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Baghpat News: भागवत कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया
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-हिम्मतपुर सूजती गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा, बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
फोटो-दो
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। हिम्मतपुर सूजती गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को श्रीकृष्ण विवाह का प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक पंडित अभिनंदन महाराज ने सेवा और भगवान से प्रेम को मनुष्य जीवन की सार्थकता बताया। इस अवसर पर मनमोहक झांकियों की प्रस्तुति भी दी गई।
पंडित अभिनंदन महाराज ने श्रीकृष्ण विवाह की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और गुणों से मोहित थीं। रुक्मिणी ने मन ही मन श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था। हालांकि रुक्मिणी का भाई रुक्मी श्रीकृष्ण को अपना शत्रु मानता था। रुक्मी ने अपनी बहन का विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था। जब रुक्मिणी को यह जानकारी मिली, तो उन्होंने एक ब्राह्मण के माध्यम से श्रीकृष्ण को अपनी व्यथा बताई। रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण से विवाह करने की प्रार्थना की। इसके बाद भगवान कृष्ण ने शिशुपाल और अन्य राजाओं को युद्ध में पराजित किया। वे रुक्मिणी को द्वारका ले आए और वहां उनका विवाह संपन्न हुआ। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लिया। इस मौके पर प्रधान सनुज राठी, हरपाल सिंह, सौरभ राठी, विकास, अंकुर आदि मौजूद रहे।
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फोटो-दो
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। हिम्मतपुर सूजती गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को श्रीकृष्ण विवाह का प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक पंडित अभिनंदन महाराज ने सेवा और भगवान से प्रेम को मनुष्य जीवन की सार्थकता बताया। इस अवसर पर मनमोहक झांकियों की प्रस्तुति भी दी गई।
पंडित अभिनंदन महाराज ने श्रीकृष्ण विवाह की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और गुणों से मोहित थीं। रुक्मिणी ने मन ही मन श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था। हालांकि रुक्मिणी का भाई रुक्मी श्रीकृष्ण को अपना शत्रु मानता था। रुक्मी ने अपनी बहन का विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था। जब रुक्मिणी को यह जानकारी मिली, तो उन्होंने एक ब्राह्मण के माध्यम से श्रीकृष्ण को अपनी व्यथा बताई। रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण से विवाह करने की प्रार्थना की। इसके बाद भगवान कृष्ण ने शिशुपाल और अन्य राजाओं को युद्ध में पराजित किया। वे रुक्मिणी को द्वारका ले आए और वहां उनका विवाह संपन्न हुआ। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लिया। इस मौके पर प्रधान सनुज राठी, हरपाल सिंह, सौरभ राठी, विकास, अंकुर आदि मौजूद रहे।
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