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Bahraich News: 35 पशु चिकित्सालय, 28 चिकित्सक, चिकित्सा सुविधाएं बीमार
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रिसिया के राजकीय पशु चिकित्सालय में बंद ताला।
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बहराइच। जिले में पशु चिकित्सा व्यवस्था डॉक्टरों और फार्मासिस्टों की कमी से जूझ रहा है। कई पशु चिकित्सालयों का प्रभार एक ही चिकित्सक के पास होने से वह सभी केंद्रों पर नियमित समय नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में पशुओं के इलाज के लिए चिकित्सक के आने का पशुपालकों को इंतजार करना पड़ता है। पशु की हालत गंभीर होने पर निजी चिकित्सकों का सहारा लेने को वे मजबूर हैं। वहीं, विभाग उपलब्ध संसाधनों के जरिए पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं देने का दावा कर रहा है।
जिले में पशुओं के इलाज के लिए कुल 35 पशु चिकित्सालय हैं। इनमें चार उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों समेत 28 पशु चिकित्सक तैनात है। अनुमन्य पदों के अनुसार पांच चिकित्सकों की कमी है। इसके अलावा पशु चिकित्सालयों में फार्मासिस्ट भी नहीं हैं। अधिकांश पशु चिकित्सालयों के भवन भी जर्जर हालत में हैं।
नवाबगंज में चतुर्थ श्रेणी कर्मी कर रहा इलाज
नवाबगंज कस्बे में स्थित पशु चिकित्सालय की स्थिति बदहाल है। यहां लगे उपकरण भी खराब पड़े हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार दो वर्ष पूर्व यहां पशु चिकित्सक के रूप में डॉ. नेहा बावड़ी की तैनाती हुई थी, लेकिन वह केंद्र पर नहीं आईं। उनके स्थान पर चतुर्थ श्रेणी कर्मी प्रखर पांडेय पशुओं का इलाज कर रहे हैं। यहां आने वाले पशुपालकों को दवाएं भी बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
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तेजवापुर में रोजाना सात-आठ मामले
तेजवापुर ब्लॉक के राजकीय पशु चिकित्सालय में भी कर्मचारियों की कमी के कारण व्यवस्था प्रभावित है। यहां तैनात डॉ. धीरज वर्मा ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन सात से आठ पशुओं के इलाज के मामले आते हैं। इसके अलावा क्षेत्र में जाकर पशुओं का टीकाकरण और बीमार पशुओं का इलाज भी किया जाता है।
बाबागंज में डॉक्टर अक्सर नहीं आते
ब्लॉक मुख्यालय बाबागंज स्थित पशु चिकित्सालय में बृहस्पतिवार सुबह चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार मौजूद नहीं मिले। यहां संविदा कर्मी पशु मित्र मनोज कुमार पशुओं का इलाज करते मिले। मौजूद पशुपालकों ने बताया कि चिकित्सक अक्सर केंद्र पर नहीं मिलते। इसकी शिकायत पहले भी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से की जा चुकी है, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
फखरपुर में दो केंद्रों की जिम्मेदारी
फखरपुर स्थित पशु चिकित्सालय में भी चिकित्सकों की कमी है। यहां तैनात डॉ. सुभाष मौर्य ने बताया कि पिछले डेढ़ वर्ष से उनके पास बौंडी पशु चिकित्सा केंद्र का भी अतिरिक्त प्रभार है। दो अस्पतालों की जिम्मेदारी होने के कारण दोनों केंद्रों पर नियमित समय देना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
पशु एंबुलेंस 1062 से मिल रही मदद
गंभीर स्थिति में पशुओं को मौके पर ही उपचार उपलब्ध कराने के लिए जिले में पशु एंबुलेंस सेवा संचालित है। रिसिया, नानपारा समेत आठ केंद्रों पर एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। जरूरत पड़ने पर पशुपालकों की मांग के अनुसार एंबुलेंस भेजी जाती है।
कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा
जिले के सभी पशु चिकित्सालयों में कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा उपलब्ध है। पशुपालक अपने पशुओं को संबंधित केंद्र पर ले जाकर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
पांच चिकित्सकों की कमी
मानक के मुताबिक जिले में पांच पशु चिकित्सकों की कमी है। पशु चिकित्सालयों में फार्मासिस्ट भी नहीं हैं। सभी केंद्रों पर पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। विभाग के पास उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. राजेश कुमार उपाध्याय, सीवीओ, बहराइच
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जिले में पशुओं के इलाज के लिए कुल 35 पशु चिकित्सालय हैं। इनमें चार उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों समेत 28 पशु चिकित्सक तैनात है। अनुमन्य पदों के अनुसार पांच चिकित्सकों की कमी है। इसके अलावा पशु चिकित्सालयों में फार्मासिस्ट भी नहीं हैं। अधिकांश पशु चिकित्सालयों के भवन भी जर्जर हालत में हैं।
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नवाबगंज में चतुर्थ श्रेणी कर्मी कर रहा इलाज
नवाबगंज कस्बे में स्थित पशु चिकित्सालय की स्थिति बदहाल है। यहां लगे उपकरण भी खराब पड़े हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार दो वर्ष पूर्व यहां पशु चिकित्सक के रूप में डॉ. नेहा बावड़ी की तैनाती हुई थी, लेकिन वह केंद्र पर नहीं आईं। उनके स्थान पर चतुर्थ श्रेणी कर्मी प्रखर पांडेय पशुओं का इलाज कर रहे हैं। यहां आने वाले पशुपालकों को दवाएं भी बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
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तेजवापुर में रोजाना सात-आठ मामले
तेजवापुर ब्लॉक के राजकीय पशु चिकित्सालय में भी कर्मचारियों की कमी के कारण व्यवस्था प्रभावित है। यहां तैनात डॉ. धीरज वर्मा ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन सात से आठ पशुओं के इलाज के मामले आते हैं। इसके अलावा क्षेत्र में जाकर पशुओं का टीकाकरण और बीमार पशुओं का इलाज भी किया जाता है।
बाबागंज में डॉक्टर अक्सर नहीं आते
ब्लॉक मुख्यालय बाबागंज स्थित पशु चिकित्सालय में बृहस्पतिवार सुबह चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार मौजूद नहीं मिले। यहां संविदा कर्मी पशु मित्र मनोज कुमार पशुओं का इलाज करते मिले। मौजूद पशुपालकों ने बताया कि चिकित्सक अक्सर केंद्र पर नहीं मिलते। इसकी शिकायत पहले भी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से की जा चुकी है, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
फखरपुर में दो केंद्रों की जिम्मेदारी
फखरपुर स्थित पशु चिकित्सालय में भी चिकित्सकों की कमी है। यहां तैनात डॉ. सुभाष मौर्य ने बताया कि पिछले डेढ़ वर्ष से उनके पास बौंडी पशु चिकित्सा केंद्र का भी अतिरिक्त प्रभार है। दो अस्पतालों की जिम्मेदारी होने के कारण दोनों केंद्रों पर नियमित समय देना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
पशु एंबुलेंस 1062 से मिल रही मदद
गंभीर स्थिति में पशुओं को मौके पर ही उपचार उपलब्ध कराने के लिए जिले में पशु एंबुलेंस सेवा संचालित है। रिसिया, नानपारा समेत आठ केंद्रों पर एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। जरूरत पड़ने पर पशुपालकों की मांग के अनुसार एंबुलेंस भेजी जाती है।
कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा
जिले के सभी पशु चिकित्सालयों में कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा उपलब्ध है। पशुपालक अपने पशुओं को संबंधित केंद्र पर ले जाकर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
पांच चिकित्सकों की कमी
मानक के मुताबिक जिले में पांच पशु चिकित्सकों की कमी है। पशु चिकित्सालयों में फार्मासिस्ट भी नहीं हैं। सभी केंद्रों पर पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। विभाग के पास उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. राजेश कुमार उपाध्याय, सीवीओ, बहराइच