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Baghpat News: धागे से सपनों को बुन रहीं महिलाएं
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बड़ौत। वाजिदपुर गांव की दीपा ने फाइलों के धागे बनाने का कारोबार शुरू कर दस से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। इस पहल से गांव की महिलाएं घर पर ही रोजगार पाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर पा रही हैं। दीपा का लक्ष्य इस काम का दायरा बढ़ाकर और अधिक महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना है।
दीपा ने बताया कि उन्होंने पहले एक समूह का गठन किया, जिसमें 10 से 12 महिलाओं को जोड़ा गया। समूह के माध्यम से बैंक से ऋण लेकर उन्होंने अपने घर पर फाइलों के धागे बनाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे काम बढ़ने पर उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा। वर्तमान में विमला, सरोज, पूनम और आरती सहित दस से अधिक महिलाएं इस कारोबार से जुड़ी हैं। महिलाओं का कहना है कि गांव में रोजगार मिलने से उन्हें काम की तलाश में बाहर नहीं जाना पड़ता। वे काम के साथ-साथ अपने परिवार का भी ध्यान रख पाती हैं। कई महिलाएं इस काम से हर महीने 10 से 15 हजार रुपये की कमाई कर रही हैं। महिलाओं को उनके काम के अनुसार भुगतान किया जाता है, जिससे वे अपने घर के खर्चों में सहयोग करती हैं।
-दीपा का उद्देश्य इस कारोबार को और बढ़ाना
दीपा का उद्देश्य इस कारोबार को और बढ़ाना है ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिल सके। उन्होंने बताया कि उनके बढ़ते कारोबार को देखकर अन्य महिलाओं का भी हौसला बढ़ा है। कई महिलाएं उनसे काम शुरू करने के लिए सलाह मांगती हैं। दीपा उन्हें बताती हैं कि नया काम शुरू करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनसे घबराना नहीं चाहिए। प्रयास करने से एक दिन कामयाबी जरूर मिलेगी, जिसका इंतजार करना जरूरी है।
ग्रामीण महिलाओं के लिए अवसर
इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं के लिए घर बैठे आय अर्जित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। यह उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद कर रहा है। महिलाओं को अब दूर शहरों में काम ढूंढने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह मॉडल अन्य गांवों में भी महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर सकता है। स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का यह एक सफल उदाहरण है।
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दीपा ने बताया कि उन्होंने पहले एक समूह का गठन किया, जिसमें 10 से 12 महिलाओं को जोड़ा गया। समूह के माध्यम से बैंक से ऋण लेकर उन्होंने अपने घर पर फाइलों के धागे बनाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे काम बढ़ने पर उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा। वर्तमान में विमला, सरोज, पूनम और आरती सहित दस से अधिक महिलाएं इस कारोबार से जुड़ी हैं। महिलाओं का कहना है कि गांव में रोजगार मिलने से उन्हें काम की तलाश में बाहर नहीं जाना पड़ता। वे काम के साथ-साथ अपने परिवार का भी ध्यान रख पाती हैं। कई महिलाएं इस काम से हर महीने 10 से 15 हजार रुपये की कमाई कर रही हैं। महिलाओं को उनके काम के अनुसार भुगतान किया जाता है, जिससे वे अपने घर के खर्चों में सहयोग करती हैं।
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-दीपा का उद्देश्य इस कारोबार को और बढ़ाना
दीपा का उद्देश्य इस कारोबार को और बढ़ाना है ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिल सके। उन्होंने बताया कि उनके बढ़ते कारोबार को देखकर अन्य महिलाओं का भी हौसला बढ़ा है। कई महिलाएं उनसे काम शुरू करने के लिए सलाह मांगती हैं। दीपा उन्हें बताती हैं कि नया काम शुरू करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनसे घबराना नहीं चाहिए। प्रयास करने से एक दिन कामयाबी जरूर मिलेगी, जिसका इंतजार करना जरूरी है।
ग्रामीण महिलाओं के लिए अवसर
इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं के लिए घर बैठे आय अर्जित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। यह उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद कर रहा है। महिलाओं को अब दूर शहरों में काम ढूंढने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह मॉडल अन्य गांवों में भी महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर सकता है। स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का यह एक सफल उदाहरण है।

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