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Bahraich News: आफत की बाढ़, तीन तहसीलों के 30 गांवों तक पहुंचा सरयू का पानी
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सरयू में बाढ़ से गांवों में बिगड़े हालात।
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बहराइच। सरयू नदी में उफान से तीन तहसीलों के 30 गांवों तक पानी पहुंच गया है। कई गांवों में पानी घुस जाने से लोगों ने घर छोड़ना शुरू कर दिया है। खुद नाव का इंतजाम कर सुरक्षित ठिकानों की ओर जा रहे हैं। बाढ़ से करीब 80 हजार की आबादी पर संकट मंडराने लगा है। बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने से एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 39 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। नदी का पानी करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। सोमवार को करीब 3.77 लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़े जाने से महसी, नानपारा और मिहींपुरवा तहसील के निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं। बाढ़ से खेत जलमग्न होने के साथ कई स्थानों पर कटान भी शुरू हो गया है।
महसी तहसील में बाढ़ का असर तेजी से बढ़ा है। चंदौली, शुक्लनपुरवा, गोलागंज कोठार, गोलागंज नई बस्ती, पिपरी, पिपरा, गौरिया, पूरे प्रसाद, जोधेपुरवा, महंतपुरवा, पंचदेवरी, कोनी, फक्कड़पुरवा, रामदीनपुरवा और चमरही गांव बाढ़ की चपेट में हैं। कोनी, फक्कड़पुरवा, रामदीनपुरवा और चमरही गांव में पानी गांवों के अंदर पहुंच गया है, जबकि अन्य गांव चारों तरफ से पानी से घिर गए हैं। सिलौटा गांव के लोग नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार करीब 50 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। घरों में पानी पहुंचने से खाद्य सामग्री, पशुओं और घरेलू सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
वहीं नानपारा तहसील के शिवपुर क्षेत्र में भी नदी के बढ़े जलस्तर और कटान ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्राम पंचायत चौकसाहार के मजरा झुंडी में लाल बहादुर की आवासीय झोपड़ी नदी में समा गई, जबकि ग्राम पंचायत बौंडी में 15 किसानों की करीब 2.310 हेक्टेयर, तिगड़ा में 12 किसानों की 2.010 हेक्टेयर तथा अंबरपुर में 1.508 हेक्टेयर भूमि नदी में समाहित हुई है। बेलामकन, चौकसाहार समेत कई गांवों के घर भी कटान की चपेट में हैं।
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उधर मिहींपुरवा तहसील के जंगल गुलरिया ग्राम पंचायत के सभी नौ मजरे संपतपुरवा, धर्मपुर रेतिया, रामपुर रेतिया, नया पुरवा, गौहड़ी, धनियाबेली, भैसा-बुढ़ना, बद्रीपुरवा और नौकापुरवा बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां करीब 14 हजार की आबादी का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। सुजौली ग्राम पंचायत में करीब पांच हजार आबादी प्रभावित है। खैरीपुरवा, टिलवा, अंशिका मुंजवा, परसपुरवा, 53 परसपुरवा और कन्हैयापुरवा तथा मौरहवा में भी बाढ़ का पानी बढ़ रहा है। घरों और रास्तों में पानी भरने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
नानपारा के एसडीएम प्रकाश सिंह और तहसीलदार विकास कुमार, महसी के उपजिलाधिकारी राजेश कुमार अग्रवाल तथा मिहींपुरवा की एसडीएम मोनालिसा जौहरी ने प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से संवाद किया और उनकी समस्याएं जानीं। सभी उपजिलाधिकारियों ने बताया कि राजस्व टीमों को अलर्ट करते हुए प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में पठन-पाठन ठप
अचानक आई बाढ़ के चलते महसी तहसील के प्रभावित गांवों में स्थित प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित हो गया है। जलभराव के कारण विद्यार्थी स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। मिहींपुरवा और शिवपुर क्षेत्र के विद्यालय भी प्रभावित हुए हैं। शिक्षकों और अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है।
नाव मांगने पर लेखपाल ने कहा- ग्राम प्रधान से कहें
बाढ़ का पानी गांव में घुसने के बाद जोधेपुरवा के ग्रामीणों ने नाव उपलब्ध कराने के लिए लेखपाल छोटेलाल से गुहार लगाई। ग्रामीणों के अनुसार लेखपाल ने नाव की व्यवस्था अपने पास नहीं होने की बात कहते हुए ग्राम प्रधान से संपर्क करने को कहा। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
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महसी तहसील में बाढ़ का असर तेजी से बढ़ा है। चंदौली, शुक्लनपुरवा, गोलागंज कोठार, गोलागंज नई बस्ती, पिपरी, पिपरा, गौरिया, पूरे प्रसाद, जोधेपुरवा, महंतपुरवा, पंचदेवरी, कोनी, फक्कड़पुरवा, रामदीनपुरवा और चमरही गांव बाढ़ की चपेट में हैं। कोनी, फक्कड़पुरवा, रामदीनपुरवा और चमरही गांव में पानी गांवों के अंदर पहुंच गया है, जबकि अन्य गांव चारों तरफ से पानी से घिर गए हैं। सिलौटा गांव के लोग नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार करीब 50 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। घरों में पानी पहुंचने से खाद्य सामग्री, पशुओं और घरेलू सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
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वहीं नानपारा तहसील के शिवपुर क्षेत्र में भी नदी के बढ़े जलस्तर और कटान ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्राम पंचायत चौकसाहार के मजरा झुंडी में लाल बहादुर की आवासीय झोपड़ी नदी में समा गई, जबकि ग्राम पंचायत बौंडी में 15 किसानों की करीब 2.310 हेक्टेयर, तिगड़ा में 12 किसानों की 2.010 हेक्टेयर तथा अंबरपुर में 1.508 हेक्टेयर भूमि नदी में समाहित हुई है। बेलामकन, चौकसाहार समेत कई गांवों के घर भी कटान की चपेट में हैं।
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उधर मिहींपुरवा तहसील के जंगल गुलरिया ग्राम पंचायत के सभी नौ मजरे संपतपुरवा, धर्मपुर रेतिया, रामपुर रेतिया, नया पुरवा, गौहड़ी, धनियाबेली, भैसा-बुढ़ना, बद्रीपुरवा और नौकापुरवा बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां करीब 14 हजार की आबादी का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। सुजौली ग्राम पंचायत में करीब पांच हजार आबादी प्रभावित है। खैरीपुरवा, टिलवा, अंशिका मुंजवा, परसपुरवा, 53 परसपुरवा और कन्हैयापुरवा तथा मौरहवा में भी बाढ़ का पानी बढ़ रहा है। घरों और रास्तों में पानी भरने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
नानपारा के एसडीएम प्रकाश सिंह और तहसीलदार विकास कुमार, महसी के उपजिलाधिकारी राजेश कुमार अग्रवाल तथा मिहींपुरवा की एसडीएम मोनालिसा जौहरी ने प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से संवाद किया और उनकी समस्याएं जानीं। सभी उपजिलाधिकारियों ने बताया कि राजस्व टीमों को अलर्ट करते हुए प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में पठन-पाठन ठप
अचानक आई बाढ़ के चलते महसी तहसील के प्रभावित गांवों में स्थित प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित हो गया है। जलभराव के कारण विद्यार्थी स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। मिहींपुरवा और शिवपुर क्षेत्र के विद्यालय भी प्रभावित हुए हैं। शिक्षकों और अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है।
नाव मांगने पर लेखपाल ने कहा- ग्राम प्रधान से कहें
बाढ़ का पानी गांव में घुसने के बाद जोधेपुरवा के ग्रामीणों ने नाव उपलब्ध कराने के लिए लेखपाल छोटेलाल से गुहार लगाई। ग्रामीणों के अनुसार लेखपाल ने नाव की व्यवस्था अपने पास नहीं होने की बात कहते हुए ग्राम प्रधान से संपर्क करने को कहा। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है।

सरयू में बाढ़ से गांवों में बिगड़े हालात।

सरयू में बाढ़ से गांवों में बिगड़े हालात।

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