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Baghpat News: समूह के माध्यम से स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं
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-मिट्टी के बर्तन बनाने, सिलाई-कढ़ाई करने, मोमबत्ती बनाने का कर रहीं काम
फोटो संख्या 10
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं स्वरोजगार करके आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रही हैं। अपने साथ ही गांव की जरूरतमंद महिलाओं को काम दे रही हैं। जागरुकता बढ़ने से काफी संख्या में महिलाएं समूह से जुड़ रही हैं। ये महिलाएं अब मिट्टी के बर्तन बनाने, सिलाई-कढ़ाई करने से होने वाली कमाई से अपने घर का खर्च उठा रही हैं।
शेरपुर गांव निवासी अंशु शर्मा ने बताया कि वह एक समूह से जुड़ी हुई हैं। इसके माध्यम से सिलाई सेंटर खोलने से गांव में ही रोजगार मिल गया है। उन्होंने अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा हुआ है, जिससे उनकी भी कमाई होती है। बताया कि महिलाओं आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं गांव की सावित्री मिट्टी के बर्तन बनाकर, उन्हें बेचने का काम कर रही हैं। अपने साथ गांव की जरूरतमंद महिलाओं को भी काम दिया हुआ है, कोई बर्तनों की रंगाई करती है तो कोई उनकी पैकिंग करती है। इस तरह से रोजगार से होने वाली कमाई से अपने घर के खर्च में सहयोग कर रही हैं। इनके अलावा राजबाला, सुमन, मंजू, सविता समेत अन्य महिलाओं को समूह के माध्यम से गांव में ही रोजगार मिला हुआ है।
-रोजगार के लिए बैंकों से कम ब्याज पर मिलता है ऋण
प्रीति, मंजू, आरती समेत अन्य महिलाओं ने बताया कि समूह से जुड़ने का काफी लाभ है। इससे संगठित होकर महिलाएं छोटे उद्योग-धंधे चला रही हैं। समूह के माध्यम से बैंकों से आसानी से कम दर पर ऋण मिल जाता है, जिससे स्वरोजगार कर धीरे-धीरे उसे किस्तों में चुका दिया जाता है। सरकार की तरफ समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि महिलाओं में जागरुकता आए और आत्मनिर्भर बन सकें।
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फोटो संख्या 10
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं स्वरोजगार करके आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रही हैं। अपने साथ ही गांव की जरूरतमंद महिलाओं को काम दे रही हैं। जागरुकता बढ़ने से काफी संख्या में महिलाएं समूह से जुड़ रही हैं। ये महिलाएं अब मिट्टी के बर्तन बनाने, सिलाई-कढ़ाई करने से होने वाली कमाई से अपने घर का खर्च उठा रही हैं।
शेरपुर गांव निवासी अंशु शर्मा ने बताया कि वह एक समूह से जुड़ी हुई हैं। इसके माध्यम से सिलाई सेंटर खोलने से गांव में ही रोजगार मिल गया है। उन्होंने अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा हुआ है, जिससे उनकी भी कमाई होती है। बताया कि महिलाओं आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं गांव की सावित्री मिट्टी के बर्तन बनाकर, उन्हें बेचने का काम कर रही हैं। अपने साथ गांव की जरूरतमंद महिलाओं को भी काम दिया हुआ है, कोई बर्तनों की रंगाई करती है तो कोई उनकी पैकिंग करती है। इस तरह से रोजगार से होने वाली कमाई से अपने घर के खर्च में सहयोग कर रही हैं। इनके अलावा राजबाला, सुमन, मंजू, सविता समेत अन्य महिलाओं को समूह के माध्यम से गांव में ही रोजगार मिला हुआ है।
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-रोजगार के लिए बैंकों से कम ब्याज पर मिलता है ऋण
प्रीति, मंजू, आरती समेत अन्य महिलाओं ने बताया कि समूह से जुड़ने का काफी लाभ है। इससे संगठित होकर महिलाएं छोटे उद्योग-धंधे चला रही हैं। समूह के माध्यम से बैंकों से आसानी से कम दर पर ऋण मिल जाता है, जिससे स्वरोजगार कर धीरे-धीरे उसे किस्तों में चुका दिया जाता है। सरकार की तरफ समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि महिलाओं में जागरुकता आए और आत्मनिर्भर बन सकें।
