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Bahraich News: सरयू पर संजय सेतु के समानांतर अक्तूबर से बनेगा चार लेन का नया पुल
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बहराइच-लखनऊ हाईवे पर सरयू नदी पर बना संजय सेतु।
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बहराइच। वर्षों से जर्जर संजय सेतु पर निर्भर अवध और तराई क्षेत्र को अब नई उम्मीद दिखाई देने लगी है। संजय सेतु के समानांतर चार लेन का नया पुल बनाया जाएगा। 1130 मीटर लंबे अत्याधुनिक केबल-स्टेड पुल के निर्माण के लिए एनएचएआई ने स्थल सर्वे का काम तेज कर दिया है। सर्वे टीम नदी के प्रवाह, मिट्टी की क्षमता, एलाइनमेंट और टावरों के संभावित स्थानों का अध्ययन कर रही है, जिसके आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार होगी।
करीब 6969 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और नेपाल सीमा तक जाने वाले लाखों यात्रियों को जाम और यातायात के प्रतिबंधों से राहत मिलेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि नए पुल के निर्माण के दौरान मौजूदा संजय सेतु से यातायात जारी रहेगा, जिससे आवागमन प्रभावित नहीं होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार केबल-स्टेड तकनीक से बनने वाला यह पुल उत्तर प्रदेश के आधुनिक पुलों की श्रेणी में शामिल होगा। नदी के बीच बिना पिलर के निर्मित होने वाले इस पुल से जल प्रवाह बाधित नहीं होगा और बाढ़ के समय भी पुल अधिक सुरक्षित रहेगा। एनएचएआई के अवर अभियंता अनंत मौर्या का कहना है कि सर्वे और तकनीकी परीक्षण पूरे होने के बाद निर्माण प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अक्तूबर से शुरू होने की उम्मीद है।
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सर्वे टीम देख रही ये अहम बिंदु
नदी की चौड़ाई और जल प्रवाह का अध्ययन
मिट्टी की भार वहन क्षमता की जांच
टावर और एप्रोच रोड की संभावित लोकेशन
बाढ़ स्तर और नदी की धारा का विश्लेषण
भविष्य के यातायात दबाव के अनुसार डिजाइन
जर्जर संजय सेतु पर निर्भर हैं लाखों लोग
संजय सेतु बहराइच और बाराबंकी के बीच सबसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। यह मार्ग राजधानी लखनऊ को जोड़ता है। मरम्मत के चलते समय-समय पर यातायात प्रभावित होता रहा है, जिससे लंबी दूरी के वाहनों को परेशानी उठानी पड़ती है। नया पुल बनने के बाद पुराने सेतु पर दबाव कम होगा और आवागमन अधिक सुरक्षित एवं सुगम हो सकेगा।
फैक्ट फाइल:
प्रस्तावित पुल की लंबाई: 1130 मीटर
निर्माण तकनीक: केबल-स्टेड
अनुमानित लागत: 6969 करोड़ रुपये
प्रारंभिक क्षमता: 4 लेन
भविष्य में विस्तार: 6 लेन तक
वर्तमान स्थिति: स्थल सर्वे शुरू, डीपीआर की तैयारी जारी
करीब 6969 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और नेपाल सीमा तक जाने वाले लाखों यात्रियों को जाम और यातायात के प्रतिबंधों से राहत मिलेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि नए पुल के निर्माण के दौरान मौजूदा संजय सेतु से यातायात जारी रहेगा, जिससे आवागमन प्रभावित नहीं होगा।
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विशेषज्ञों के अनुसार केबल-स्टेड तकनीक से बनने वाला यह पुल उत्तर प्रदेश के आधुनिक पुलों की श्रेणी में शामिल होगा। नदी के बीच बिना पिलर के निर्मित होने वाले इस पुल से जल प्रवाह बाधित नहीं होगा और बाढ़ के समय भी पुल अधिक सुरक्षित रहेगा। एनएचएआई के अवर अभियंता अनंत मौर्या का कहना है कि सर्वे और तकनीकी परीक्षण पूरे होने के बाद निर्माण प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अक्तूबर से शुरू होने की उम्मीद है।
सर्वे टीम देख रही ये अहम बिंदु
नदी की चौड़ाई और जल प्रवाह का अध्ययन
मिट्टी की भार वहन क्षमता की जांच
टावर और एप्रोच रोड की संभावित लोकेशन
बाढ़ स्तर और नदी की धारा का विश्लेषण
भविष्य के यातायात दबाव के अनुसार डिजाइन
जर्जर संजय सेतु पर निर्भर हैं लाखों लोग
संजय सेतु बहराइच और बाराबंकी के बीच सबसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। यह मार्ग राजधानी लखनऊ को जोड़ता है। मरम्मत के चलते समय-समय पर यातायात प्रभावित होता रहा है, जिससे लंबी दूरी के वाहनों को परेशानी उठानी पड़ती है। नया पुल बनने के बाद पुराने सेतु पर दबाव कम होगा और आवागमन अधिक सुरक्षित एवं सुगम हो सकेगा।
फैक्ट फाइल:
प्रस्तावित पुल की लंबाई: 1130 मीटर
निर्माण तकनीक: केबल-स्टेड
अनुमानित लागत: 6969 करोड़ रुपये
प्रारंभिक क्षमता: 4 लेन
भविष्य में विस्तार: 6 लेन तक
वर्तमान स्थिति: स्थल सर्वे शुरू, डीपीआर की तैयारी जारी