेली में टूटी चारपाई व टूटा पलंग देख सीबीआई हतप्रभ, ये सच भी कर देगा हैरान
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उनके परिवार के चचेरे भाई सतबीर मलिक उर्फ हिटलर बताते हैं कि पहली बार चुनाव लड़ने से पहले सत्यपाल मलिक ने 15 बीघा जमीन बेची थी। उसके बाद वह वर्ष 1980 में राज्यसभा गए और वर्ष 1984 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद भी उनको राज्यसभा भेजा गया। वर्ष 1987 में बोफोर्स मामला उछलने के बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था और वीपी सिंह के नेतृत्व वाले जनता दल से वर्ष 1989 में अलीगढ़ से चुनाव लड़कर सांसद बने थे। उस दौरान उनको केंद्रीय राज्यमंत्री बनाया गया था।
वह 1996 में अलीगढ़ से दोबारा लोकसभा चुनाव लड़कर हार गए और उससे पहले ही उन्होंने गांव की बाकी 15 बीघा जमीन बेच दी। वह भाजपा में शामिल हो गए और 2004 में बागपत से लोकसभा चुनाव लड़कर हार गए थे। उन्हें 2017 में बिहार का राज्यपाल बनाया गया और वह जम्मू-कश्मीर, गोवा व मेघालय के राज्यपाल भी रहे। वह अक्तूबर 2022 में सेवानिवृत्त होकर दिल्ली में अकेले एक फ्लैट में रह रहे हैं।
इस तरह सत्यपाल मलिक के पास गांव में केवल चार खंडहर कमरे है, जिनमें टूटी चारपाई व एक टूटा पलंग पड़ा है। इतने बड़े-बड़े पदों पर रहने के बाद भी इस तरह संपत्ति को देखकर सीबीआई टीम व अन्य भी हतप्रभ रह गए।
हवेली में रहते हैं परिवार के चाचा व अन्य
गांव की उस हवेली में करीब 12 कमरे हैं, जिसमें परिवार में चाचा लगने वाले सेवानिवृत्त बीडीओ बिजेंद्र मलिक और परिवार में भतीजे लगने वाले अवध मलिक व स्वेत मलिक के परिवार रहते हैं। सत्यपाल मलिक के हिस्से वाले कमरे बंद पड़े रहते हैं। बिजेंद्र मलिक ने बताया कि जब वह बिहार के राज्यपाल थे, तब वह हवेली में आए थे। जबकि गांव में वह सेवानिवृत्त होने के बाद आए थे, लेकिन तब हवेली में नहीं आ सके।
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