सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   12 border pillars missing from no-man's-land; to be reinstalled.

Bahraich News: नो-मैन्स लैंड से 12 सीमा स्तंभ गायब, दोबारा लगेंगे

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:51 PM IST
विज्ञापन
12 border pillars missing from no-man's-land; to be reinstalled.
भारत-नेपाल सीमा पर ​स्थित नो मैंस लैंड।
विज्ञापन
रुपईडीहा। भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने नई कवायद शुरू की है। नो-मैन्स लैंड और सरकारी भूमि से 227 अवैध अतिक्रमण हटाने के बाद अब सीमा पर क्षतिग्रस्त और लापता सीमा स्तंभों की पुनर्स्थापना की तैयारी शुरू हो गई है। श्रावस्ती जिले में कार्य पूरा होने के बाद अगले सप्ताह से सर्वे टीम के बहराइच पहुंचकर कार्य शुरू करने की उम्मीद है।


भारत नेपाल सीमा पर नो-मैन्स लैंड की सुरक्षा के लिए समय-समय पर सर्वे होता है। बीते दिनों हुए सर्वे में बहराइच-बांके जिले की सीमा पर कुल 311 सीमा स्तंभ स्थापित होने की पुष्टि हुई थी। इनमें एक मुख्य और 11 सहायक समेत कुल 12 पिलर गायब मिले थे। बरसात के दौरान नदियों की धारा बदलने, कटान और दलदली भूभाग के कारण कई पिलर मिट्टी में भी दब जाते हैं या बह जाते हैं। अब दोनों देशों की तकनीकी टीम संयुक्त सर्वे कर संवेदनशील स्थानों पर नए सिरे से सीमा स्तंभ स्थापित करेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन



42वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के कमांडेंट गिरीश चंद्र पांडेय ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा के कुछ हिस्सों में नेपाल की राप्ती नदी का बहाव होने के कारण हर वर्ष बरसात में सीमा स्तंभों को नुकसान पहुंचता है। वहीं, जंगल में गेरुआ और कौड़ियाला नदियों के कटान और तेज जलप्रवाह के चलते कई पिलर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जबकि कुछ पूरी तरह गायब हो जाते हैं। वर्तमान में 12 सीमा स्तंभ मिसिंग श्रेणी में दर्ज हैं। इन सभी स्थानों का अभिलेख उपलब्ध है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका सत्यापन एवं पुनर्स्थापना की जाएगी।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि फिलहाल बॉर्डर पिलर सर्वे टीम श्रावस्ती जिले में कार्य कर रही है। वहां का कार्य पूरा होने के बाद अगले चरण में बहराइच में सर्वे शुरू होगा। उन्होंने बताया कि एसएसबी और नेपाल की एपीएफ द्वारा नियमित संयुक्त गश्त की जा रही है, जिससे सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और समन्वय बना हुआ है।
कमांडेंट ने कहा कि मंगलवार को नेपालगंज में हुई भारत-नेपाल समन्वय बैठक में भी सीमा सुरक्षा, तस्करी, अवैध आवाजाही और सीमा स्तंभों के संरक्षण पर चर्चा हुई थी। अधिकारियों ने संवेदनशील स्थलों पर संयुक्त निगरानी बढ़ाने और तकनीकी सर्वे के जरिये गायब पिलरों को चिह्नित करने पर सहमति जताई थी, उसी के तहत कवायद शुरू कर दी गई है।

कटान बन रहा सबसे बड़ी चुनौती

नानपारा तहसील से सटे सीमावर्ती क्षेत्र में राप्ती नदी, बरसाती नाले और दलदली भूभाग होने के कारण हर वर्ष कटान की समस्या सामने आती है। इसी वजह से कई सीमा स्तंभ क्षतिग्रस्त होकर बह जाते हैं या मिट्टी में दब जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों की निगरानी फिलहाल जीपीएस और डिजिटल मैपिंग के जरिये की जा रही है।

अतिक्रमण पर चला था बड़ा अभियान


सीमावर्ती क्षेत्र में हुए संयुक्त सर्वेक्षण में नो-मैन्स लैंड और सरकारी भूमि पर 227 अवैध अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। जिला प्रशासन और एसएसबी की संयुक्त कार्रवाई में अधिकांश अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए गए हैं। इस दौरान कई धार्मिक स्थलों पर भी कार्रवाई हुई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed