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Bahraich News: वायरल फीवर और उल्टी-दस्त से बच्चे बेहाल
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बहराइच मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में भर्ती बच्चे।
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बहराइच। मौसम में उतार-चढ़ाव बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। उमस और बारिश के बाद बढ़ी नमी के बीच बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्हें वायरल बुखार के साथ उल्टी-दस्त की शिकायत हो रही है। मेडिकल कॉलेज की बाल रोग ओपीडी में रोजाना 350 से 400 बाल रोगी उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें करीब 55 से 60 बच्चों की हालत नाजुक होने पर उन्हें भर्ती करना पड़ रहा है। चिकित्सकों ने अभिभावकों को बच्चों में बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके त्रिपाठी के अनुसार मौसम बदलने पर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। वायरल संक्रमण में तेज या हल्का बुखार, खांसी-जुकाम, गले में खराश, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। वहीं उल्टी-दस्त में बच्चे को बार-बार पतला मल, उल्टी, पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत हो सकती है।
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि छोटे बच्चों में उल्टी-दस्त होने पर शरीर से पानी और जरूरी लवण तेजी से कम हो जाते हैं। आंखें धंसना, मुंह सूखना, बच्चा सुस्त पड़ना, पेशाब कम होना और लगातार उल्टी होना शरीर में पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में इलाज में देरी खतरनाक हो सकती है।
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तुरंत चिकित्सक से करें संपर्क
बच्चे को लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, बार-बार उल्टी, खून वाले दस्त, अत्यधिक कमजोरी या पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें तो घर पर इलाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
बचाव के लिए ये सावधानी जरूरी
बच्चों को उबला या स्वच्छ पानी ही पिलाएं।
भोजन से पहले और शौचालय के बाद हाथ जरूर धुलवाएं।
खुले में बिकने वाले कटे फल, दूषित पानी और बासी भोजन से बचाएं।
बारिश में भीगने के बाद बच्चों के कपड़े बदल दें।
घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
उल्टी-दस्त होने पर चिकित्सकीय सलाह से ओआरएस का घोल दें।
तेज बुखार, लगातार उल्टी-दस्त, अत्यधिक सुस्ती या पेशाब कम होने पर तत्काल अस्पताल ले जाएं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके त्रिपाठी के अनुसार मौसम बदलने पर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। वायरल संक्रमण में तेज या हल्का बुखार, खांसी-जुकाम, गले में खराश, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। वहीं उल्टी-दस्त में बच्चे को बार-बार पतला मल, उल्टी, पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत हो सकती है।
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डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि छोटे बच्चों में उल्टी-दस्त होने पर शरीर से पानी और जरूरी लवण तेजी से कम हो जाते हैं। आंखें धंसना, मुंह सूखना, बच्चा सुस्त पड़ना, पेशाब कम होना और लगातार उल्टी होना शरीर में पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में इलाज में देरी खतरनाक हो सकती है।
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तुरंत चिकित्सक से करें संपर्क
बच्चे को लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, बार-बार उल्टी, खून वाले दस्त, अत्यधिक कमजोरी या पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें तो घर पर इलाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
बचाव के लिए ये सावधानी जरूरी
बच्चों को उबला या स्वच्छ पानी ही पिलाएं।
भोजन से पहले और शौचालय के बाद हाथ जरूर धुलवाएं।
खुले में बिकने वाले कटे फल, दूषित पानी और बासी भोजन से बचाएं।
बारिश में भीगने के बाद बच्चों के कपड़े बदल दें।
घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
उल्टी-दस्त होने पर चिकित्सकीय सलाह से ओआरएस का घोल दें।
तेज बुखार, लगातार उल्टी-दस्त, अत्यधिक सुस्ती या पेशाब कम होने पर तत्काल अस्पताल ले जाएं।