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Baghpat News: कागजों में ताला, जमीन पर अमान्य स्कूलों का बोलबाला
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शामली। जिले में अमान्य स्कूलों पर चलाए गए अभियान की हकीकत स्टिंग में सामने आ गई। जिन स्कूलों पर छह दिन पहले बेसिक शिक्षा विभाग ने ताला लगवाया था, वही स्कूल अब खुलेआम संचालित हो रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई जारी है। इससे विभागीय कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
संवाद सहयोगी द्वारा किए गए स्टिंग में खुलासा हुआ कि अमान्य घोषित किए जाने के बावजूद स्कूलों में न केवल कक्षाएं लग रही हैं, बल्कि संचालकों और शिक्षकों को किसी कार्रवाई का डर भी नहीं है। कुछ शिक्षकों ने तो यहां तक कहा कि उनकी अधिकारियों से बात हो चुकी है और उन्हीं के निर्देश पर स्कूल खोले गए हैं।
...
चूनसा के एसजीएम पब्लिक स्कूल में खुला गेट, अंदर चल रहीं कक्षाएं
सुबह करीब 11:10 बजे गांव चूनसा स्थित एसजीएम पब्लिक स्कूल बिना मान्यता के संचालित होता मिला। मुख्य गेट खुला था और अंदर बच्चे पढ़ते मिले। मौके पर मौजूद शिक्षिका से संवाददाता की कुछ यूं बातचीत हुई।
संवाददाता : यह स्कूल 15 अप्रैल को बंद कराया गया था, फिर कैसे चल रहा है।
शिक्षिका : संचालक अभी यहां नहीं हैं।
संवाददाता : आप ही बता दीजिए।
शिक्षिका : संचालक की अधिकारियों से बात हो गई है, कागज भी पूरे कर लिए गए हैं।
संवाददाता : कब मिली अनुमति।
शिक्षिका : अनुमति मिल चुकी है, अब कोई दिक्कत नहीं है।
सिक्का में मंदिर परिसर में चल रहा स्कूल, मौके पर छुट्टी
गांव सिक्का में शिव चाइल्ड पब्लिक स्कूल मंदिर परिसर में संचालित होता मिला। हालांकि मौके पर पहुंचने पर बरात ठहरने के कारण स्कूल में अवकाश बताया गया।
वहीं सिक्का में ही डॉ. भीमराव आंबेडकर और शिव शिक्षा निकेतन स्कूल निर्धारित स्थान के बजाय अन्य स्थान पर संचालित होते मिले, जिनकी 12 बजे छुट्टी कर दी गई थी।
पहले ताला, फिर अगले ही दिन खुल गए स्कूल
बेसिक शिक्षा अधिकारी लता राठौर ने 15 अप्रैल को चूनसा और सिक्का के पांच अमान्य स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो स्कूलों के मुख्य गेट पर ताला लगवाया था। साथ ही बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों में कराने और नियम उल्लंघन पर प्रतिदिन एक लाख रुपये जुर्माना लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद अगले ही दिन से ये स्कूल फिर से संचालित होने लगे।
पहले भी होती रही शिकायत, नहीं हुई ठोस कार्रवाई
उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त विद्यालय संगठन के पदाधिकारियों ने कई बार अमान्य स्कूलों की शिकायत अधिकारियों से की, लेकिन कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही। संगठन के जिलाध्यक्ष चंद्र कुमार शर्मा व जिला महासचिव हरेंद्र राणा का कहना है कि गांव मखमूलपुर में राज एकेडमी और कुड़ाना में सेंट मैरी पब्लिक स्कूल जैसे कई स्कूल बिना नियमों के संचालित हो रहे हैं।
सरकारी स्कूलों पर भी असर
अमान्य स्कूलों के संचालन का सीधा असर परिषदीय स्कूलों पर पड़ रहा है। बच्चों की संख्या लगातार घट रही है, जिससे पहले भी कई स्कूलों को मर्ज करना पड़ा है।
अभिभावकों में नाराजगी
गांव चूनसा के रामकुमार ने कहा कि ऐसे स्कूल बच्चों का भविष्य खराब कर रहे हैं। वहीं सिक्का के रामपाल ने कहा कि लोग पैसा कमाने के लिए कहीं भी स्कूल खोल रहे हैं और बच्चों को गुमराह कर रहे हैं। संवाद
स्कूल भवन बनकर तैयार फिर से करेंगे आवेदन
शामली। एसजीएम पब्लिक स्कूल संचालक अवधेश कुमार का कहना है कि उन्होंने पूर्व में दो बार मान्यता के लिए आवेदन किया था, लेकिन भवन लिंटर का न होने के कारण आवेदन निरस्त हो गए थे। इस बार उनका दूसरा स्कूल भवन बनकर तैयार हो गया है। बस फर्श का कार्य बाकी है। जैसे ही पूरा होता है, तो वह फिर से आवेदन करेंगे। उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी से कुछ समय देने की अपील की थी।
इन्होंने कहा…
अमान्य स्कूलों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। यदि बंद कराए गए स्कूल फिर से संचालित पाए गए तो प्रतिदिन एक लाख रुपये के हिसाब से जुर्माना वसूला जाएगा।
-लता राठौर, बीएसए
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संवाद सहयोगी द्वारा किए गए स्टिंग में खुलासा हुआ कि अमान्य घोषित किए जाने के बावजूद स्कूलों में न केवल कक्षाएं लग रही हैं, बल्कि संचालकों और शिक्षकों को किसी कार्रवाई का डर भी नहीं है। कुछ शिक्षकों ने तो यहां तक कहा कि उनकी अधिकारियों से बात हो चुकी है और उन्हीं के निर्देश पर स्कूल खोले गए हैं।
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चूनसा के एसजीएम पब्लिक स्कूल में खुला गेट, अंदर चल रहीं कक्षाएं
सुबह करीब 11:10 बजे गांव चूनसा स्थित एसजीएम पब्लिक स्कूल बिना मान्यता के संचालित होता मिला। मुख्य गेट खुला था और अंदर बच्चे पढ़ते मिले। मौके पर मौजूद शिक्षिका से संवाददाता की कुछ यूं बातचीत हुई।
संवाददाता : यह स्कूल 15 अप्रैल को बंद कराया गया था, फिर कैसे चल रहा है।
शिक्षिका : संचालक अभी यहां नहीं हैं।
संवाददाता : आप ही बता दीजिए।
शिक्षिका : संचालक की अधिकारियों से बात हो गई है, कागज भी पूरे कर लिए गए हैं।
संवाददाता : कब मिली अनुमति।
शिक्षिका : अनुमति मिल चुकी है, अब कोई दिक्कत नहीं है।
सिक्का में मंदिर परिसर में चल रहा स्कूल, मौके पर छुट्टी
गांव सिक्का में शिव चाइल्ड पब्लिक स्कूल मंदिर परिसर में संचालित होता मिला। हालांकि मौके पर पहुंचने पर बरात ठहरने के कारण स्कूल में अवकाश बताया गया।
वहीं सिक्का में ही डॉ. भीमराव आंबेडकर और शिव शिक्षा निकेतन स्कूल निर्धारित स्थान के बजाय अन्य स्थान पर संचालित होते मिले, जिनकी 12 बजे छुट्टी कर दी गई थी।
पहले ताला, फिर अगले ही दिन खुल गए स्कूल
बेसिक शिक्षा अधिकारी लता राठौर ने 15 अप्रैल को चूनसा और सिक्का के पांच अमान्य स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो स्कूलों के मुख्य गेट पर ताला लगवाया था। साथ ही बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों में कराने और नियम उल्लंघन पर प्रतिदिन एक लाख रुपये जुर्माना लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद अगले ही दिन से ये स्कूल फिर से संचालित होने लगे।
पहले भी होती रही शिकायत, नहीं हुई ठोस कार्रवाई
उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त विद्यालय संगठन के पदाधिकारियों ने कई बार अमान्य स्कूलों की शिकायत अधिकारियों से की, लेकिन कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही। संगठन के जिलाध्यक्ष चंद्र कुमार शर्मा व जिला महासचिव हरेंद्र राणा का कहना है कि गांव मखमूलपुर में राज एकेडमी और कुड़ाना में सेंट मैरी पब्लिक स्कूल जैसे कई स्कूल बिना नियमों के संचालित हो रहे हैं।
सरकारी स्कूलों पर भी असर
अमान्य स्कूलों के संचालन का सीधा असर परिषदीय स्कूलों पर पड़ रहा है। बच्चों की संख्या लगातार घट रही है, जिससे पहले भी कई स्कूलों को मर्ज करना पड़ा है।
अभिभावकों में नाराजगी
गांव चूनसा के रामकुमार ने कहा कि ऐसे स्कूल बच्चों का भविष्य खराब कर रहे हैं। वहीं सिक्का के रामपाल ने कहा कि लोग पैसा कमाने के लिए कहीं भी स्कूल खोल रहे हैं और बच्चों को गुमराह कर रहे हैं। संवाद
स्कूल भवन बनकर तैयार फिर से करेंगे आवेदन
शामली। एसजीएम पब्लिक स्कूल संचालक अवधेश कुमार का कहना है कि उन्होंने पूर्व में दो बार मान्यता के लिए आवेदन किया था, लेकिन भवन लिंटर का न होने के कारण आवेदन निरस्त हो गए थे। इस बार उनका दूसरा स्कूल भवन बनकर तैयार हो गया है। बस फर्श का कार्य बाकी है। जैसे ही पूरा होता है, तो वह फिर से आवेदन करेंगे। उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी से कुछ समय देने की अपील की थी।
इन्होंने कहा…
अमान्य स्कूलों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। यदि बंद कराए गए स्कूल फिर से संचालित पाए गए तो प्रतिदिन एक लाख रुपये के हिसाब से जुर्माना वसूला जाएगा।
-लता राठौर, बीएसए
